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प्रभावित पार्टी से चर्चा करने पर मिल सकते हैं बेहतर समाधान

N. Raghuraman | Dec 21, 2012, 12:06PM IST
प्रभावित पार्टी से चर्चा करने पर मिल सकते हैं बेहतर समाधान
इस हफ्ते मंगलवार को मैं मुंबई से एक फ्लाइट में चढ़ा, जो नई दिल्ली से आकर गोवा जा रही थी। चूंकि इस फ्लाइट में मुंबई से चढ़ने वाले यात्री बहुत कम थे, लिहाजा हमें अनेक दिल्लीवासियों के बीच बिठा दिया गया। विमान के भीतर मैं कुछ युवाओं के बीच जाकर बैठ गया, जिनकी चर्चा का ज्वलंत मुद्दा था रविवार को देश की राजधानी में चलती बस में एक पैरामेडिकल छात्रा के साथ हुआ बर्बर गैंगरैप। 
 
वे सभी लोग इस कृत्य को लेकर गुस्से और पीड़ित के प्रति संवेदनाओं से भरे थे। मैंने उनसे पूछा, ‘आखिर हम युवा लड़कियों व महिलाओं को इस तरह के बर्बर कृत्य से कैसे बचा सकते हैं?’ इस पर मैं उनकी प्रतिक्रिया देखकर दंग रह गया। उन युवाओं ने कई मुसाफिरों से सीट की अदला-बदली की और विमान के पिछले हिस्से की ओर चले गए और इस बारे में चर्चा करने लगे कि हम इस मामले में कैसे आगे बढ़ सकते हैं। 
 
फ्लाइट के टेक-ऑफ के बाद उन्होंने मुझसे भी पीछे आकर साथ बैठने का निवेदन किया। वहां उन्होंने न सिर्फ मुझे यह बताया कि वे व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए क्या करने जा रहे हैं, बल्कि इस बारे में पूरी जानकारी भी दी। 
जब उन्होंने मुझसे कहा कि वे ‘कृव मागा’ जॉइन करने जा रहे हैं, तो मैं कुछ समझ नहीं पाया। ‘कृव मागा’ आत्मरक्षा की एक इजरायली विधा है। इस विधा को एंटी-सेमिटिंग दंगों के दौरान भीड़ से निपटने के लिए हंगेरियाई-इजरायली मार्शल आर्टिस्ट इमि लिचटेनफेल्ड ने विकसित किया था। आत्मरक्षा की इस तकनीक में इंसान की सहज वृत्ति, प्रतिक्रिया और बचाव के साथ-साथ विरोधी पर त्वरित हमला करने पर जोर दिया गया है। ‘कृव’ का अर्थ है लड़ाई और ‘मागा’ का आशय है संपर्क। 
 
लड़ने की यह तकनीक इजरायली राष्ट्र के गठन (१९४८) से बहुत पहले अस्तित्व में आ चुकी थी। इजरायली रक्षा सेनाओं के गठन के बाद लिचटेनफेल्ड को इसके स्कूल ऑफ कॉम्बेट फिटनेस का चीफ इंस्ट्रक्टर बनाया गया। उनकी यह विरासत आज कई देशों में फल-फूल रही है और न सिर्फ इसका मार्शल आर्ट की तरह अभ्यास किया जाता है, वरन यह अच्छी फिटनेस पाने के जरिए के तौर पर भी खूब लोकप्रिय हो रही है। 
 
‘कृव मागा’ आपको किसी संघर्षपूर्ण स्थिति में तनाव और सदमे के बीच अपना दिमागी संतुलन बरकरार रखने के साथ-साथ पलटवार करने के लिहाज से प्रशिक्षित करती है। यह आपको सिखाती है कि जब आप पर असल जिंदगी में हमला किया जाए, तो आपकी पहली प्रतिक्रिया दहलने की नहीं होनी चाहिए। यह विधा व्यक्ति के रिफ्लेक्सेस को मजबूत बनाने पर जोर देती है, ताकि वह विभिन्न खतरों और हथियारों के खिलाफ अपना बचाव अच्छी तरह से कर सके। 
 
‘कृव मागा’ में अमूमन ऐसे हर तरह के खतरों से निपटना सिखाया जाता है, जिनका नागरिकों को सामना करना पड़ सकता है। वास्तव में मार्शल आर्ट की इस विधा के गहन प्रशिक्षण से आप भीड़ प्रबंधन, दंगा नियंत्रण, आपातकालीन निकासी तकनीक इत्यादि में महारत हासिल कर सकते हैं और बंधक बनाने या आतंकी स्थितियों से भी निपट सकते हैं।
इस विधा को फिटनेस रुटीन के तौर पर भी अपनाया जा सकता है, क्योंकि इसमें आपके पूरे शरीर का जमकर वर्कआउट हो जाता है। इस विधा ने किक बॉक्सिंग, कराटे, मुये थाई, जुजित्सु, जूडो व रेसलिंग से जुड़े कई बेहतरीन बॉडी मूव्ज को अपनाया है। 
 
ऐसे में कोई आश्चर्य की बात नहीं कि जेनिफर लोपेज, लूसी लियु, एंजेलिना जोली और क्रिस्ताना लोकेन जैसे हॉलीवुड अभिनेत्रियों ने ‘टर्मिनेटर-३’, ‘एनफ’, ‘चार्लीज एंजेल्स’ और ‘लारा क्रॉफ्ट - टॉम्ब रेडर’ जैसी फिल्मों में अपनी एक्शन प्रधान भूमिकाओं की तैयारी के लिहाज से खुद को इस विधा में प्रशिक्षित किया। 
 
वे निजी जिंदगी में भी इस विधा का अभ्यास करती हैं क्योंकि इससे न सिर्फ वे कैलॉरी को बर्न करते हुए अपनी बॉडी को सुडौल रख पाती हैं, बल्कि उनकी कार्डियो-वास्कुलर क्षमता भी बढ़ती है तथा रिफ्लेक्सेस को भी धार मिलती है, जो कि मार्शल आर्ट का सर्वश्रेष्ठ पहलू है। 
 
बहरहाल, बातचीत के अंत में मुझे लगा कि विभिन्न अखबारों व टीवी चैनलों पर असंबद्ध लोगों की राय पेश करने के बजाय इन युवाओं को अपनी बात रखने देना चाहिए। उनकी बात से मैं काफी हद तक सहमत था।
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