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अपनी आजादी के लिए शुक्रिया जताएं हम

N.raghuraman | Aug 15, 2012, 10:32AM IST
 
 

फंडा यह है कि...

धन्यवाद देना एक अच्छी मैनेजमेंट प्रेक्टिस है। यह सिर्फ श?दों तक सीमित नहीं होना चाहिए। अपने कर्मों, मुस्कान, तोहफों और शारीरिक हाव?भाव से भी प्रदर्शित होनी चाहिए। क्या हम धीरूभाई अंबानी या जेआरडी टाटा को उनकी जयंती पर याद नहीं करते? क्या हम प्रत्येक ओलिंपिक पर मिल्खा सिंह को याद नहीं करते? क्या हम इंडिया गेट पर 'अमर जवान ज्योति' के समक्ष नमन कर अमर शहीदों को याद नहीं करते? हमारी जिंदगी में खुशहाली और आनंद देने वाले प्रत्येक श?स को धन्यवाद देना ही हमारी संस्कृति है।

raghu@dainikbhaskargroup.com

हॉल से पेपर लाकर बेडरूम में मेरे हाथ में पकड़ाने पर मैं अपनी बेटी को हमेशा 'शुक्रिया' कहता था। यदि कभी मैं किसी फोन कॉल में व्यस्त होने की वजह से उससे 'धन्यवाद' नहीं कह पाता, तो वह मूर्ति की तरह खड़ी रहती और कुछ देर बाद मुझसे कहती, 'आप कुछ कहना भूल गए हैं'। और मैं तुरंत खेद व्यक्त करते हुए उसे मुस्कराकर 'थैंक्स' कहता। इसके बाद वह अपनी ट्राईस्किल पर बैठकर वापस खेलने चली जाती।

यह तो खैर १८ साल पुरानी बात है, लेकिन आज भी वह उ?मीद करती है कि मैं उसके द्वारा किए जाने वाले छोटे?मोटे कामों के लिए 'थैंक्स' कहूं। वह इस श?द को सुन?सुन कर थकी नहीं है और न ही मैं इसे दोहराते हुए।

महाराष्ट्र में वर्धा के निकट सेवाग्राम गांधी आश्रम में मेरा काफी बचपन गुजरा है। वहां भी स्वतंत्रता दिवस पर बच्चे अपने बड़ों को आजादी दिलाने के लिए धन्यवाद कहते थे। आश्रम में ऐसे कई वरिष्ठजन मौजूद थे, जिन्होंने स्वतंत्रता के आंदोलन में हिस्सा लिया था और ब्रिटिश राज की मुखालिफत करते हुए जेल काटी थी।

बचपन की इस आदत के चलते मैं जब भी नई दिल्ली में इंडिया गेट के पास 'अमर जवान ज्योति' के सामने से गुजरता हूं, तो मेरा सिर श्रद्धा से अपने आप झुक जाता है। मैं उन शहीद सैनिकों को नमन करना नहीं भूलता, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमारी आजादी की रक्षा की। मेरे लिए वे सैनिक महान हैं जो बीस हजार फीट की ऊंचाई पर शून्य से 70 डिग्री कम तापमान पर रहकर हमारी सीमा की रक्षा करते हैं।

मैं अक्सर सोचता हूं कि उन्हें एक ग्रीटिंग कार्ड भेजना चाहिए, जिसमें भारतीय होने के नाते उन पर गर्व करने का संदेश हो। हमें उनके समर्पण और जि?मेदारी की सराहना करते हुए उनका धन्यवाद करना चाहिए। हाल ही में मुझे 21 फूल्स डॉट कॉम वेबसाइट पर जाने का मौका मिला। जयपुर, राजस्थान से ऑपरेट की जाने वाली यह वेबसाइट मेरी सोच जैसा ही काम करती है। यह साइट महज 50 रुपए की मामूली फीस लेकर हर सैनिक को ग्रीटिंग कार्ड भेजती है। इसके लिए वेबसाइट ने भारतीय सेना और कुछ कॉरपोरेट घरानों के साथ टाइ?अप किया हुआ है। साइट द्वारा भेजे जाने वाले ग्रीटिंग काड्र्स की डिजाइन भारत के 28 राज्यों में वास करने वाले लोगों पर केंद्रित है। गौरतलब है अपने जीवनसाथी, बच्चों और अभिभावकों के प्रति अपना स्नेह प्रदर्शित करने के लिए बोला जाने वाला 'आई लव यू' बेहद सामान्य वाक्य है। हम इस वाक्य का इस्तेमाल यह जानते हुए करते हैं कि वे हमारी भावनाओं से भली?भांति परिचित हैं। हम उन्हें काड्र्स और फूलों के गुलदस्ते भेंट कर उनके प्रति अपने अनुराग को दर्शाते रहते हैं। इसी तरह हमारे जवान जानते हैं कि प्रत्येक भारतीय उन्हें उनकी बहादुरी के लिए सराहता है। इसके बावजूद कभी?कभी इसे श?दों द्वारा प्रदर्शित करना भी जरूरी हो जाता है। इसे समझते हुए आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन सभी को लोगों को धन्यवाद कहें, जो हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं। अगर आपको अपने आसपास ऐसे लोग नहीं मिले, तो फेसबुक, ट्विटर पर यह संदेश दें। उन्हें पत्र भी लिख सकते हैं।
 
 
 

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