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सफलता के लिए समझें टीम भावना का महत्व

एन. रघुरामन | Aug 10, 2012, 09:37AM IST
 
 

अगर आपने लंदन ओलिंपिक में विभिन्न खेल स्पर्धाओं को देखा है, तो इनसे 'सम्मिलित प्रयास' यानी टीम भावना रूपी सर्वाधिक महत्वपूर्ण मैनेजमेंट सबक सीख सकते हैं। खेल जगत समेत व्यावसायिक स्तर पर सम्मिलित प्रयासों की महत्ता को कोई भी नकार नहीं सकता। फुटबॉल, हैंडबॉल, हॉकी और बास्केटबॉल सरीखे खेलों में टीम भावना स्पष्ट देखी जा सकती है, तो तैराकी से लेकर बॉक्सिंग सरीखे खेलों तक में यही भावना निहित होती है। यह अलग बात है कि टीम भावना का यह प्रदर्शन इन खेलों में परदे के पीछे ही रह जाता है। यकीन मानिए सामूहिक स्तर पर विस्तृत रणनीति और उसपर अमल के बाद ही एक खिलाड़ी श्रेष्ठ प्रदर्शन कर स्टार का दर्जा प्राप्त करता है।

यहां मैं लंदन ओलिंपिक में कांस्य पदक विजेता भारतीय महिला मुक्केबाज मेरीकॉम का जिक्र करना चाहूंगा। उनसे पिछले वर्ष नई दिल्ली में लिम्का बुक ऑफ रिकॉड्र्स के स्पोट्र्स एचीवर्स संस्करण के विमोचन पर मुलाकात हुई। उन दिनों वह एशियाई खेलों के सिलसिले में पटियाला में तैयारी कर रही थीं। मैंने वहां मेरीकॉम को अपने बचपन के बारे में बताते हुए सुना, जो बेहद गरीबी और संघर्ष में बीता। मेरीकॉम बचपन से ही बॉक्सिंग में कॅरियर बनाना चाहती थीं। मणिपुर में राज्यस्तरीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीतने के वक्त वह किशोरवय ही थीं। इस जीत के बाद जब उनकी फोटो अखबारों में छपी, तब उनके माता-पिता को समझ में आया कि मेरीकॉम वास्तव में क्या हैं।

मेरीकॉम का मणिपुर के जनजातीय इलाके कंगाथी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर छाने तक का सफर न सिर्फ प्रेरक है, बल्कि संघर्ष की अनूठी दास्तां भी प्रस्तुत करता है। किसी भी खेल में सफल होना न सिर्फ शारीरिक स्तर पर चुनौतीपूर्ण है, बल्कि अगर आप दो बच्चों की मां हैं, तो यह चुनौती और भी बढ़ जाती है। मेरीकॉम ने इन दोनों मोर्चों पर अपने दम-खम का प्रदर्शन कर सफलता अर्जित की। चीन में 8 मई 2011 को मेरीकॉम ने 48 किग्रा वर्ग भार में एशियाई महिला मुक्केबाजी में स्वर्ण हासिल किया। इस स्वर्ण का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि मेरीकॉम ने व्यक्तिगत स्तर पर कई चुनौतियों को पार पाते हुए यह कारनामा अंजाम दिया। जब वह उस स्पर्धा में भाग लेने के लिए चीन रवाना हो रही थीं, तब उनका बेटा चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती था। उसे दिल की समस्या थी, जिसका ऑपरेशन होना था। उनके फुटबॉलर पति, जिन्होंने अपने खेल कॅरियर को त्याग दिया, ही उस वक्त बच्चे के साथ थे। ऐसी स्थिति में अपने बच्चे को पीछे छोड़ किसी मुक्केबाजी स्पर्धा में भाग लेने का निर्णय करना आसान नहीं होता है। लेकिन मेरीकॉम ने यह किया और स्वर्ण जीता।

लगातार पांच विश्व चैंपियनशिप विजेता मेरीकॉम के खाते में चार एशियाई चैंपियनशिप और 11 राष्ट्रीय खिताब भी हैं। उन्हें अर्जुन पुरस्कार के अलावा पद्मश्री और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। गौरतलब है कि 2000 में एशियाई महिला मुक्केबाजी स्पर्धा के लिए सलेक्शन कैंप में भाग लेने के लिए आते वक्त मेरीकॉम का सारा सामान और जरूरी दस्तावेज चोरी हो गए थे। इसके बावजूद मेरीकॉम फाइनल में जगह बनाने में सफल रहीं। इससे जाहिर होता है कि मेरीकॉम सही अर्थों में योद्धा हैं, जो विपरीत परिस्थिति में हार नहीं मानतीं।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन

फंडा यह है कि... raghu@dainikbhaskargroup.com

मेरीकॉम ने सिद्ध किया है कि किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर तो सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन जरूरी है ही, लेकिन टीम भावना को भी कमतर नहीं आंक सकते। यदि आप अपनी संस्था या व्यवसाय को सफलता दिलाना चाहते हैं, तो उसमें खेल प्रेमियों को शामिल करें जिनमें टीम भावना हो।
 
 
 

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