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न सही दोस्त किसी का सच्चा सहारा बनें

N.Raghuraman | Sep 12, 2012, 09:52AM IST
 
 

वियतनाम युद्ध के दौरान एक बारूदी सुरंग की चपेट में आने से बॉब बटलर को अपने दोनों पैर गंवाने पड़े। युद्ध से लौटने के बाद उसका अमेरिका में नायक सरीखा स्वागत हुआ। इस घटना के बीस वर्ष बाद बॉब ने फिर सिद्ध किया कि नायक यूं ही नहीं बनते हैं। हुआ यूं कि गर्मी की एक तपती दोपहर बॉब एरिजोआना स्थित अपने गैराज में काम कर रहा था, तभी उसे अपने पड़ोस के घर से एक महिला के चीखने की आवाज सुनाई दी। बॉब ने बगैर एक पल गंवाए अपनी व्हीलचेयर उस घर की तरफ मोड़ दी। वह जल्द पहुंचने के लिए तेजी से व्हीलचेयर पर हाथ चला रहा था, लेकिन बेतरतीब झाड़-झंखाड़ उसका रास्ता रोक रहे थे। यह देख बॉब ने व्हीलचेयर छोड़ दी और कंकड़-पत्थर से भरे ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर कोहनियों के बल चलने लगा। उसके मन में एक ही विचार चल रहा था कि उसे हर हाल में जल्द से जल्द उस महिला के पास पहुंचना है। बॉब जब पड़ोस के घर में पहुंचा, तो उसने देखा कि एक तीन वर्षीय लड़की स्टेफनी हैंस स्वीमिंग पूल में डूब रही है। उस लड़की के जन्म से हाथ नहीं थे और उसकी हालत देखकर उसकी मां तेज-तेज चीख रही थी। बॉब ने पूल में छलांग लगा दी और स्टेफनी को हाथों में उठाए बाहर आ गया। लड़की का चेहरा हल्का नीला पड़ चुका था और उसके शरीर में किसी तरह की कोई हरकत नहीं हो रही थी।

बॉब ने उसे पूल के किनारे लिटाकर उसे कृत्रिम सांस देनी शुरू की। साथ ही वह बच्ची का सीना भी लगातार दबा रहा था, ताकि किसी तरह से उसकी सांसें दोबारा शुरू हो सकें। इधर स्टेफनी की मां ने एंबुलेंस को फोन कर दिया था, लेकिन वह कहीं और व्यस्त थी। हालांकि मेडिकल टीम ने जल्द पहुंचने का वादा किया था। स्टेफनी की मां की सिसकियां अभी तक रुकी नहीं थीं। यह देखकर बॉब बोला, 'चिंता न करें। मैं उसके हाथ बनकर उसे पूल से बाहर लाया हूं। अब उसके फेफड़े बनकर उसे दोबारा जिलाऊंगा भी। आप बस धैर्य रखिए।' कुछ पलों बाद स्टेफनी ने अपनी आंखें खोल दीं और मुंह से पानी फेंक जता दिया कि वह अभी जीवित है। यह देखकर स्टेफनी की मां ने बच्ची को गले से लगा लिया। कुछ देर बाद स्टेफनी की मां ने बॉब से पूछा कि उसे कैसे मालूम था कि वह स्टेफनी को बचा सकेगा?

इस प्रश्न के जवाब में बॉब ने कहा, 'मुझे भी नहीं मालूम था कि मैं अपने प्रयासों में सफल रहूंगा। मैंने तो सिर्फ स्टेफनी से वही कहा, जो वियतनाम युद्ध के दौरान एक बच्ची ने मुझसे कहा था।' बॉब ने उसे किस्सा सुनाया, 'युद्ध के दौरान मेरा पैर बारूदी सुरंग पर पड़ा और उसके बाद मैं अपने होश खो बैठा। कुछ देर बाद जब मुझे होश आया, तो वहां पड़ी ढेरों लाशों के बीच मैं अकेला था। फिर मुझे अहसास हुआ कि मुझे एक वियतनामी लड़की अपने छोटे-छोटे हाथों से खींच रही है। उसने टूटी-फूटी अंग्रेजी में मुझसे कहा था, 'फिक्र मत करो। सब ठीक हो जाएगा। मैं फिलहाल तुम्हारे पैर की तरह हूं।' तभी मैं फिर बेहोश हो गया। उसके बाद जब मुझे होश आया, तो मैं गांव के एक घर में था। वह लड़की मेरे पास थी और मेरे घावों की मरहम-पट्टी हो चुकी थी। आज मैं जैसा भी हूं, उसकी वजह से हूं। जब मैंने स्टेफनी को पूल में डूबते देखा तो मैंने वही कुछ करना चाहा, जो वियतनाम में उस नन्ही बच्ची ने मेरे साथ किया था। मुझे विश्वास था कि उस लड़की की नेकी का प्रतिफल स्टेफनी को जरूर मिलेगा।'
 
 
 

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