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जॉब के दौरान हमेशा रहें सतर्क

एन. रघुरामन | Aug 01, 2012, 09:40AM IST
 
 

संजय नारायण किसी सरकारी सहायता प्राप्त वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से इलेक्ट्रिकल का कोर्स करना चाहता था। तमिलनाडु के तंजावुर नामक उसके गृहनगर में इलेक्ट्रिक का काम करने वाले हुनरमंद लोगों की कमी थी और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में आए बूम ने इन लोगों को अचानक अमीर बना दिया था। लेकिन संजय के लिए छह महीने के कोर्स के लिए ३०,000 रुपए की फीस का इंतजाम करना नामुमकिन-सा था। हालांकि अब वह १ अगस्त २०१२ से इस कोर्स को ज्वाइन करने जा रहा है। इसमें सहायक बना एक राष्ट्रीयकृत बैंक, जिसने उसे कर्ज दिया। दरअसल संजय एक बैंक अधिकारी के घर में छोटा-मोटा काम करता था, जिसके यहां उसे कर्ज की एक नई योजना के बारे में जानकारी मिली। बाद में उसी बैंक अधिकारी ने उसे कर्ज दिलाने में मदद की।

ऐसा नहीं है कि संजय को बॉस ने स्वेच्छा से यह जानकारी दी। संजय की आदत थी कि वह अपने बॉस की टेबल पर हरेक दस्तावेज को उसकी केटेगरी के मुताबिक जमाकर रखता था। यह संजय की जिज्ञासा और आदत ही थी, जिसके चलते इस स्कीम की मंजूरी के दस्तावेज पर उसकी नजर पड़ी। इसके बाद उसने अपने बॉस से बात करते हुए इसके बारे में उनसे मदद मांगी। हालांकि पॉलीटेक्निक और अन्य अल्पकालीन पाठ्यक्रम भी रोजगार के अवसर मुहैया कराते हैं, लेकिन बैंकरों के पास इन पाठ्यक्रमों हेतु कर्ज देने का कोई रास्ता नहीं था। प्रधानमंत्री की राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद ने इंडियन बैंकर्स एसोसिएशन (आईबीए) के साथ बात करते हुए उन्हें इस बात के लिए राजी किया कि वे तीन महीने जैसी अल्पावधि वाले पाठ्यक्रमों के लिए भी कर्ज दें।

कोटक सिक्युरिटीज लिमिटेड की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत को इस तरह के तमाम कामों के लिए २०२२ से पहले कम से कम साढ़े सैंतालीस करोड़ लोगों की दरकार होगी। ऐसे में आश्चर्य नहीं कि वोकेशनल ट्रेनिंग का भारत में सालाना कारोबार तकरीबन एक लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इस कर्ज योजना के लिए छात्रों को किसी तरह की सिक्युरिटी नहीं देनी पड़ती और इसके लिए कोई आयुसीमा भी नहीं है। अध्ययन की अवधि के दौरान और कर्ज की अदायगी शुरू होने तक साधारण ब्याज ही लिया जाएगा। एक साल के पाठ्यक्रमों के लिए कर्ज अदायगी ऋण स्थगन के बाद दो से पांच सालों के बीच की जा सकती है। एक साल से ज्यादा अवधि के पाठ्यक्रमों के लिए तीन से सात सालों में कर्ज अदा किया जा सकता है। इस योजना के तहत छात्रों को २०,000 रुपए से लेकर १,५०,000 रुपए तक का कर्ज मिल सकता है।

भारत अगले दस वर्षों में तकरीबन ५० करोड़ लोगों को ऐसा कोई हुनर सिखाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, लिहाजा यह योजना न सिर्फ गांवों व निम्न आर्थिक वर्ग से आने वाले छात्र/छात्राओं के लिए मददगार साबित होगी, वरन उन्हें भी कोई हुनर सीखने में मदद करेगी, जो अपनी खराब आर्थिक स्थिति के चलते इस तरह के कोर्स में दाखिला नहीं ले पाते। शीर्ष निकाय के तौर पर राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है, जिसने आईबीए के साथ इस नए कर्ज के संवितरण की रूपरेखा के बारे में लंबी बातचीत की।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन

फंडा यह है कि... raghu@dainikbhaskargroup.com

सजगता ही सफलता की कुंजी है। भाग्य सबके दरवाजे पर दस्तक देता है। अब यह हम पर निर्भर है कि हम कैसे इसे भुनाते हुए इसका फायदा उठाते हैं। लेकिन यदि आप भाग्य की इस दस्तक को पहचानने के लिहाज से सजग नहीं रहते, तो यह कभी आपके दरवाजे पर दोबारा दस्तक नहीं देगा।
 
 
 

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