योग्यताओं का युवा प्रबंधक
Source: साइरस पी. मिस्त्री | Last Updated 12:26(24/01/12)
साइरस पी. मिस्त्री टाटा समूह का नया उत्तराधिकारी नवम्बर 2011, बुधवार की शाम 6 बजे के आसपास देश-दुनिया में एक खबर उभरी कि टाटा समूह को नया उत्तराधिकारी मिल गया। दिलचस्पी की बात यह थी कि भावी मुखिया टाटा परिवार से न होकर एक बाहरी व्यक्ति था। और, फिर अगले कुछ ही घंटों में 43 वर्षीय साइरस पालोनजी मिस्त्री के नाम को एक नई पहचान मिल चुकी थी। साथ ही इस बात की पुष्टि हो गई कि वे ही 73 वर्षीय रतन टाटा के उत्तराधिकारी होंगे। वर्तमान और भावी मुखिया की उम्र में करीब 30 साल का अंतर है, जो इस बात का संकेत है कि टाटा समूह और जवां होने वाला है। मीडिया और सार्वजनिक जीवन से परहेज रखने वाले साइरस मिस्त्री के बारे में अभी बहुत कुछ जानना बाकी है, लेकिन उन्हें जानने वाले कहते हैं कि वे देश-दुनिया के उभरते युवाओं और प्रबंधकों के लिए नए रोल मॉडल साबित होंगे।
क्यों होंगे साइरस रोल मॉडल ?
1. दिखावे से परहेज : टाटा समूह के सर्वेसर्वा बनाए जाने की घोषणा के दूसरे दिन जब साइरस टाटा के मुंबई स्थित मुख्यालय बॉमबे हाउस पहुंचे तो वे साधारण पैंट-शर्ट पहने हुए थे, जबकि उनका स्वागत करने वाले लोग सूट-बूट में आए थे। उनकी कमीज की बांहें मुड़ी हुई थीं और कुछ बटन खुले थे। हालांकि बॉमबे हाउस साइरस के लिए नई जगह नहीं थी, लेकिन टाटा संस के डिह्रश्वटी चेयरमैन के तौर पर मिस्त्री ने यहां पहली बार कदम रखा था। जाहिर सी बात है कि रतन टाटा की तरह साइरस भी खुद के दिखावे से ज्यादा काम को तरजीह देने वाले हैं।
2. युवाओं को ज्यादा मौका : हालांकि अभी मिस्त्री के चेयरमैन पद पर पहुंचने में एक साल का समय है, लेकिन टाटा के कारोबारी मुयालय में अटकलें हैं कि समूह के युवा अधिकारियों को अब ज्यादा जिममेदारियां सौंपी जा सकती हैं। दिलचस्प है कि २००६ में टाटा संस के निदेशक मंडल में शामिल होने वाले पालोनजी मिस्त्री के छोटे बेटे साइरस के बाद से कोई भी नया सदस्य इसमें शामिल नहीं हुआ है। युवाओं को ज्यादा मौका मिलना, करीब 143 साल पुराने इस कारोबारी साम्राज्य में उन चुनिंदा बदलावों में से एक है, जो मिस्त्री अपने साथ लाएंगे। 43 साल के साइरस के पास टाटा समूह को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए 20 साल से ज्यादा वक्त है।
3. जमीनी शक्सियत शर्मीला व्यक्तित्व : पिछले कई दशकों से सुर्खियों में रहने के बावजूद रतन टाटा जमीनी उत्तराधिकारी और शर्मीले व्यक्तित्व वाले इंसान हैं। इसी तरह से साइरस मिस्त्री को करीब से जानने वाले कहते हैं, वे बिल्कुल रतन टाटा जैसे हैं। दोनों के स्वभाव और खासकर लोगों से मिलने जुलने की आदत में काफी समानता है। दोनों शर्मीले हैं, लेकिन जमीन से जुड़कर काम करते हैं और बेहद जिममेदार हैं।
4. सबसे अलग और सामान्य : साइरस स्कूल के दिनों से ही अपनी स्वभावगत खूबियों के कारण सबसे अलग थे। वे अपनी कक्षा के सबसे होनहार, लेकिन बेहद शर्मीले छात्र थे। मुंबई के कैथ्रेडल एंड जॉन कॉनन स्कूल में पढ़ने वाली बड़ी हस्तियों के बच्चों में वे आसानी से पहचाने जाते थे।
पालोनजी मिस्त्री
जन्म : 4 जुलाई, 1968
शिक्षा : स्कूली पढ़ाई मुंबई के कैथ्रेडल एंड जॉन कॉनन स्कूल
से, लंदन के इमपीरियल कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में
बीई, लंदन बिजेनस स्कूल से मैनेजमेंट की मास्टर्स डिग्री।
करियर : शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी से शुरुआत, बाद में
टाटा संस के डायरेक्टर।
खास बात : शर्मीला व्यक्तित्व, कम बोलने वाले गंभीर
वक्ता, काम के प्रति बेहद जिममेदार।
परिवार : पिता पालोनजी मिस्त्री, मां पैस्टी पेरिन दुबाश,
भाई : शापूर मिस्त्री, पत्नी: रोहिका (मशहूर एडवोकेट
इकबाल चागला की बेटी), बच्चे : 2
पसंद : अच्छे खाने और गोल्फ के शौकीन, यूरोप पसंदीदा
जगह ।
