आप किसी भी स्तर पर रहते हुए बुराई से लड़ सकते हैं
एन. रघुरामन | Dec 17, 2012, 10:26AM IST

समाज में व्याप्त बुराई से लडऩे के लिए आपके पास धनबल या बाहुबल का होना जरूरी नहीं है। आपके भीतर भ्रष्टाचार के खिलाफ लडऩे की इच्छाशक्ति व जिद होनी चाहिए। गलत को रोकने के लिए सामाजिक स्तर या धनबल का होना कदाचित ही मायने रखता है।
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चेन्ने गौड़ा बेंगलुुरू में कलासाईपलयम में अल्बर्ट विक्टर रोड पर इडली का एक मामूली विक्रेता है। उसकी इडली ज्यादातर श्रमिक वर्ग ही खरीदता है। उसकी पत्नी घर पर इडलियां पकाती है, जिन्हें उसके बच्चे लाकर उसे देते हैं और वह इन इडलियों को बेचकर जैसे-तैसे अपने घर का गुजारा करता है। उसकी महीनेभर की कमाई १०,००० रुपए से कम ही होगी। इसमें से भी ४,००० रुपए घर के किराए में चले जाते हैं। हर दिन की कमाई में से उसे १५० रुपए इडली की गुमटी के किराए के रूप में, ४० रुपए बिजली के लिए और १००० रुपए किराना के सामान के लिए चुकाने पड़ते हैं। उसका कर्ज ८५,000 रुपए तक पहुंच चुका है।
कुछ रुपए उसे स्थानीय पार्षद, नगरीय निकाय के अधिकारियों और इलाके के पुलिसकर्मियों को भी घूस के रूप में देने पड़ते हैं। वह गांव में अपने बुजुर्ग माता-पिता को भी कुछ रुपए भेजता है। हर महीने उसे तकरीबन ५०० रुपए तक घूस देनी पड़ती है, ताकि उसकी अपंजीकृत गुमटी के लिए कोई उसे परेशान न करे। मगर पिछले हफ्ते जब वह रोज की तरह अपनी गुमटी पर इडली बेच रहा था, कुछ लोग फिल्मी स्टाइल में वहां आए और बगैर किसी कारण के उसे पकड़कर ले गए। वे उसकी गुमटी की चाबियां भी ले गए। वे लोग खुद को कांग्रेसी पार्षद अव्वई का समर्थक बता रहे थे और उन्होंने गौड़ा से कहा कि वह तुरंत अव्वई से जाकर मिले।
जब गौड़ा अव्वई से जाकर मिला तो उसका कहना था कि उसे पर्याप्त हिस्सा नहीं मिल रहा है और ३५,000 रुपए की मांग की। गौड़ा ने हाथ जोड़कर विनती करते हुए रकम कुछ कम करने के लिए कहा। आखिरकार गौड़ा को शर्त पर घर जाने दिया गया कि वह दो दिन के भीतर अव्वई को २०,००० रुपए लाकर देगा।
इस नई मांग से परेशान गौड़ा अपने घर पहुंचा और अपने परिवार का आखिरी सोने का जेवर भी २४ टका ब्याज पर गिरवी रख दिया। उसे इस सोने की अंगूठी के बदले में १५,000 रुपए मिले। उसे अब और कहीं से कर्ज मिलने की आस भी नहीं थी। हारकर उसने लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाया।
वे उसकी मदद के लिए तैयार हो गए। इस मंगलवार को मैं इस महिला पार्षद से से जाकर मिला और जब वह गौड़ा से घूस के पैसे ले रही थी, तभी उसे रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया गया। इसके नतीजों को ध्यान में रखते हुए लोकायुक्त ने खुफिया तौर पर गौड़ा की छोटी-सी इडली शॉप के लिए सुरक्षा का इंतजाम भी किया, ताकि उसके परिवार की आजीविका पहले की तरह चलती रहे। उन्होंने गौड़ा के इस साहसिक कृत्य के लिए उसे व उसके परिजनों को भी सुरक्षा मुहैया कराई।
लोकायुक्त डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. एम अश्विनी (जिनकी निगरानी में यह जाल बिछाया गया) ने भरोसा दिलाया कि सुरक्षा देने के अलावा वे भविष्य में भी तमाम जरूरी मदद मुहैया कराते रहेंगे। हालांकि गौड़ा ने अपनी जान के डर से कुछ समय के लिए दुकान पर आना बंद कर दिया, लेकिन वह कहता है कि अब से किसी को घूस नहीं देगा।
उसके इस कृत्य को देख मुझे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले शनमुघम मंजूनाथ जैसे लोगों की याद हो आई। आईआईएम, लखनऊ से ग्रेजुएट शनमुघम मंजूनाथ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में कार्यरत थे। वर्ष २००५ में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में पदस्थ मंजूनाथ ने जब पेट्रोल में मिलावट के गोरखधंधे के खिलाफ आवाज उठाई तो उनकी निर्ममता से हत्या कर दी गई। इसी तरह इसी साल गर्मियों में आईपीएस अफसर नरेंद्र कुमार की ग्वालियर के निकट खनन माफिया द्वारा हत्या कर दी गई।






