बदल रहे हैं अनुलाभ देने के तौर-तरीके
एन. रघुरामन
| Oct 26, 2012, 11:57AM IST

अनुषा श्रीधर ने दो साल पहले डेलॉइट कंपनी को ज्वाइन किया था। लगभग उसी समय से उसके दादा-दादी बीमार रहने लगे थे, जिनके साथ रहते हुए उसने अपनी पढ़ाई-लिखाई पूरी की थी। शुरुआत में वह ऑफिस निकलते समय पड़ोसियों से उनका ध्यान रखने के लिए बोल आती थी। लेकिन बाद में इसमें दिक्कत होने लगी। धीरे-धीरे कंपनी के एचआर कर्मियों ने अनुषा की दिक्कत को समझा और उन्होंने उसके दादा-दादी की देखभाल के लिए एक बैक-अप व्यवस्था की। अब जब भी अनुषा को कंपनी के किसी काम से ऑफिस में देर तक बैठना पड़ता तो वे उसके दादा-दादी की देखभाल के लिए उस शख्स को भेज देते, जिसे इस तरह के कामों के लिए तैनात किया गया था। डेलॉइट कंपनी में पर्सनल ट्रेनर्स, न्युट्रिशनिस्ट समेत वैवाहिक विवादों समेत कई व्यक्तिगत समस्याओं के लिए चौबीसों घंटे काउंसिलिंग सेवा उपलब्ध है। कुछ ऐसे टीम मेंबर्स भी हैं जो मौका पडऩे पर बेबी सिटर की भी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा उनके खान-पान के लिए बेहतरीन कैफेटेरिया तथा शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए मालिश और जिम वगैरह की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। ऐसी सेवाएं कर्मचारियों को ज्यादा उत्पादक होने और उन्हें ज्यादा खुश रखने में मददगार होती हैं। कर्मचारियों को मिलने वाले अनुलाभ अब ऑफिस से निकलकर घर तक पहुंच गए हैं। फेसबुक अपने कर्मचारी के यहां किसी नए बच्चे के जन्म के अवसर पर खर्च करने के लिए ४००० डॉलर देती हैं। स्टेनफोर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन घर पर डॉक्टरों की सेवा मुहैया कराता है। जेनेनटेक नामक एक आईटी कंपनी घर पर डिनर की सुविधा मुहैया कराती है क्योंकि कामकाजी दंपती अमूमन ऑफिस से देर से घर पहुंचते हैं। इसी तरह एवरनोट जैसी एक अन्य आईटी सर्विस कंपनी के कर्मचारियों को हाउस-कीपिंग स्टाफ की सुविधा मिलती है, जो हफ्ते में दो बार उनके घर जाते हुए उसकी पूरी साफ-सफाई करते हैं। कंपनी का फलसफा है- यदि आप दिनभर काम करने के बाद रात को थके-हारे घर लौटते हैं और वहां साफ-सफाई से जुड़े कामों का अंबार लगा है, तो आप इसे देखकर भुनभुना जाएंगे। चूंकि टेक्नोलॉजी ने घरेलू जीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है (मोबाइल फोन व कंप्यूटर्स इत्यादि के रूप में), लिहाजा अब कंपनियां इस तरह की नीतियां बनाने में जुटी हैं, जिससे घरेलू जिंदगी का असर कार्यस्थल तक न पड़े। यदि कर्मचारी घर में नाखुश रहता है, तो इससे उसकी उत्पादकता भी प्रभावित होती है। इसी वजह से ये कंपनियां बोनस और शेयर विकल्प जैसे पारंपरिक अनुलाभों से हटते हुए उन्हें उनके घर में रहने के दौरान मानसिक शांति मुहैया कराने को तवज्जो देने लगी हैं। लंदन में अनेक कंपनियां ऑफिस में रोज कर्मियों से उनके किचन से जुड़े काम का शेड्यूल लेती हैं। दूसरी शिफ्ट का ऑफिस ब्वॉय काम पर आते समय सब्जियां व मीट वगैरह खरीदते हुए आ जाता है। इसके बाद उन्हें काटकर साफ करके इनमें जरूरी मसालों को मिक्स करते हुए पकाने के लिए तैयार रखता है। कर्मचारी द्वारा इस तरह की मदद का ऑर्डर ऑफिस पहुंचने पर दोपहर १२ बजे से पहले दर्ज हो जाना चाहिए। ऑफिस से लौटते समय कर्मचारी इन रेडीमेड सामानों को उठाते हैं और घर पहुंचकर कुछ ही मिनटों में उनका डिनर तैयार हो जाता है। फंडा यह है कि... यदि आप वास्तव में कर्मचारियों की परेशानी को कम करना चाहते हैं या जिंदगी की सुपरतेज रफ्तार को कुछ हद तक घटाना चाहते हैं तो मौद्रिक अनुलाभों जैसे नियमित तौर-तरीकों के बजाय कुछ नए तरह के अनुलाभों को अपनाएं। raghu@dainikbhaskargroup.com मैनेजमेंट फंडा |








