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दुनिया को चाहिए दिल का इंटेलिजेंस!

एन. रघुरामन | Feb 08, 2013, 11:43AM IST
 
 

आज हमें आईक्यू व ईक्यू की अपेक्षा सीक्यू की कहीं ज्यादा जरूरत है, जो हमें भौतिकवाद के बजाय आध्यात्मिक तौर पर ज्यादा समृद्ध बना सकता है। 
 
raghu@dainikbhaskargroup.com 
 
निपुन मेहता servicespace.org के संस्थापक हैं, जो गिफ्ट इकोनॉमी की दिशा में काम करने वाली एक गैर-लाभकारी सेवा है। एक बार वह चीन में कुछ प्रभावशाली कारोबारी लीडर्स के समक्ष बोल रहे थे। श्रोताओं में से एक ने उनसे कहा 'आप महात्मा गांधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी विनोबा भावे के बारे में खूब बातें करते हैं कि कैस उन्होंने समूचे भारत में 80,000 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए लोगों को ५० लाख एकड़ तक भूदान के लिए पे्ररित किया। यह मानवजाति के इतिहास में एक असाधारण उपलब्धि हो सकती है, लेकिन वास्तव में आज कितने लोग विनोबा भावे को याद करते हैं? इसके बजाय जरा इसके बारे में भी सोचें कि कितने सारे लोग स्टीव जॉब्स और उनके द्वारा छोड़ी गई विरासत को याद करते हैं।' 
 
यह सुनकर निपुन सोच में पड़ गए और उन्हें लगा कि अल्पकालीन प्रभाव के लिहाज से उस व्यक्ति का कहना सही था। लेकिन निपुन खुश नहीं थे। संभवत: इस वजह से भी कि यह तुलना साठ के दशक में रहे एक व्यक्ति और हालिया दौर के एक शख्स के बीच थी। इसी बीच फोब्र्स पत्रिका ने एक स्टोरी प्रकाशित की, जिसमें एक सवाल था- 'कौन दुनिया में ज्यादा बदलाव लेकर आया- बिल गेट्स या मदर टेरेसा?' और उसका निष्कर्ष था- बिल गेट्स। 
 
निपुन ने इसी सवाल को पुणे की एक कक्षा में बच्चों से पूछा। ज्यादातर बच्चों को कहना था- 'मदर टेरेसा'। लिहाजा उन्होंने अगला सवाल पूछा- क्यों? जब बच्चे इसका जवाब देने के लिए हाथ उठा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक शर्मीली-सी लड़की (जो शायद 11 साल की रही होगी) ने हिचकते हुए अपना हाथ ऊपर किया और फिर नीचे कर लिया। यह देखकर निपुन ने उसे बोलने के लिए उकसाया और उस लड़की ने जो कहा, उसे सुनकर सब अभिभूत हो गए। लड़की का कहना था- 'सर, बिल गेट्स पैसे की ताकत के इस्तेमाल से दुनिया में बदलाव लेकर आए, जबकि मदर टेरेसा ने प्यार की ताकत से दुनिया को बदला। और मुझे लगता है कि प्यार पैसे से ज्यादा ताकतवर है।' यह बिल्कुल सरल, स्पष्ट, सुंदर और मौके पर दिया गया माकूल जवाब था और इसके बाद क्लास में किसी और से प्रतिक्रिया लेने की जरूरत नहीं थी। 
 
व्यापक अनुसंधान और शिक्षा के बाद हम बौद्धिक लब्धि (आईक्यू ) और भावनात्मक लब्धि (ईक्यू) के बारे में तो समझने लगे हैं, मगर अब हमें सीक्यू के बारे में भी समझने की जरूरत है। सीक्यू यानी कंपैशन कोशेंट (करुणा लब्धि)। यह दिल का इंटेलिजेंस है। तकरीबन एक दशक पहले न्यूरोसाइंटिस्ट्स ने पाया कि न सिर्फ हमारे दिमाग में बल्कि दिल में भी न्यूरॉन्स होते हैं, जिनके बीच संवाद होता है। तुलसीदासजी ने भी कहा है 'तुलसी इस संसार में सबसे मिलिए धाय, न जाने किस रूप में नारायण मिल जाए।' हमारे गैजेट्स (यहां बिल गेट्स भी पढ़ सकते हैं) से प्रेरणा महज जानकारी के रूप में आती है, कभी-कभी कुछ पलों के भीतर ही। लेकिन जब यही प्रेरणा किसी ऐसे शख्स की ओर से आती है, जो अपनी कथनी के मुताबिक चलता है (यहां मदर टेरेसा भी पढ़ सकते हैं) तो इसका कुछ अलग ही असर होता है। यह हमारी चेतना के भीतर गहरे तक प्रतिध्वनित होती है। यही कारण है कि दीर्घकाल में हमारा दिमाग कभी दिल के खिलाफ नहीं जाता। प्यार के सहारे किए गए काम (चाहे वह कितना ही छोटा या साधारण हो) का असर आपके जीवन के बाद भी कायम रहता है और आगे कई पीढिय़ों को प्रेरणा देता है। बढ़ते अपराध और भौतिकवाद के साथ आधुनिक जगत में आज करुणा जैसे भाव की जरूरत ज्यादा से ज्यादा महसूस की जाने लगी है। 
 
 
 
 

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