सफलता की राह में हैं कई आकर्षक पड़ाव
एन. रघुरामन
| Oct 20, 2012, 09:36AM IST

क्या आपने टीवी पर चल रहे वोडाफोन टेलीकॉम कंपनी के उस विज्ञापन पर गौर किया है, जिसमें एक बुजुर्ग अपने किशोरवय मित्र को उपहार देते हैं? पहली दस्तक पर वह उसे एक सेब देते हंै, उसके बाद एक इंक पेन और आखिरकार वह अपने दोस्त के जन्मदिन के लिए बड़ी मेहनत से एक प्रोपेलर प्लेन बनाकर देते हैं। क्या आप जानते हैं कि यह बुजुर्ग सज्जन कौन हैं? उनका नाम है बरजोर पटेल, जिनकी उम्र ८२ साल है। मैंने तकरीबन तीस साल पहले उनका तब साक्षात्कार लिया था, जब वह मशहूर एड फिल्मकार भरत दाभोलकर के साथ रंगमंच पर काम करते थे। उस वक्त वह 'बॉटम्स अप' नामक ड्रामा कर रहे थे। साक्षात्कार के दौरान उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं अपने काम को कितना एंजॉय करता हूं। वह उस वक्त ५८ साल के थे और मैं सिर्फ २० का। मैंने कहा कि मैं ऊबने लगा हूं। मेरा कहना था 'मुझे तभी कोई काम करने के लिए दिया जाता है जब कोई वह काम नहीं करना चाहता। मेरे चीफ रिपोर्टर्स सोचते हैं कि यंगस्टर्स को लिखना ही नहीं आता।' इस पर उन्होंने अपनी युवावस्था से जुड़ा संस्मरण सुनाया। उन्होंने बताया कि उस वक्त उनकी उम्र २०-२२ साल रही होगी, जब वह १९५०-६० के दौर के थिएटर किंग आदि मर्जबान से मिले। मर्जबान उन्हें रिहर्सल के लिए घंटों बिठाए रखते थे। उन्होंने बताया, 'मुझे लंबे इंतजार के बाद भूमिका मिली, वह भी तीन घंटे के ड्रामे में महज दो लाइनों की थी।' उन्होंने आगे कहा, 'सालों तक थिएटर के संपर्क में रहने के बाद मैंने महसूस किया कि यह संभवत: मर्जबान का युवा प्रतिभाओं को अभिनय की बारीकियों से परिचित कराने का अपना तरीका था। वह उन्हें थाली में सजाकर कुछ पेश नहीं करना चाहते थे।' उसके बाद मर्जबान और पटेल ने गुजराती थिएटर में अनेक कॉमेडी नाटक मंचित किए। पारसियों में वैसे भी खुद पर हंसने का अच्छा माद्दा होता है और गुजरातियों, बोहराओं और कोजाओं ने भी इन कॉमेडी नाटकों को संरक्षण प्रदान किया। उन दो लाइनों के जरिए वह आज इस मुकाम पर पहुंच गए हैं। इस राह पर चलते हुए उन्होंने खूब नाम-दाम कमाया और उन्हें रूबी जैसी प्यारी बीवी भी मिली, जो पहले ही मंझी हुई रंगमंच अभिनेत्री के रूप में स्थापित हो चुकी थीं। मेरी जानकारी में वह पहले शख्स हैं, जिन्होंने एक नए देश और नई नौकरी को तब अपनाया, जब दूसरे लोग रिटायर होने लगते हैं। उन्हें ५८ साल की उम्र में दुबई के खलीज टाइम्स में एड मैनेजर की नौकरी मिली। वहां से वह तरक्की करते हुए मार्केटिंग विभाग के वाइस प्रेसिडेंट बन गए। उन्होंने वर्ष २००९ में ७९ साल की उम्र में इस कंपनी को अलविदा कहा और वापस भारत आकर थिएटर से जुड़ गए। उन्होंने जेम-ए-जमशेद एडवरटाइजिंग कंपनी के साथ १२ साल काम किया। इसके बाद वह एक दशक तक टाइम्स ऑफ इंडिया से जुड़े रहे। द स्टेट्समैन से उनका १५ साल तक जुड़ाव रहा और इसके बाद वह दुबई चले गए। वह अपनी जिंदगी में कभी एक जगह पर नहीं रुके। वह अपने जीवन के सफर में लगातार एक जगह से दूसरी जगह पर जाते रहे, लेकिन उन्होंने अपने पूरे कॅरियर के दौरान थिएटर, अभिनय व कॉमेडी से जुड़ाव कायम रखा। और अब ८२ साल की उम्र में वह एड फिल्मों में आ गए हैं। जब थिएटर के प्रति उनके जुनून की बात आती है तो पैसा कोई मायने नहीं रखता। मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन फंडा यह है कि... raghu@dainikbhaskargroup.com सफलता की राह में अनेक आकर्षक पड़ाव मिलते हैं। लेकिन आप कहीं रुकते हुए वहीं ठहर जाते हैं, तो आपकी जिंदगी आगे नहीं बढ़ेगी। |