5. बुनियाद बनाकर समझदारी से कदम उठाना: सुर्खियों से दूर रहने वाले साइरस कारोबार जिममेदारी कदम बड़ी ही समझदारी से उठाते हैं। ये ऐसी खूबियां हैं, जो उन्हें पिता से मिली हैं। इमपीरियल कॉलेज लंदन से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले साइरस ने परिवार के कंस्ट्रक्शन कारोबार से शुरुआत की थी, क्योंकि इसी क्षेत्र में उनकी पढ़ाई का अच्छा उपयोग हो सकता था। काम संभालने के पहले ही दिन पिता ने उन्हें लक्ष्य बता दिया। यह था इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन कारोबार को बढ़ाना। लक्ष्य हासिल करने के लिए साइरस ने पश्चिम एशिया क्षेत्र पर फोकस दिया और इसमें सफल रहे।
6. नेतृत्व की अद्भुत क्षमता : कॉपरेरेट जगत के जिन लोगों ने साइरस मिस्त्री के साथ काम किया है, उनका कहना है कि इस युवा प्रबंधक के पास सीधे काम करने का तजुर्बा है। वह लंबे वक्त की रणनीतिक दिशा दे सकते हैं। उनमें नेतृत्व की अद्भुत क्षमता है और वे बदलावों पर गजब का नियंत्रण रखते हैं। इन सभी के साथ वे बेहद विनम्र भी हैं। दिलचस्प बात यह है कि साइरस टेलिस्कोप और माइक्रोस्कोप दोनों ही स्तर पर काम करने की काबिलियत रखते हैं। हालांकि मिस्त्री ने टाटा समूह की किसी कंपनी की कमान नहीं संभाली है, लेकिन वे समूह के सर्वोच्च बोर्ड में पांच वर्षो से अधिक समय से विद्यमान हैं।
7. पैतृक कंपनी से मिला अनुभव : साइरस के परिवार से संबंधित शापूरजी पालोनजी समूह के पूर्व रिकॉर्ड को देखें तो पिछले दशक के दौरान समूह ने बढ़िया नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया है और मिस्त्री इस समूह के दो प्रबंध निदेशकों में से एक हैं। कंस्ट्रक्शन कंपनी एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को खरीदना भी साइरस की बड़ी सफलता थी। कंपनी का अधिग्रहण उस वक्त किया गया, जब भारत में कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में तेजी थी।
8. अनुभवी रतन टाटा की पहली पसंद : टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा ने साइरस की नियुक्ति पर कहा है कि, टाटा संस के डिह्रश्वटी चेयरमैन के रूप में साइरस पी मिस्त्री का चयन एक अच्छा और दूरदर्शितापूर्ण निर्णय है। टाटा ने मिस्त्री के बारे में कहा है, वे अगस्त 2006 से ही टाटा संस के निदेशक मंडल में हैं और मैं उनके गुणों, भागीदारी, क्षमता, कुशाग्रता तथा नम्रता से प्रभावित हुआ। टाटा ने कहा कि वे साल भर मिस्त्री के साथ काम करते रहेंगे ताकि अनुभवों का आदान प्रदान कर उन्हें तैयार कर सकें।
9. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पकड़ : साइरस इस मामले में बेहद मजबूत हैं। दुनिया के कई देशों की बड़ी कंपनियों के शीर्ष प्रबंधकों के साथ साइरस का सीधा संपर्क रहा है, इसीलिए अंतरराष्ट्रीय कारोबार और उसके उतारचढ़ाव को वे अच्छी तरह जानते हैं। लंदन से पढ़ाई और पिता के कंस्ट्रक्शन कारोबार का विदेश में विस्तार करना उनकी योग्यता को आकर्षक बनाता है।
10. मशक्कत के बाद चयन : रतन टाटा का उत्तराधिकारी चुनना टाटा संस के लिए काफी मशक्कत का काम था। अगस्त 2010 में रतन टाटा के उत्तराधिकारी की खोज के लिए सदस्यों की एक समिति बनाई गई थी और इसमें खुद साइरस भी शामिल थे। इसमें शामिल सदस्यों ने सही व्यक्ति की खोज में दुनियाभर में चक्कर लगाए और दर्जनों बैठकें कीं। उत्तराधिकारी की दौड़ में सबसे आगे रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा चल रहे थे। इसके अलावा इंदिरा नूई समेत 14 अन्य लोग भी शामिल थे। इन सबके इंटरव्यू लिए गए।
इनके कामकाज के तरीके, अनुभव, योग्यता को परखा गया और तब जाकर सर्वसमति से साइरस को चुना गया। वैसे साइरस रिश्ते में तो नोएल टाटा के साले हैं। इस लिहाज से साइरस टाटा खानदान से बाहर के हुए। हालांकि इसके बावजूद कुछ का मानना है कि साइरस को इसलिए चेयरमैन बनाया जा रहा है, क्योंकि उनके पिता के पास टाटा संस के सर्वाधिक 18.5 फीसदी शेयर हैं।