सर्वांगीण विकास हो बच्चों का
एन. रघुरामन
| Aug 04, 2012, 09:31AM IST

अब प्रश्न उठता है कि बच्चा कितने घंटे टीवी देखता है? कामकाजी अभिभावकों के घर में हफ्ते में बच्चा 20 से 26 घंटे टीवी देखता है। इसमें उसके द्वारा मोबाइल और वीडियो गेम्स खेलते हुए बिताया गया समय भी शामिल है। इस अवधि को घटा देने के बाद बच्चे के पास महज चार घंटे खेलने के लिए बचते हैं, वह भी हफ्ते भर में। अब जरा आप बताएं कि बच्चे को अपने शारीरिक विकास के लिए समय कब मिलता है? इन आंकड़ों की दूसरी तस्वीर पर गौर फरमाएं। बच्चों की वर्तमान पीढ़ी जब दूसरी क्लास में पहुंचती है, तो उसके वजन में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी होती है। जबकि 20 साल पहले दूसरी क्लास के बच्चों में वजन में ऐसी बढ़ोतरी देखने में नहीं आती थी। ऐसे कई निष्कर्ष सर्वे में भी सामने आ चुके हैं। इसी तरह जब वे चौथी क्लास में पहुंचते हैं, तो 20 साल पहले की तुलना में उनकी कमर काफी बढ़ चुकी होती है। जाहिर है कि हफ्ते में महज चार घंटे जब खेलने के लिए मिलेंगे, तो आप उनसे और क्या उम्मीद कर सकते हैं?
मुझे याद है जब मेरे जमाने में अधिसंख्य लोग टीवी खरीद 'बुनियाद' जैसे धारावाहिकों से चिपके रहते थे, तब मेरे परिवार ने एक सर्वसम्मत निर्णय लिया था। यह निर्णय था टीवी न खरीदने का। इसी तरह जब देश में केबल टीवी का आगाज हुआ, तो मेरे दादाजी को कई लोगों ने इसके लिए तैयार करना चाहा। लेकिन मेरे सेवानिवृत्त आर्मी अफसर दादाजी ने उनकी बातों पर कान नहीं दिए। उनका दृढ़ विश्वास था कि टीवी का कोई शैक्षणिक महत्व नहीं है, खासकर जब तक आप बच्चों द्वारा देखे जाने वाले कंटेंट पर निगाह न रखें। उनका कहना था कि वैसे भी बच्चों पर हफ्ते में 61 घंटे लगातार निगाह रखी जाती है। इसमें स्कूल में बिताया जाने वाला समय और घर पर किए जाने वाले होमवर्क की अवधि शामिल है। वह अक्सर चिल्लाकर कहते थे कि आखिर एक बच्चे पर और कितनी निगाह रखोगे? मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप सब टीवी मुक्त जिंदगी जीएं। यहां बात महज बच्चों के सर्वांगीण विकास की है। बच्चों को एक्सपोजर का मौका दें। उन्हें स्वयं निर्णय करने दें कि वे टीवी देखते हुए मोटापे का शिकार होना चाहते हैं या शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हुए स्वस्थ वयस्क में तब्दील होना चाहते हैं।
मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन
फंडा यह है कि... raghu@dainikbhaskargroup.com
एमआईएस के बल पर व्यापार में सतत विकास पर ही निगाह नहीं रखी जाती। यह हमारे दैनिक जीवन का भी अभिन्न अंग है। इसे अपनी जिंदगी में आत्मसात कर हम अगली पीढ़ी को विकसित होने के भरपूर मौके दे सकते हैं। ध्यान रखें कि आज के दौर में समृद्धि का नया मंत्र है और यह है स्वस्थ व फिट रहना।






