काम का जज्बा हो तो उम्र मायने नहीं रखती
एन. रघुरामन | Jul 09, 2012, 09:59AM IST

सरकार व कंपनियां अपने कर्मचारियों को एक निश्चित उम्र के बाद रिटायर कर सकती हैं। लेकिन आपको अपने जीवन से रिटायर होने की जरूरत नहीं है। बढ़ती उम्र को हराने के लिए अपने आपको लगातार पुश करें और फिर देखें कि कैसे आपके व्यक्तित्व में चमक आ जाती है।
रंगमंच व फिल्मों की मशहूर अदाकारा जोहरा सहगल ने पिछले महीने अपने जीवन का शतक पूरा किया। इस अवसर पर दैनिक भास्कर ने उनकी एक केक काटती हुई तस्वीर प्रकाशित की, जिसका शीर्षक था- 'बुड्ढा होगा तेरा बाप'। इस अभिनेत्री के लालित्य और मुस्कान ने पिछले साठ सालों से बॉलीवुड सिनेमा को रौशन कर रखा है। उनकी खुशमिजाजी और जोश थिएटर व फिल्मों में समान रूप से नजर आता रहा है। वह आखिरी बार संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सांवरिया' में नजर आई थीं।
ऑस्कर विजेता हॉलीवुड अभिनेता मॉर्गन फ्रीमैन ने इसी 1 जून को जीवन के 75 बसंत पार किए, लेकिन वह जरा भी सुस्त नहीं पड़े हैं। जल्द ही वह बैटमैन शृंखला 'द डार्क नाइट राइजेस' में नजर आएंगे। फिलहाल वह टॉम क्रूज संग 'ऑब्लिवियन' जैसी विज्ञान-फंतासी फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं। लेकिन वह अपने इस व्यस्त शेड्ïयूल में से भी अपने पसंदीदा प्रोजेक्ट के लिए समय निकाल ही लेते हैं। उनका यह पसंदीदा प्रोजेक्ट 'थ्रू द वर्महोल विद मॉर्गन फ्रीमैन' नामक टीवी शो है, जिसका 6 जून से साइंस चैनल पर तीसरा सीजन शुरू हुआ है। फ्रीमैन इस सीरीज के एक्जीक्यूटिव प्रोड्ïयूसर व होस्ट हैं। मुझे याद है कि जब जूलिया चाइल्ड की मौत हुई, तब उनके 92 साल के होने में कुछ ही दिन शेष थे। उन्होंने जीवन के नौवें दशक में प्रवेश करने से कुछ समय पहले तक टेलीविजन पर काम किया और वे लिखती भी रहीं। इसी तरह हममें से कई लोगों ने पूर्व अमेरिकी राष्टï्रपति जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश को अस्सी साल की उम्र में एक हवाई जहाज से कूदते हुए देखा है। मदर टेरेसा भी अपने जीवन की अंतिम सांस तक सक्रिय रहीं। इस साल 11 अक्टूबर को सत्तर साल के होने जा रहे बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन कदाचित ही घर में रुकते हैं। आज भी जब वह किसी सेट पर पहुंचते हैं, तो उनकी व अन्य अभिनेत्रियों की उम्र में कम से कम चालीस बरस का फासला होता है। उनके बारे में सबसे अहम बात यह है कि इस उम्र में भी वह बॉक्स ऑफिस पर सर्वाधिक चलने वाले सितारों में से एक हैं और टीवी पर भी उनका सिक्का खूब चलता है।
मैंने एक किताब पढ़ी थी, जिसका शीर्षक था- 'इट हैज नथिंग टू डू विद एज'। यह किताब ऐसे लोगों के बारे में है, जो खुद को शारीरिक चरम सीमाओं तक ले जाने का हौसला रखते हैं और उम्र को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने देते। इस किताब में कुछ सेल्फ-हेल्प सिद्धांत हैं। इसकी प्रेरणादायी गाथाओं में जीवन की चुनौतियों से पार पाने के ठोस दृष्टïांत दिए गए हैं। इसमें बताया गया कि किस तरह लोगों ने अवसाद, विषाद, तलाक व मौत इत्यादि से जुड़ी मुश्किलों से पार पाया। इसमें एथलीट्ïस द्वारा शारीरिक क्षति, चोट, वजन बढऩे की समस्याओं पर काबू पाने के अलावा शराब और तंबाकू जैसी लतों से पीछा छुड़ाने के बारे में भी बताया गया है। शोध बताते हैं कि व्यायाम डिप्रेशन, स्ट्रोक, हृदय रोग, दिमागी या संज्ञानात्मक खराबी और एल्जाईमर्स जैसे रोगों के उपचार का एक अहम घटक है। आज जब मैं अमिताभ बच्चन को सुबह ठीक 6:10 पर मुंबई के जुहू इलाके में स्थित जेडब्ल्यू मेरियट होटल के जिम में प्रवेश करते हुए देखता हूं, तो मुझे यकीन हो जाता है कि वह लगातार बढ़ती अपनी उम्र को चुनौती दे रहे हैं। raghu@bhaskarnet.com






