बच्चों की प्रेरणा बन सकते हैं ओलिंपिक
एन. रघुरामन
| Aug 14, 2012, 09:36AM IST

गौरतलब है कि 1896 में ओलिंपिक का अर्थ 'पुरुष खिलाडिय़ों के लिए उल्लास' के अवसर सरीखा था। महिलाएं खिलाडिय़ों के उत्साहवर्धन तक सीमित थीं। 1924 में पहली बार सौ महिला खिलाडिय़ों ने शिरकत की। 1972 में महिला खिलाडिय़ों की संख्या ने एक हजार का आंकड़ा पार किया, तब भी ओलिंपिक में भाग लेने वाले महिला-पुरुष खिलाडिय़ों का अनुपात एक पर छह का ही था। लेकिन इसके बाद स्थिति बदलनी शुरू हुई। ओलिंपिक 2012 में तो 26 खेलों में बतौर प्रतिभागी शामिल होने वाली महिला खिलाडिय़ों का अनुपात 44 फीसदी था। लंदन ओलिंपिक में ही पहली बार महिला मुक्केबाजी प्रतिस्पर्धा को स्थान मिला। इसमें भारतीय महिला मुक्केबाज मेरीकॉम कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहीं।
ओलिंपिक के प्रति वैश्विक उत्साह से क्रिकेट आयोजक भी परिचित हैं। इसी कारण वे दो दशक से ओलिंपिक में क्रिकेट को शामिल करने की पैरवी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नाकामी ही हाथ लगी है। इसकी प्रमुख वजह कम देशों द्वारा क्रिकेट को खेला जाना है। ट्वेंटी-20 वर्जन की शुरुआत के वक्त एडम गिलक्रिस्ट, स्टीव और मार्क वॉ जैसे दिग्गजों को उम्मीद थी कि इससे क्रिकेट को ओलिंपिक में जगह मिल जाएगी। लेकिन जबर्दस्त पैसे और प्रशंसकों की संख्या के बावजूद क्रिकेट ओलिंपिक में जगह नहीं बना पाया है। यही कारण है कि ओलिंपिक के दौरान क्रिकेट समाचारपत्रों के मुख्य पृष्ठ और खबरिया चैनलों के प्राइम टाइम से लगभग गायब रहा।
अगर आप पूर्वी भारत खासकर मणिपुर जाएं, तो वहां प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न खेलों के लिए जुटाई गई सुविधाओं की प्रशंसा किए बगैर नहीं रह सकेंगे। उन्होंने ऐसी सुविधाएं और आधारभूत ढांचा जुटाया है, जो हमारे महानगरों के स्पोट्र्स कांप्लेक्स को फीका कर सकता है। देश के अन्य हिस्सों की तुलना में इस हिस्से के बच्चों की खेलकूद में ज्यादा भागीदारी है। इन इलाकों भी कंप्यूटर, वीडियो गेम्स और फेसबुक की उपस्थिति है, लेकिन वहां ज्यादातर बच्चे वर्चुअल दुनिया की अपेक्षा खेल के मैदान में ज्यादा समय बिताना श्रेयस्कर समझते हैं।
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मणिपुर में बच्चे कंप्यूटर या वीडियो गेम रूपी वर्चुअल दुनिया के सापेक्ष खेल के मैदान में ज्यादा समय बिताते हैं। अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे वर्चुअल दुनिया के लती हो रहे हैं, तो क्रिकेट के सापेक्ष ओलिंपिक की लोकप्रियता और मणिपुर में खेल सुविधाओं के बारे में सोचें। मीडिया भी इसी कारण क्रिकेट से ज्यादा ओलिंपिक को तरजीह देता आ रहा है।
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