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अच्छे उपहार निचली दराज में ही होते हैं..

एन. रघुरामन | Jul 20, 2012, 11:22AM IST
 
 

एक युवक को किराना स्टोर में नौकरी मिल गई। काम के पहले दिन मैनेजर ने उसके हाथ में झाड़ू पकड़ाते हुए उससे फर्श बुहारने के लिए कहा। यह सुनकर नया कर्मचारी सन्न रह गया और बोला, ‘लेकिन मैं एक कॉलेज ग्रेजुएट हूं।’ मैनेजर ने उसके सामने दो विकल्प रखे।

पहला विकल्प : तो क्या हुआ, तुम शायद सोचते हो मैं इतना पढ़ा-लिखा हूं और झाड़ू कैसे लगा सकता हूं। लेकिन झाड़ू लगाना तुम्हारे कांट्रेक्ट का हिस्स है। क्या तुमने कांट्रेक्ट लेटर ध्यान से नहीं पढ़ा, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि ‘यदि तुम अपने सीनियर द्वारा दिए गए किसी भी काम को करने से इनकार करते हो, तो तुम्हारे खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।’

दूसरा विकल्प : ‘ओह, सॉरी,’ ‘झाड़ू मुझे दो और मैं तुम्हें बताता हूं कि यह कैसे लगाई जाती है। कॉलेजों में इन दिनों रोजमर्रा के जीवन और साफ-सफाई से जुड़ी बुनियादी बातें नहीं सिखाई जातीं। यहां पर दो मिनट में यह सीख जाओगे। डोंट वरी।’ बॉस को अपने हाथों में झाड़ू लेने में शर्मिदगी नहीं लगती। वास्तव में वह इन सबसे ऊपर उठ चुका था। जिंदगी का एक खास सबक यह है कि यदा-कदा खुद को नीचे झुकाते हुए हम सच्ची संतुष्टि का अनुभव करते हैं। अब देखें कि अभ्यर्थियों ने किस तरह के जवाब दिए।

पहला अभ्यर्थी : ‘सर, सॉरी। यदि मेरे जॉब में रोज झाड़ू लगाना भी शामिल है, तो मैं आपको बता दूं कि मेरे घर में तीन-तीन नौकर हैं। मैंने रिटेल मैनेजमेंट में एमबीए किया है और मैं यहां मैनेजर का काम या रिटेल स्टोर मैनेजमेंट सीखने-समझने आया हूं, न कि फर्श पर झाड़ू लगाने के लिए। मुझे लगता है कि इस संस्थान के साथ मेरी केमिस्ट्री नहीं जमेगी। लिहाजा मुझे जाने की इजाजत दें।’ और वह काम छोड़कर चला गया।

दूसरा अभ्यर्थी : अपने दोस्त को मैनेजर से यह कहते हुए सुनकर दूसरा अभ्यर्थी हैरान रह गया। अपने दोस्त के जाने के बाद उसे भी एक पल के लिए लगा कि वह इस जगह से निकल जाए। लेकिन वह कोई फैसला कर पाता, इससे पहले उसके पास दोस्त के दो एसएमएस आए, जिनमें लिखा था- ‘तुम अब भी इस घटिया जगह पर काम करने के बारे में सोच रहे हो?’ लेकिन दूसरा अभ्यर्थी चुपचाप झाड़ू उठाकर फर्श बुहारने लगता है। उसके दिमाग में उस वक्त यह चल रहा था कि ‘मैं देखता हूं कि ये नए अभ्यर्थी के साथ क्या करते हैं। जब कॉलेज में सीनियरों ने मेरी रैगिंग ली थी, तब भी तो मैंने यही किया था। इसमें नया क्या है?’उस दिन उसने मैनेजर के कहे मुताबिक हर काम किया। लंच के बाद उसके बॉस ने उसे बुलाकर कहा कि कल से तुम्हें झाड़ू लगाने की जरूरत नहीं। यह तो सिर्फ एक टेस्ट था कि कभी इमरजेंसी में यदि कोई ग्राहक फर्श पर कुछ गिरा देता है, तो तुम किसी के आने का इंतजार किए बगैर उसे साफ कर सकते हो या नहीं? यह दूसरा अभ्यर्थी छह महीने में स्टोर मैनेजर बन गया क्योंकि उसने हर काम किया और समझा कि इसे कैसे किया जाता है, इसे करना कितना मुश्किल या आसान। इससे वह अपने बलबूते स्टोर संभालने लायक बन सका। आज वह नए अभ्यर्थियों के हाथों में झाड़ू पकड़ाते हुए उन्हें पहले दिन फर्श बुहारने के लिए कहता है।
 
 
 

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