विज्ञापन
 
Home >> Magazine >> Career Mantra >> Article Of Career Mantra

साठ पार के बाद भी बनी रहे आपकी मांग

N.raghuraman | Aug 28, 2012, 11:05AM IST
 
 

पहली स्टोरी : लखनऊ में ऐशबाग स्थित यमुना झील पिछले तीस सालों से धीरे-धीरे मर रही थी। दशकों पहले जिस झील के पास से निकलते वक्त लखनऊवासी गर्व से भर उठते थे, अब वही लोग अपनी नाक बंद कर वहां से गुजरते हैं। झील से आने वाली बदबू इस कदर असहनीय हो चुकी थी कि स्थानीय प्रशासन ने उसे पूरी तरह सुखाने का लगभग निर्णय कर लिया था। अचानक उन्हें 61 वर्षीय सतविंदर पाल सिंह रंधावा का नाम सुझाया गया। सतविंदर पाल फिलहाल अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहते हैं और उन्हें मृतप्राय पानी के भंडारों को जिलाने का विशेषज्ञ माना जाता है। वे अजमेर की अण्णासागर झील, पुष्कर की मानसरोवर, नैनीताल की नैनी झील समेत दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मृतप्राय जल भंडारों को जीवन दे चुके हैं। यह अलग बात है कि यमुना झील की स्थिति उन सभी की तुलना में बेहद दयनीय थी। इस साल अप्रैल में उन्होंने काम शुरू किया। वे 25 एकड़ में फैली इस झील को सात फीट गहराई तक साफ करने में सफल रहे। उन्होंने झील में ऑक्सीजन के कई सिलेंडर डलवाए, ताकि उसे नया जीवन मिल सके और जलीय जीवों को जिंदा रखने में मदद मिले। अब झील की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है।

दूसरी स्टोरी : अगर मुंबई शहर को कम बारिश के बावजूद अगले एक साल तक पानी के संकट से नहीं जूझना पड़ेगा, तो इसका श्रेय 61 साल के सेवानिवृत्त सिविल इंजीनियर प्रकाश लिमये को दिया जा सकता है। मुंबई से लगभग सौ किमी दूर रहने वाले प्रकाश ने अकेले दम लगभग 50 मिलियन गैलन जल संचय करने में सफलता हासिल की है। यह पानी दस लाख लोगों की रोजाना की जरूरत को पूरा कर सकता है। मुंबईवासियों को पीने का पानी मुख्यत: तन्सा और मोदक सागर बांध से प्राप्त होता है। इस साल औसत से कम मानसून रहने से तन्सा झील का जलस्तर अपने निम्नतम स्तर पर पहुंच गया। दूसरी तरफ वैतरणा नदी के किनारे पर बसे मोदक सागर में पानी उफनाने लगा। अगर लिमये इसे संचित करने की प्रभावी योजना न बनाते, तो यह पानी अरब सागर में मिलकर बर्बाद हो जाता। लिमये ने दोनों बांधों को विशालकाय पाइप लाइन से जोड़कर पानी को संचय करने में सफलता हासिल की। इस तरह एक जगह का उफनता पानी दूसरे स्थान पर सूखी झील में एकत्र हो गया। यही नहीं, लिमये ने कई झीलों को पाइप लाइन के साथ जोडऩे में सफलता हासिल की है। ऐसे में एक झील में जलस्तर बढ़ते ही दूसरी झील तक उसका पानी पहुंचा दिया जाता है। इस तरह ही 50 मिलियन गैलन पानी एकत्र किया जा सका है। फिलहाल लिमये अपनी इस योजना को महाराष्ट्र की अन्य झीलों तक विस्तार देने की सोच रहे हैं, ताकि एक झील के उफनते पानी को दूसरी सूखी झील में संचय कर सकें। हालांकि दुर्भाग्य यह है कि लिमये ने यह योजना सालों पहले स्थानीय प्रशासन के सुपुर्द की थी, लेकिन नौकरशाही के विभिन्न स्तरों पर ही फाइल उलझी रही।

रंधावा और लिमये दोनों ही अपने-अपने काम को सितंबर के पहले हफ्ते में पूरा कर लेंगे। ऐसे में लखनऊ विकास प्राधिकरण और बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इसके बाद स्वयं इनके द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स की देखरेख करेगा।
 
 
 

आपके विचार
 
 
कोड:
9 + 3

 
Ad Link
विज्ञापन
विज्ञापन
 
 
 
 
Sabse Bada Match Fixer Contest
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

क्रिकेट

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment