नई पीढ़ी जानती है ज्ञान की महत्ता
एन. रघुरामन
| Sep 07, 2012, 10:02AM IST

हमारे जमाने की तुलना में आज के बच्चे ज्ञान का कहीं प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर रहे हैं। किसी पहेली को सुलझाते हुए वह हमेशा उसके दूसरे पहलू को भी ध्यान में रखते हैं। इस कारण वे समस्या का प्रभावी हल जल्दी खोज लेते हैं।
आज से 'कौन बनेगा करोड़पति' का नया सीजन शुरू हो रहा है। इसके प्रस्तोता अमिताभ बच्चन ने इसके प्रचार अभियान में ज्ञान शब्द पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। उनका कहना है कि ज्ञान आपको मानसिक तौर पर ताकतवर और रुपए-पैसों के मामले में समृद्ध बना सकता है। वह सही भी हैं। तीन वर्षीय दिशा एम सागर का उदाहरण लें, जो उत्तरी बेंगलुरू के प्रतिष्ठित स्कूल केंद्रीय विद्यालय संगठन में प्रवेश न मिलने पर कर्नाटक हाई कोर्ट की शरण में चली गई। इसके बाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मोहन रेड्डी ने विद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर हफ्ते भर में प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। हाई कोर्ट ने पूछा है कि एलकेजी क्लास में प्रवेश का मानदंड क्या है? अगर स्कूल इंटरव्यू के आधार पर प्रवेश देता है, तो अदालत जानना चाहती है कि दो वर्ष से कुछ बड़ा बच्चा इंटरव्यू कैसे दे सकता है? हाई कोर्ट ने नोटिस के साथ लगभग फटकार लगाते हुए स्कूल प्रबंधन से कहा है कि इस तरह की बातें कर देश की अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर हंसी न उड़वाएं।
बेंगलुरु में ही बीते शनिवार तमाम वाहन चालक सकते में आ गए। हुआ यूं कि शनिवार को विभिन्न पेट्रोल पंपों में ईंधन लेने आए वाहन चालकों से किशोरवय के बच्चों ने 'इमिशन सर्टिफिकेट' की मांग कर दी। वाहन स्वामियों को नहीं मालूम था कि वे किशोरवय बच्चे 'पर्यावरण दूत' हैं, जो पर्यावरण जागरूकता अभियान चला रहे हैं। इस मुहिम में चालीस स्कूलों के 10 से 13 की वय के 1,200 बच्चे शामिल हुए। पर्यावरण के ये सिपाही छोटे-छोटे दलों में बंटकर महानगर के विभिन्न स्थानों पर बिखर गए और वहां उन्होंने वाहनों द्वारा प्रदूषण के उत्सर्जन के बाबत विभिन्न लोगों से राय-शुमारी की। उन्होंने इमिशन सर्टिफिकेट जांच कर, वाहन स्वामियों को उसकी महत्ता के बारे में बताया। कागजात के आधार पर बच्चों ने वाहन मालिकों को लाल और हरे बैज भी वितरित किए। बच्चों की ताकत को पहचानते हुए ऊर्जा संरक्षण और प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ही इस अभियान की शुरुआत की गई है। जाहिर है कि इस पूरे अभियान का उद्देश्य छात्रों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए यह बताना भी है कि वे इस तरह की पहल से एक वैश्विक समस्या के समाधान की दिशा में अपना योगदान दे सकते हैं। इन पर्यावरण दूतों द्वारा एकत्र किया गया डाटा कर्नाटक के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद बोर्ड उसके आधार पर आगे की रणनीति बनाएगा। इस घटना ने मुझे नए जमाने का एक किस्सा याद दिला दिया। एक शख्स पत्रिका पढ़ रहा था। पास में खेल रही उसकी बेटी उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए तरह-तरह से उसे परेशान कर रही थी। उसे व्यस्त रखने के लिए उन्होंने पत्रिका में दिया एक नक्शा फाड़ा और उसे बच्ची को देते हुए अच्छे से जोड़कर लाने को कहा। उन्हें लग रहा था कि अब बच्ची काफी देर तक इसी में उलझी रहेगी और वह आराम से पत्रिका पढ़ सकेंगे। लेकिन वह बच्ची कुछ ही मिनट में नक्शे को सही तरीके से जोड़कर हाजिर थी। यह देख उन्होंने इसका तरीका जानना चाहा, तो उसने बताया कि नक्शे के पिछली तरफ एक इंसान का चेहरा बना था, जिसके टुकड़े सलीके से रखते हुए ही उसने नक्शे को सही-सही जोड़ लिया। इसके बाद वह लड़की पिता को अचंभे में छोड़ खेलने के लिए दूसरे कमरे में चली गई।
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मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन






