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सफलता पाने के लिए जरूरी है गहरी समझ

N.Raghuraman | Sep 19, 2012, 09:48AM IST
 
 

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पर बनाई गई आलोचनात्मक फिल्म '2016: ओबामाज अमेरिका' चर्चा में है। अब जब अमेरिकी राष्ट्रपति पद की लड़ाई अपने अंतिम दौर में पहुंच रही है, तो इस फिल्म के पक्ष-विपक्ष में धड़ेबंदी भी तेज हो रही है। आलम यह है कि फिल्म के जुलाई में प्रदर्शन के बाद से इसे अब तक 25 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। यही नहीं, राजनीतिक वृत्तचित्र के रूप में यह सबसे ज्यादा कमाई करने वाली पहली फिल्म बनकर उभरी है। सामान्य वृत्तचित्रों की कड़ी में यह छठे नंबर पर आती है। इसका निर्माण भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक दिनेश डिसूजा ने किया है, जो अमेरिका के भूतपर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की टीम के सदस्य रहे हैं। इस फिल्म की केंद्रीय विषयवस्तु दिनेश की ही किताब 'ओबामा अमेरिका: अनमेकिंग द अमेरिकन ड्रीम' से ली गई है।

इसी तर्ज पर मिजो भाषा में बनी फिल्म 'ख्वांगलुंग रन' भी जबर्दस्त चर्चा में है। महज 11 लाख रुपए में बनी इस फिल्म ने शादी-विवाह की वीडियोग्राफी करने वाले मपुइया च्वांगथू को रातों-रात लोकप्रिय बना दिया है। फिल्म की लोकप्रियता का आलम यह है कि इसके नायक 24 वर्षीय एलेक्स लालछुनकिमा के लिए मिजोरम में सड़क किनारे खड़े होकर एक कप चाय पीना दुश्वार हो गया है। अब तक कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रशंसा पा चुकी इस फिल्म को सत्यजीत राय फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट लोगों के सामने लाया। यहां यह जानना श्रेयस्कर होगा कि मिजोरम में संगीत के प्रति अधिसंख्य लोगों का रुझान है। 91.58 साक्षरता की दर से यह प्रदेश केरल के बाद सबसे ज्यादा साक्षर राज्य है। ऐसे में लोगों की अपेक्षाओं पर फिल्म खरी उतरे, इस लिहाज से गुणवत्ता का ध्यान रखना आसान काम नहीं था।

गौरतलब है कि दिनेश और मपुइया की फिल्में कैनन ईओएस 5डी कैमरा पर शूट की गई हैं। दोनों ही फिल्मों का संपादन अत्याधुनिक स्टूडियो के बजाय घर या ऑफिस में हुआ है। दोनों ही फिल्मों की पटकथा उनके निर्देशकों ने ही लिखी है। दिनेश का जन्म मुंबई में हुआ और आज वह अमेरिकी ड्रीम की खातिर संघर्ष कर रहे हैं। इसी तरह मपुइया उत्तर प्रदेश के हापुड़ में जन्मे हैं और फिल्म के जरिए मिजोरम के पर्यावरण को बचाने का संदेश दे रहे हैं। दिनेश लगभग चार दशक पहले अमेरिका जा बसे थे। उन्हीं दिनों मपुइया भी हापुड़ से मिजोरम पहुंचे। मपुइया के पिता सेना में थे, जिनके ट्रांसफर के कारण उन्हें वहां जाना पड़ा। दोनों ही को अपनी-अपनी नई जमीन से प्यार हो गया। दोनों ही ने समय के साथ-साथ अपने इस प्रेम की गहराई को समझा और आज इससे जुड़े हित और विश्वास की खातिर अपनी-अपनी तरह से संघर्ष कर रहे हैं।

उनका विश्वास कितना सही या गलत है, इस पर बहस नहीं करनी है। महत्वपूर्ण यह है कि उनकी रचना, जो कि फिल्म के रूप में है, व्यापक स्तर पर आम लोगों द्वारा सराही जा रही हैं। उनकी सफलता दर्शाती है कि उन्होंने सतही स्तर पर अपने परिवेश को समझने का प्रयास नहीं किया, बल्कि उसकी गहराई में गए। स्थानीय रीति-रिवाज और मान्यताओं के साथ जुड़े रहकर उसे समझने के जुनून ने उन्हें आज यह मकाम बख्शा है।
 
 
 

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