Home » Magazine » Career Mantra » Article Of Career Mantra

आधुनिक तरीके से भी याद रख सकते हैं इतिहास

एन. रघुरामन | Nov 28, 2012, 11:31AM IST
आधुनिक तरीके से भी याद रख सकते हैं इतिहास
हर साल यदि आप ऐतिहासिक दिनों को याद करने का कोई नया तरीका अख्तियार करते हैं तो अगली पीढ़ी के जेहन में इसकी यादें ताजा रहेंगी। लोगों द्वारा इतिहास को कई तरीकों से याद किया जाता है। फ्रीज मॉब एक नया फॉर्मेट है और यह आइडिया युवाओं द्वारा काफी रिसर्च के बाद आया है।

raghu@dainikbhaskargroup.com



मुझे २६, २७ व २८ नवंबर, २००८ के वे तीन दिन अच्छी तरह से याद हैं। मेरे ख्याल से हम सबको याद होंगे, भले ही हम अपने मन की अंधेरी गुफाओं में उन यादों को कितना ही खदेडऩे की कोशिश करें। २६/११ के उस भयावह हादसे ने हम जैसे कई लोगों के मन से सुरक्षा का भ्रम हमेशा के लिए दूर कर दिया था। हम अपने ही शहर में सुरक्षित नहीं थे। यह ऐसा था मानो कोई घातक बम हमारे लिविंग रूम में आ गिरा हो!

एक पत्रकार होने के नाते ताज होटल के बाहर डेरा जमाए मैं इस भयावह हमले को देख रहा था। मैं खुद को ताज से बाहर निकलते धुएं के जबरदस्त गुबार से दूर नहीं कर पा रहा था। मैंने वहां आम लोगों के साथ-साथ मुंबई पुलिस के अधिकारियों और आर्मी के जवानों को आतंकियों के साथ मुठभेड़ में अपनी जान गंवाते देखा। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी) के भीतर दाखिल होते हुए मैंने वहां कमांडोज की आंखों के इर्द-गिर्द काले घेरे देखे, जो आखिरकार तीन दिन के बाद मिशन पूरा होने पर राहत की सांस ले रहे थे। आज से ठीक चार साल पहले २८ नवंबर को जैसे ही मैं स्टेशन के अंदर घुसा, मैंने वहां अपने तीन दिन के इस जीवन की सबसे मार्मिक छवि देखी। यह एक कोल्हापुरी चप्पल थी। एक पुरानी, घिसी हुई कोल्हापुरी चप्पल प्लेटफॉर्म पर पड़ी थी, जो संभवत: ऐसे किसी मासूम शख्स की थी, जिसे कार्गो पैंट और काली शर्ट में आए दुर्दांत आतंकियों ने अपनी गोली का निशाना बना लिया होगा।

'मेरे जेहन में २६ नवंबर का वह दृश्य कौंध गया, जब सीएसटी के एंट्रेंस के नजदीक जहां-तहां मानव शरीर बिखरे पड़े थे। मेरा उसी जगह से रोज अपने काम पर आना-जाना होता था। यहां तक कि दो दिन बाद भी किसी ने इधर-उधर पड़े सूटकेसों को हाथ नहीं लगाया था।'

मैं उन तीन दिनों तक ताज, ओबेरॉय होटल व सीएसटी रेलवे स्टेशन के बीच निराश मन से घूमता रहा। उन दिनों के लिए कारों की आवाजाही मना थी और दिन की रोशनी के अलावा रात में भी आतंकवादियों का मुकाबला करने के लिए खूब रोशनी होती थी। फिर भी हमें लगता था कि हमारे दिल के ऊपर किसी की काली छाया पड़ गई हो।

चार साल बाद इस २६ नवंबर की शाम तकरीबन पांच बजे उसी जगह के बाहर जहां कई लोगों को गोलियों से भून दिया गया था, मुंबई के यंगस्टर्स ने आतंकी हमले के शिकार लोगों की याद में एक फ्रीज मॉब का आयोजन किया। इस फ्रीज मॉब के तहत कम से कम १०० युवा अचानक कुछ देर के लिए जीते-जागते बुत बन गए और उन्होंने उस भयानक दिन के काल्पनिक दृश्य को पुन: पेश किया। और दोनों घटनाक्रमों का गवाह होने के नाते मैं यह आश्वस्त कर सकता हूं कि इन दोनों दृश्यों में ज्यादा अंतर नहीं था, सिवाय इसके कि २००८ का दृश्य असली था, जबकि २०१२ का दृश्य अभिनीत।

फ्रीज मॉब ने एक नुक्कड़ नाटक करते हुए मुंबई के सीएसटी स्टेशन में दो आतंकवादियों द्वारा निरीह लोगों पर गोलियां बरसानी शुरू करने से लेकर अजमल आमिर कसाब को धर दबोचने तक उस रात्रि के हरेक दृश्य को चरण-दर-चरण पेश किया। फ्लैश मॉब के बाद फ्रीज मॉब भी युवा पीढ़ी का एक क्रिएटिव आइडिया है, जिसमें आतंकी हमले के उन्हीं दृश्यों को ऐसे लोगों के लिए तैयार किया गया, जिन्होंने इस बर्बर कृत्य को नहीं देखा था।

फ्रीज मॉब एक ऐसा फॉर्मेट है जहां लोग किसी सार्वजनिक जगह पर बेतरतीब तरीके से इधर-उधर फैल जाते हैं और एक निश्चित वक्त पर अचानक बुत की तरह जड़वत हो जाते हैं। यह सामान्यत: मूक विरोध या प्रदर्शन का एक स्वरूप है। यह एक नियोजित रूटीन कृत्य है, जहां पर दर्जनों लोग पूरी तरह शांत रहते हुए एक निर्धारित मुद्रा अख्तियार कर लेते हैं।
आपके विचार
 
अपने विचार पोस्ट करने के लिए लॉग इन करें

लॉग इन करे:
या
अपने बारे में बताएं
 
 

दिखाया जायेगा

 
 

दिखाया जायेगा

 
कोड:
8 + 7

 
विज्ञापन
 
Ethical voting

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

स्पोर्ट्स

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

फोटो फीचर

 
Email Print Comment