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मेहनत व स्मार्टनेस का सही मेल बनाए सफल

एन. रघुरामन | Oct 12, 2012, 10:02AM IST
 
 

एक बुजुर्ग किसान था। उसकी जमीन से सटी एक और शख्स की जमीन थी। वह शख्स किसान की जमीन पर लंबे समय से निगाहें गड़ाए था और उसे हड़पने की नई-नई तरकीबें भिड़ाता रहता, लेकिन किसान का एक स्मार्ट बेटा था, जिसकी वजह से उसकी दाल नहीं गल पाती थी। एक बार उनके गांव में डाका पड़ा। पुलिस हर जगह दबिश मार रही थी, क्योंकि जिसके यहां डाका पड़ा था वह सरकारी रसूखदार व्यक्ति था। उस दुष्ट पड़ोसी ने मौका देख किसान के बेटे को डकैती के आरोप में गिरफ्तार करवा दिया। अदालत में पड़ोसी के वकील ने दलील दी कि किसान के बेटे को जमानत पर रिहा न किया जाए, वरना वह लूटे गए माल को इधर-उधर छिपा सकता है। इस पर किसान के वकील ने अपना पक्ष पेश करते हुए कहा कि जब उसके मुवक्किल पर लूट का आरोप साबित नहीं हुआ, तो यह कैसे माना जाए कि वह लुटेरा है और लूट के माल को इधर-उधर कर सकता है। लेकिन जज ने पड़ोसी के वकील को संदेह का लाभ देते हुए किसान के बेटे की जमानत याचिका खारिज कर दी।

किसान और उसके बेटे ने जोरदार ढंग से अपनी बात रखते हुए कहा कि लड़के को इसलिए फंसाया गया है, क्योंकि वह स्मार्ट है। कुछ घंटों की सुनवाई के बाद जज ने गुस्से में किसान के लड़के से कहा कि यदि तुम एक महीने बाद होने वाली अगली सुनवाई से पहले खुद को स्मार्ट साबित कर सके, तो मैं तुम्हारी इस दलील को मान सकता हूं। तब तक तुम्हें विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहना होगा। हताश मन से किसान का बेटा वापस जेल चला गया जबकि बुजुर्ग किसान घर लौट आया। किसान बहुत दुखी था क्योंकि आलुओं की बुआई का सीजन आने वाला था। उसने अपने बेटे को जेल में एक पत्र भेजा, जिसमें लिखा था- 'मेरे दुलारे, इस साल मैं आलुओं की फसल नहीं बो सकूंगा क्योंकि अकेले खेत में खुदाई करना मेरे लिए संभव नहीं है।' पुलिस को लग रहा था कि किसान के बेटे के जवाबी पत्र में उसे लूट के बारे कोई सुराग मिल जाएगा क्योंकि आज्ञाकारी बेटा अपने पिता को दिलासा देते हुए लूटे गए माल के बारे में कोई संकेत जरूर देगा। पुलिस ने बड़ी शालीनता के साथ वह पत्र उसके तथाकथित आरोपी बेटे को सौंपते हुए कहा कि वह तुरंत अपने बूढ़े पिता को जवाबी खत लिखे, जिससे उन्हें कुछ राहत मिल सके।

वे एक पुलिसकर्मी को यह कहते हुए छोड़ गए कि यह पत्र को उसके बूढ़े पिता तक पहुंचा देगा। किसान के बेटे को दाल में कुछ काला नजर आया, लिहाजा उसने अकेले में दस मिनट मांगे। कुछ देर बाद पुलिसकर्मी आकर पत्र ले गया। पत्र में लिखा था- 'पिताजी, खेत में खुदाई के बारे में सोचना भी मत, क्योंकि उसी में मैंने लूटा माल छिपाया है।'

यह पत्र पढऩे के बाद पुलिसकर्मियों की टीम ने पूरा खेत खोद मारा, लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं लगा। हताश पुलिसकर्मियों ने वापस आकर किसान के बेटे से पूछा कि उसने अपने पिता को झूठा पत्र क्यों लिखा। किसान के बेटे ने कोई जवाब नहीं दिया और मुस्कराते हुए जेब से दूसरा पत्र निकाला और कहा कि वे यह पत्र ले जाकर उसके पिता को दे दें। जब पुलिसवालों ने इस पत्र को पढ़ा तो वे शर्मिंदा होकर रह गए। इसमें लिखा था 'पिताजी, अब आप आलू की फसल बो सकते हैं। मैं यहां जेल में रहते हुए आपके लिए सिर्फ इतना ही कर सकता था।' इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास है। अगली सुनवाई में किसान का बेटा रिहा हो गया।
 
 
 

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