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आज अपने भीतर की बुराई को मारें

N.Raghuraman | Oct 24, 2012, 09:37AM IST
 
 

अक्षय अक्षय कुमार बहुत होशियार है। वह पढ़ाई-लिखाई में हमेशा क्लास में फस्र्ट आता रहा है। वह प्रखर वक्ता है और उसके लेखन में एक भी गलती नहीं होती। वास्तव में वह ऐसे कुछ युवाओं में से है, जो एसएमएस में भी कभी गलत स्पेलिंग का इस्तेमाल नहीं करते। वह देश के एक बेहद मशहूर कॉलेज का छात्र था। कैंपस इंटरव्यू के दौरान वह हर टेस्ट में अव्वल रहा, लेकिन उसे तकरीबन ११ महीने बाद भी नौकरी नहीं मिली। वास्तव में इस लेख के छपने तक वह बेरोजगार है। आप सोच रहे होंगे कि इस प्रतिभाशाली युवा के साथ आखिर कहां चूक हो गई?

नाकामी का कारण उसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स में छिपा है। हम जैसों की तरह वह भी फुटबॉल, सचिन के स्कोर करने की क्षमता, भारतीय राजनीति व इसमें पसरे भ्रष्टाचार और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव समेत विभिन्न मसलों पर अपनी राय सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर पेश करता रहता है।

लोगों का मानना है कि उसने इस बारे में अपने विचार बहुत मजबूती के साथ रखे कि क्यों बराक ओबामा को दोबारा अमेरिका का राष्ट्रपति नहीं बनना चाहिए। इसे देख अंतिम साक्षात्कार के लिए उसका नाम शॉर्टलिस्ट करने वाली कुछ कंपनियां उसकी सोशल नेटवर्किंग साइट्स गतिविधियों पर गौर करने के बाद पीछे हट गईं। इन कंपनियों के मुख्यालय अमेरिका में स्थित हैं और वे अपने यहां किसी ऐसे व्यक्ति को काम पर नहीं रखना चाहतीं, जो इस कदर मुखर हो क्योंकि इससे उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है।

इंटरनेट व सोशल मीडिया में क्रांतिकारी बदलाव आने के साथ कोई भी अपनी ऑनलाइन मौजूदगी दर्ज कराने से बच नहीं सकता। एक बढिय़ा ऑनलाइन फुटप्रिंट किसी शख्स की क्षमताओं, नेटवर्क और संपर्क साधने के जरियों की पैकेजिंग कर उन्हें एक जगह स्थापित करने का अच्छा तरीका है। यह आपके बैच के साथियों, आपकी तलाश में जुटे लोगों और संभावित नियोक्ताओं को आप तक पहुंचने में मदद करता है।
गलत लोगों को काम पर रखने की लागत साल-दर-साल बढऩे के साथ पेशेवर नियोक्ता ऐसे संभावित कर्मचारियों को उनके प्रोफेशनल प्रोफाइल्स और पारंपरिक संदर्भों से परे जाकर भी देखने लगे हैं। इस लिहाज से फेसबुक व ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स संबंधित शख्स के बारे में नजदीक से जानने में बहुत काम आ रही हैं। अक्षय को अपने ब्लॉग्स, अनुपयुक्त तस्वीरें व प्रोफाइल्स हटाने पड़े, जिसमें उसे महीना भर लगा। उसने प्राइवेसी पॉलिसी की जांच करने के बाद अपनी सेटिंग्स बदल दीं।

सबक यह मिलता है कि खुद के बारे में सर्च करें। अपने बारे में उसी तरह जांच करें, जैसे कोई एचआर मैनेजर करता है। आप जान जाएंगे कि आप कहां खड़े हैं। एक बात याद रखें। जो कुछ भी आप लिखते हैं, वह चारों ओर जाएगा और लोग उसमें यह भी देखेंगे कि आपका लहजा, शैली और व्याकरण कैसा है। यदि आप अपनी श्रेष्ठता दिखाने के लिए किसी से इस तरह उलझने जा रहे हैं, तो इसे देखकर भावी नियोक्ता यह भी समझ सकता है कि आप बहस बहुत करते हैं। लिहाजा किसी सार्वजनिक विषय के बारे में सोच-समझकर ही अपनी राय जाहिर करें।

