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अपनी मान्यताओं पर हमेशा रहें कायम

N.Raghuraman | Oct 06, 2012, 09:37AM IST
 
 

अमेरिका में अरकंसास के निकट स्थित छोटे-से कस्बे में रहने वाले एक शख्स ने बियर बार बिजनेस शुरू करने का इरादा किया। दूसरे देशों की तरह वहां भी किसी धार्मिक स्थल के निकट बार खोलना वर्जित था। लेकिन जिस तरह हर कोई नियम की खामियों का फायदा उठाता है, इस कारोबारी ने भी ऐसा ही करते हुए एक चर्च के सामने एक बार खोलने की मंजूरी हासिल कर ली। चर्च के पादरी इस बात से दुखी हो गए और उन्होंने इस नए उभरते कारोबार के खिलाफ मुहिम छेड़ दी। चर्च से जुड़ी मंडली ने इस बार को रोकने के लिए एक याचिका दायर कर दी और वे इसके लिए रोज प्रार्थना भी करने लगे।

मगर तमाम याचिकाओं और अभियानों के बावजूद बार का निर्माण कार्य आगे बढ़ता रहा। हालांकि इसमें कभीकभार निरीक्षण इत्यादि की वजह से जरूर कुछ रुकावट आ जाती। हालांकि जब यह तकरीबन पूरा बन चुका था और ओपनिंग की तैयारी चल रही थी, तभी इस पर जबरदस्त बिजली गिरी और यह जलकर खाक हो गया। चर्च से जुड़े लोग इससे काफी खुश थे। लेकिन उनकी यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी। बार मालिक ने यह कहते हुए उनके खिलाफ २० लाख डॉलर का मुकदमा ठोक दिया कि उनकी प्रार्थनाओं की वजह से ही उसका बार खुलने से पहले ही तबाह हो गया और वे ही प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर इसके लिए जिम्मेदार हैं।

चर्च को अपना बचाव पेश करने के लिए कहा गया। कोर्ट को दिए गए अपने जवाब में चर्च ने इस तरह की तमाम बातों से इनकार करते हुए कहा कि उनकी प्रार्थनाओं का बार के गिरने से कोई संबंध नहीं है। अपनी बात की पुष्टि में उन्होंने हार्वर्ड की बेंसन स्टडी का हवाला भी दिया कि इस तरह की प्रार्थनाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। गौरतलब है कि हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में हर्बर्ट बेंसन की अगुआई में यह जांचने के लिए एक स्टडी की गई थी कि धार्मिक-मंडलियों द्वारा की गई प्रार्थनाओं से बायपास रोगियों की शल्य चिकित्सा से जुड़ी जटिलताओं को कम करने में किसी तरह की मदद मिलती है या नहीं। इस स्टडी से जो नतीजे सामने आए, उनके मुताबिक ऐसे मरीज समूह के लिए कोई भी प्रार्थना मददगार नहीं होती। स्टडी के हिसाब से हृदय रोगियों को दो समूह में बांटा गया था। जिस समूह के हृदय रोगियों की शल्य चिकित्सा के लिए प्रार्थना की गई थी, उनकी मृत्युदर १३ से १६ फीसदी तक रही, जबकि जिन हृदय रोगियों की ऐसी ही शल्य चिकित्सा के लिए प्रार्थना नहीं की गई थी, उनकी मृत्युदर १४ फीसदी रही।

इस रिपोर्ट से धार्मिक आस्थाओं को लेकर विवाद जरूर खड़ा हुआ, लेकिन चर्च ने जब इस असामान्य खोज का अदालत में अपने बचाव के लिए हवाला दिया, तब स्थानीय लोगों के बीच कहीं ज्यादा बड़ा विवाद पैदा हुआ। इस केस की सुनवाई के दौरान जज ने पेश किए गए कागजात पर गौर करने के बाद कहा, 'इस मामले में मैं क्या फैसला दूंगा, यह तो फिलहाल मुझे नहीं पता, मगर इन कागजों को देखकर यह जरूर लगता है यहां एक बार मालिक है जो प्रार्थना की शक्ति को मानता है और दूसरी ओर समूचा चर्च व इसके अनुयायी हैं, जो प्रार्थना की शक्ति को नहीं मानते।'
 
 
 

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