एक का संकट सबको भारी पड़ सकता है
N.Raghuraman
| Sep 18, 2012, 10:33AM IST

थक-हारकर चूहा अपने बिल में लौट आया और उस रात उसने भोजन की तलाश की कोई कोशिश नहीं की। कुछ देर बाद उसने चूहेदानी के 'खटाक' से बंद होने की आवाज सुनी। किसान की पत्नी भी वह आवाज सुनकर देखने पहुंची? अंधेरे में उसे कुछ दिखाई नहीं पड़ा, जबकि चूहेदानी में सांप की पूंछ फंस गई थी। छटपटाते हुए सांप ने किसान की पत्नी को डस लिया। तब तक किसान भी वहां जा पहुंचा था और पत्नी को उस अवस्था में देख उसे अस्पताल लेकर भागा। डॉक्टरों ने किसान की पत्नी के शरीर से जहर निकालकर उसे बचा तो लिया, लेकिन उसका बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा था। यह देख किसान ने सोचा कि यदि वह अपनी पत्नी को तीखा चिकन सूप पिलाए, तो शायद उसकी स्थिति में कुछ सुधार आए। यह सोचकर उसने मुर्गे को मार डाला और अपनी पत्नी के लिए सूप बनाया।
अब तक किसान की पत्नी को सांप के द्वारा डसने की बात उसके गांव और अन्य नाते-रिश्तेदारों तक पहुंच गई थी। वे सभी उसे देखने आए और उसका हालचाल पूछते हुए जल्द ठीक हो जाने की कामना की। किसान को लगा कि उन सभी को खाना खिलाना उसका फर्ज बनता है, सो उसने बकरी को हलाल कर उनके लिए भोजन तैयार किया। कुछ दिनों बाद किसान की पत्नी ठीक हो गई। इस खुशी में किसान और उसकी पत्नी ने पूरे गांव की दावत करने की सोची। इसे भव्य बनाने के लिए किसान तालाब से लगभग सारी मछलियां पकड़ लाया। उसने सिर्फ अंडों के लिए कुछ मछलियां ही तालाब में छोड़ी थी। अपने बिल में चूहा यह सारा घटनाक्रम चुपचाप पड़ा देखता रहा। उसे अपने साथियों के मारे जाने का गहरा दुख था, लेकिन वह कुछ करने की स्थिति में नहीं था। इससे सबक लेते हुए अगर अगली बार आपको किसी की समस्या के बारे में पता चले और आपको लगे कि उससे आपको क्या फर्क पड़ता है, तो इस किस्से को जरूर याद कर लीजिएगा।








