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घर से बाहर ही रखें कारोबारी समस्याएं

N.Raghuraman | Sep 08, 2012, 10:16AM IST
 
 

कृष्णन रोज की ही तरह अपने औजारों को लेकर काम पर निकला। वह प्लंबर कांट्रेक्टर था और पुणे के फार्म हाउस या बड़ी हाउसिंग सोसायटी में ठेके पर काम करता था। उस दिन घर से निकलने के कुछ ही देर बाद उसकी वैन का टायर पंक्चर हो गया, जिसे ठीक करने में दो घंटे जाया हुए। इस तरह वह कुछ विलंब से ही मिसेज बोर्कर के फार्म हाउस पहुंचा। वहां उसने बड़े पाइप के लीकेज को सुधारने का काम शुरू ही किया था कि उसकी ड्रिलिंग मशीन जवाब दे गई। मशीन का ड्रिल स्क्रू बदलने का खर्च हजार रुपए आया। खैर, किसी तरह उसने काम निपटाया। अब जब वह घर लौटने के लिए तैयार था, तो उसकी वैन ही स्टार्ट नहीं हो रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे?

उसकी परेशानी देख मिसेज बोर्कर ने उसे लिफ्ट की पेशकश की। इस पर कृष्णन ने उनका धन्यवाद देते हुए कहा कि वह रविवार को अपना समय परिवार को देता है, अत: सोमवार को मैकेनिक लाकर वैन वापस ले जाएगा। उसकी बात सुनकर मिसेज बोर्कर को ताज्जुब हुआ कि एक प्लंबर भी संडे अपने परिवार के लिए सुरक्षित रखता है। हालांकि वह कुछ बोली नहीं। घर पहुंचने के रास्ते में दोनों में से कोई एक शब्द नहीं बोला, बल्कि कृष्णन का चेहरा तो पत्थर की तरह सपाट था। अंतत: मिसेज बोर्कर कृष्णन के घर पहुंचीं, जो एक पुराना मकान था। उस मकान को पुरातत्व विभाग ने संरक्षित घोषित कर रखा था यानी कृष्णन बगैर इजाजत के उसकी मरम्मत तक नहीं करा सकता था।

मिसेज बोर्कर की कार रुकने पर कृष्णन ने उनसे शिष्टाचारवश भीतर चलने और एक कप चाय पीकर जाने का आग्रह किया। वे मुख्यद्वार से होकर घर के दरवाजे की तरफ बढ़ रहे थे कि अचानक कृष्णन एक पेड़ के पास रुका। उसने एक टहनी को दोनों हाथों से छुआ और कुछ बुदबुदाया। दरवाजा कृष्णन की पत्नी ने खोला, जिसके साथ उनके बच्चे खड़े थे। मिसेज बोर्कर ने देखा कि जोश और उमंग से भरपूर कृष्णन ने आगे बढ़कर बच्चों को गले लगाया और पत्नी के हाथों को हाथ में ले मिसेज बोर्कर से परिचय कराया। यह पहले वाला दुखी कृष्णन तो कतई नहीं था। चाय पीने के बाद मिसेज बोर्कर अपने घर के लिए निकलीं, तो कृष्णन भी साथ हो लिया। वह अपने मैकेनिक के पास जा रहा था, जिसका घर मिसेज बोर्कर के रास्ते में ही पड़ता था। एक बार फिर कृष्णन ने पेड़ की टहनियां छुईं और फिर कुछ बुदबुदाया। यह देखकर मिसेज बोर्कर अपने को रोक नहीं सकीं और कृष्णन से इस व्यवहार का कारण जानना चाहा। मिसेज बोर्कर के प्रश्न पर कृष्णन ने बताया कि वह 'समस्याओं का पेड़' है। मैं जब भी काम से लौटता हूं, तो अपनी समस्याएं उस पर टांग देता हूं। इसके साथ ही ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें कम करने में मेरी मदद करे। इस तरह काम से जुड़ी परेशानियां घर तक नहीं आने पाती और मैं हंसी-खुशी अपना समय परिवार के साथ बिताता हूं। अगले दिन जब मैं फिर काम पर जाता हूं, तो पेड़ से सारी समस्याएं ले लेता हूं, जिनका वजन कुछ कम लगता है। ऐसा नहीं कि ईश्वर वास्तव में मेरी कुछ समस्याएं हल कर देते हैं। इसकी वजह यह है कि मैं रात को कुछेक समस्याएं भूल जाता हूं। मैं भला अपनी समस्याओं को परिवार पर कैसे हावी होने दूं? उनके साथ अच्छा समय बिताने में 'समस्याओं का पेड़' मेरी मदद करता है।
 
 
 

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