चलन को समझकर चुनें अपना भविष्य
एन. रघुरामन | Sep 15, 2012, 09:55AM IST

नेशनल सैंपल सर्वे के मुताबिक 2017 तक ऋण लेकर उपचार कराने वाली आबादी का हिस्सा बढ़कर 50 फीसदी हो जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि देश का हर दूसरा नागरिक इलाज के लिए कर्जदार बन जाएगा। बीमार पडऩे की स्थिति में लोगों को उपचार पर कम पैसा खर्च करना पड़े, इसके लिए सरकार को 1.8 लाख करोड़ रुपए की जरूरत है। इसके बाद ही हर नागरिक की पहुंच स्वास्थ्य सेवाओं तक हो सकेगी। फिलहाल भारत अपनी जीडीपी का महज 1.6 फीसदी स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करता है। भारत इसे जीडीपी की 2.5 फीसदी की दर तक पहुंचाना चाहता है, लेकिन आर्थिक मंदी के चलते इस राशि में कुछ कमी लानी पड़ी है। लेकिन तैयार की गई कार्ययोजना में इस खर्च को जीडीपी के दो फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है। इस प्रारूप को ही आज अनुमोदित किया जाना है। इसका हमारे-आपके जैसे आम आदमी के लिए क्या अर्थ है? स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्तापूर्ण सुधार के अलावा इस योजना से रोजगार के भी प्रचुर अवसर पैदा होंगे। नर्सों और डॉक्टरों समेत पैरामेडिकल क्षेत्रों से जुड़े लोगों की मांग बढ़ेगी। इसके साथ ही बढ़ेगी मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति करने वाले लोगों की मांग भी।
मांग में यह वृद्धि इसी कारण होगी कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर क्षेत्रों में भी पहुंचाना चाहती है। अभी भी देश के तमाम ऐसे क्षेत्र हैं, जहां लोग प्राथमिक चिकित्सा के अभाव में दम तोड़ देते हैं। सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित इस आबादी के लिए त्रि-स्तरीय कार्ययोजना तैयार की है। इसका उद्देश्य मरीज को उसकी बीमारी और उपचार की जरूरत के अनुसार प्राथमिक से लेकर आधुनिक चिकित्सा मुहैया कराना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि संबंधित शख्स का महज सरकार से अनुदान लेने के लिए ही ऑपरेशन न कर दिया जाए।
इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए धन जुटाना एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन उम्मीद है कि सरकार इस मद में व्यवस्था करेगी। इसकी एक प्रमुख वजह यह है कि 2014 के आम चुनाव में स्वास्थ्य सेवाएं एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरने वाली हैं। सरकार को इस महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने के लिए धन के अलावा समर्पित युवाओं की भी जरूरत पड़ेगी, जो देश के कोने-कोने में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का संजाल बिछाने में मदद कर सकें। इसे देखते हुए हेल्थकेयर ही भविष्य है।
फंडा यह है कि...
जिस तरह एक समय आईटी, एमबीए और सिविल इंजीनियरिंग का जोर था, वैसा ही परिदृश्य हेल्थकेयर में उभरने वाला है। अगर आप कॉलेज में प्रवेश लेने जा रहे हैं, तो इस बात को अच्छे से समझ लें। बीएससी की सामान्य डिग्री भी स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आने वाली क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।
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