अक्षय अक्षय कुमार बहुत होशियार है। वह पढ़ाई-लिखाई में हमेशा क्लास में फस्र्ट आता रहा है। वह प्रखर वक्ता है और उसके लेखन में एक भी गलती नहीं होती। वास्तव में वह ऐसे कुछ युवाओं में से है, जो एसएमएस में भी कभी गलत स्पेलिंग का इस्तेमाल नहीं करते। वह देश के एक बेहद मशहूर कॉलेज का छात्र था। कैंपस इंटरव्यू के दौरान वह हर टेस्ट में अव्वल रहा, लेकिन उसे तकरीबन ११ महीने बाद भी नौकरी नहीं मिली। वास्तव में इस लेख के छपने तक वह बेरोजगार है। आप सोच रहे होंगे कि इस प्रतिभाशाली युवा के साथ आखिर कहां चूक हो गई?

नाकामी का कारण उसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स में छिपा है। हम जैसों की तरह वह भी फुटबॉल, सचिन के स्कोर करने की क्षमता, भारतीय राजनीति व इसमें पसरे भ्रष्टाचार और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव समेत विभिन्न मसलों पर अपनी राय सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर पेश करता रहता है।

लोगों का मानना है कि उसने इस बारे में अपने विचार बहुत मजबूती के साथ रखे कि क्यों बराक ओबामा को दोबारा अमेरिका का राष्ट्रपति नहीं बनना चाहिए। इसे देख अंतिम साक्षात्कार के लिए उसका नाम शॉर्टलिस्ट करने वाली कुछ कंपनियां उसकी सोशल नेटवर्किंग साइट्स गतिविधियों पर गौर करने के बाद पीछे हट गईं। इन कंपनियों के मुख्यालय अमेरिका में स्थित हैं और वे अपने यहां किसी ऐसे व्यक्ति को काम पर नहीं रखना चाहतीं, जो इस कदर मुखर हो क्योंकि इससे उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है।
इंटरनेट व सोशल मीडिया में क्रांतिकारी बदलाव आने के साथ कोई भी अपनी ऑनलाइन मौजूदगी दर्ज कराने से बच नहीं सकता। एक बढिय़ा ऑनलाइन फुटप्रिंट किसी शख्स की क्षमताओं, नेटवर्क और संपर्क साधने के जरियों की पैकेजिंग कर उन्हें एक जगह स्थापित करने का अच्छा तरीका है। यह आपके बैच के साथियों, आपकी तलाश में जुटे लोगों और संभावित नियोक्ताओं को आप तक पहुंचने में मदद करता है।

गलत लोगों को काम पर रखने की लागत साल-दर-साल बढऩे के साथ पेशेवर नियोक्ता ऐसे संभावित कर्मचारियों को उनके प्रोफेशनल प्रोफाइल्स और पारंपरिक संदर्भों से परे जाकर भी देखने लगे हैं। इस लिहाज से फेसबुक व ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स संबंधित शख्स के बारे में नजदीक से जानने में बहुत काम आ रही हैं। अक्षय को अपने ब्लॉग्स, अनुपयुक्त तस्वीरें व प्रोफाइल्स हटाने पड़े, जिसमें उसे महीना भर लगा। उसने प्राइवेसी पॉलिसी की जांच करने के बाद अपनी सेटिंग्स बदल दीं।

सबक यह मिलता है कि खुद के बारे में सर्च करें। अपने बारे में उसी तरह जांच करें, जैसे कोई एचआर मैनेजर करता है। आप जान जाएंगे कि आप कहां खड़े हैं। एक बात याद रखें। जो कुछ भी आप लिखते हैं, वह चारों ओर जाएगा और लोग उसमें यह भी देखेंगे कि आपका लहजा, शैली और व्याकरण कैसा है। यदि आप अपनी श्रेष्ठता दिखाने के लिए किसी से इस तरह उलझने जा रहे हैं, तो इसे देखकर भावी नियोक्ता यह भी समझ सकता है कि आप बहस बहुत करते हैं। लिहाजा किसी सार्वजनिक विषय के बारे में सोच-समझकर ही अपनी राय जाहिर करें।
 
 
 

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