हर किसी में कोई खासियत होती है
एन. रघुरामन
| Oct 13, 2012, 10:04AM IST

हर किसी में कोई खासियत होती है
ब्राड मेल्तजर दूसरे बच्चों की तरह एक आम बच्चा था। कुछ साल पहले उसके माता-पिता ब्रुकलिन से फ्लोरिडा शिफ्ट हो गए, जहां पहुंचकर उसने हाईलैंड ओक्स जूनियर हाई स्कूल में नौंवी कक्षा में दाखिला ले लिया। वह उस स्कूल के सैकड़ों छात्रों में से एक और छात्र था। उसके ज्यादातर शिक्षक उसे स्कूल में दाखिला लेने वाले किसी भी नए बच्चे के तौर पर देखते। शेलिया स्पाइसर उसकी इंग्लिश टीचर थीं, जो उस पर खास ध्यान देती थीं। वह दूसरे टीचरों से अलग थीं, क्योंकि स्कूल प्रिंसिपल क्लार्क लीन की तरह वह कक्षा में डंडे के जोर पर नहीं पढ़ाती थीं और न ही किसी को बेंच पर खड़ा करती थीं। उनका पढ़ाने का बहुत साधारण तरीका था। वह हरेक छात्र/छात्रा से कहतीं कि वे किस चीज में अच्छे हैं। उनका दृढ़ विश्वास था कि हर व्यक्ति किसी न किसी चीज में अच्छा होता ही है। उन्होंने ब्राड से कहा, 'तुम अच्छा लिख सकते हो।' उनका यह भी कहना था कि वे उसे ऑनर्स इंग्लिश क्लास में भेजना चाहती हैं। लेकिन टाइमिंग मैच न होने की वजह से ऐसा करना संभव नहीं था। लिहाजा मैडम स्पाइसर ने उससे कहा कि अब से वह क्लास में ब्लैकबोर्ड पर जो भी लिखें, वह उस पर ध्यान न दे। उनका ब्राड से कहना था, 'क्लास में होने वाले डिस्कशन को नजरअंदाज कर दो, एसाइमेंट्स पर भी ध्यान देने की जरूरत नहीं है। तुम सिर्फ क्लास में बैठकर ऑनर्स का काम करो।' उन दो वर्षों के दौरान ब्राड को शेक्सपीयर से लगाव हो गया। वास्तव में मैडम स्पाइसर ने उसे रोमियो का किरदार पढऩे और एक लड़की को जूलियट का किरदार पढऩे के लिए कहा, जिसे ब्राड स्कूली दिनों में पसंद करता था। मैडम स्पाइसर का मानना था कि ये दोनों आगे चलकर शादी कर लेंगे और ब्राड लेखक बन जाएगा। स्कूल के बाकी विद्यार्थियों की तरह ब्राड भी स्कूल से पढ़कर निकल गया। वह मैडम स्पाइसर को बहुत पसंद करता था क्योंकि उन्होंने उसे अपने मुताबिक चलने की छूट दी और अपना पसंदीदा काम करने दिया। लेकिन वह उन्हें उस वक्त धन्यवाद के अलावा कुछ नहीं दे सकता था। अगले कुछ सालों में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान वह भी चूहा दौड़ में उलझ गया और इस तरह तकरीबन एक दशक गुजर गया। एक दिन जब मैडम स्पाइसर क्लास में पढ़ा रही थीं, तभी एक अजनबी ने आकर द्वार पर दस्तक दी। 'मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूं?' मैडम स्पाइसर ने कहा। 'जी, मेरा नाम ब्राड मेल्तजर है', और यह कहते हुए उसने अपनी पहली किताब की प्रति उनकी ओर बढ़ा दी। ब्राड ने आगे कहा, 'मैंने यह आपके लिए लिखी है'। यह किताब थी 'फ्रेटरनिटी', जिसे चौबीस बार ठुकराया गया, तब कहीं जाकर यह प्रिंट हो पाई। इसके बाद १३ साल और गुजर गए और मैडम स्पाइसर के रिटायरमेंट का दिन भी आ गया। उनकी विदाई पार्टी में ब्राड ने अपनी उपस्थिति से उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया। हमेशा की तरह पार्टी में सबने अपने विचार पेश किए और आखिर में मैडम स्पाइसर की बारी भी आ गई। उन्होंने जिन शब्दों के साथ अपनी शुरुआत की, उसे सुनकर सब लाजवाब हो गए। उन्होंने कहा, 'आप में से जो लोग यह शिकायत करते हैं कि बच्चे बदल गए और आज के दौर में उन्हें पढ़ाना बहुत मुश्किल हो गया है, तो समझ लें कि आप बूढ़े हो गए हैं। आप आलसी हो गए हैं। ये बच्चे नहीं बदले। आप बदल गए हैं!' इसके बाद ब्राड ने उन्हें अपनी पत्नी से मिलवाया, जिसे उन्होंने जूलियट का किरदार दिया था। मैडम स्पाइसर हौले-से मुस्कराईं और बोलीं, 'मैं जानती थी कि ऐसा होगा।' तब तक वह ब्राड की 'हीरोज फॉर माय सन' व 'हीरोज फॉर माय डॉटर' जैसी किताबें भी पढ़ चुकी थीं, जिनमें कई उल्लेखनीय लोगों का वृत्तांत है। ब्राड मेल्तजर का नया नॉवेल है- 'द फिफ्थ एसेन', जो एक थ्रिलर है। यह जनवरी २०१३ में बाजार में आएगा। फंडा यह है कि... कोई भी इंसान बेकार नहीं है। प्रत्येक जीवित प्राणी और खासकर इंसान को इस दुनिया में किसी उद्देश्य से भेजा गया है। इंसानी प्रजाति को केवल यह करना है कि उस उद्देश्य को पहचाने और अपनी ऊर्जा को उसी दिशा में प्रवाहित करे। मैनेजमेंट फंडा |






