लगातार बढ़ाते रहें अपने ज्ञान को
एन. रघुरामन
| Aug 27, 2012, 09:46AM IST

नई कहानी : अगर आप 21वीं सदी के अमेरिका में रह रहे हैं, तो अधिसंख्य लोग अपनी व्यस्तता का रोना रोते मिल जाएंगे। यह प्रवृत्ति भारत में भी तेजी से पैर पसार रही है। अमेरिका में आप किसी से भी पूछिए कि कैसा चल रहा है। जवाब यही मिलेगा, 'बिजी। सो बिजी, क्रेजी बिजी।' जाहिर है कि इस शिकायती लहजे के पीछे कहीं न कहीं अपनी बड़ाई छिपी होती है।
ऐसा नहीं है कि हम इसी तरह की जिंदगी चाहते हैं। वास्तव में हम सामूहिक रूप से इस व्यस्तता को परस्पर थोपने का काम कर रहे हैं। गौर करें कि अस्पताल के आईसीयू में कोई भी लगातार शिफ्ट्स में काम नहीं करता। कोई भी अलग-अलग नौकरी के सिलसिले में दिन भर इधर-उधर भागता नहीं फिरता। ध्यान से देखें कि कौन अपनी व्यस्तता का रोना रोता है? व्यस्तता का रोना रोने वाले लोगों में से अधिसंख्य स्वयं ही इसके लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने अपनी मर्जी से ढेर सारी गतिविधियों में अपने को फंसा लिया है। वे अपनी महत्वाकांक्षा, चिंता और लक्ष्यों को लेकर व्यस्त हैं। वे व्यस्त रहने के लती हो चुके हैं।
मैं जितने लोगों को जानता हूं, उनमें से ज्यादातर व्यस्त हैं। वे जब कुछ काम नहीं कर रहे होते हैं, तो ग्लानि महसूस करते हैं। वे कुछ न कुछ करते रहते हैं। इसके बावजूद वे एक दिन पाते हैं कि अचानक कोई नया शख्स संस्थान में प्रवेश करता है, जो वेतन-भत्तों और पद में उनसे बड़ा होता है। इसकी वजह यह है कि उन्होंने भी अपनी 'कुल्हाड़ी' को धार नहीं दी। आशय यह है कि उन्होंने अपने काम से जुड़ी बदलती मांग के सापेक्ष अपने ज्ञान को निखारा नहीं। कुछ लोग पुराने ढर्रे पर चलते हुए तकनीक या बदलते चलन के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। इस कारण उनकी उत्पादकता दिन पर दिन कम होती जाती है और अंतत: एक दिन वे काम के मामले में नाकाम हो जाते हैं।
मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन
फंडा यह है कि... raghu@dainikbhaskargroup.com
हम अक्सर इतने व्यस्त हो जाते हैं कि ज्ञान रूपी कुल्हाड़ी को धार देने का ही हमारे पास समय नहीं होता। आज के परिदृश्य में लोग व्यस्त ज्यादा हो गए हैै। साथ ही उनकी खुशी का स्तर भी कम हुआ है। ऐसा क्यों? क्या वे स्वयं को धार देना भूल गए हैं? कठिन परिश्रम या हमेशा कुछ न कुछ करते रहने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इस व्यस्तता में हम कहीं उन चीजों से दूरी न बना बैठे, जो हमारे जीवन में अहम है, जो हमारे ज्ञान को बढ़ाती हैं।






