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अवसरों का बाज़ार

dainikbhaskar.com | Nov 15, 2012, 15:19PM IST
अवसरों का बाज़ार
फंडामेंटल एनालिस्ट : फंडामेंटल एनालिस्ट का काम उन कंपनियों की सूची पर नज़र रखना होता है, जो एक ही इंडस्ट्री से संबंधित होती हैं और फर्म के क्लाइंट्स को नियमित रूप से रिपोर्ट भी इनकी जिम्मेदारी होती है। इस प्रक्रिया में एनालिस्ट कंपनी के आर्थिक परिणामों को प्रदर्शित करने के लिए मॉडल तैयार करते हैं। किसी इंडस्ट्री का खाका खींचने के लिए एनालिस्ट कंपनियों के ग्राहकों, सप्लायरों, प्रतिस्पद्र्धियों और अन्य जानकारों से बातचीत करते हैं। एनालिस्ट के काम का अंतिम परिणाम रिसर्च रिपोर्ट के रूप में सामने आता है, जो कि आर्थिक अनुमानों, प्राइस टार्गेट, स्टॉक के संभावित प्रदर्शन से जुड़ी सलाह आदि से संबंधित होती है।
 
टेक्निकल एनालिस्ट : टेक्निकल एनालिस्ट वह रिसर्चर होता है, जो पूर्व की बाज़ार कीमतों और तकनीकी इंडीकेटर्स पर आधारित निवेशों का विश्लेषण करता है। टेक्निकल एनालिस्ट के अनुसार शेयरों का कीमत व्यवहार, दोहराव वाली प्रकृति का होता है, इसलिए शेयरों की भविष्य की कीमत का अनुमान लगाने के लिए इसका इस्तेमाल हो सकता है। कंपनी के शेयरों की पूर्व कीमत के डेटा के आधार पर टेक्निकल एनालिस्ट शेयर कीमतों के स्तर को पहचानते हैं। वे विभिन्न टेक्निकल इंडीकेटर्स व चार्ट पैटर्न का इस्तेमाल भविष्य की कीमतों को निर्धारित करने के लिए करते हैं। शेयरखान में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट (इक्विटी) सोमिल मेहता के अनुसार, टेक्निकल एनालिसिस डे ट्रेडिंग और मध्यम अवधि में बाज़ार की दिशा पता लगाने के लिए भी किया जा सकता है। फाइनेंस में बीकॉम और पीजीडीबीए फाइनेंस की डिग्री इसमें मदद कर सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई से मास्टर्स ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज जैसी डिग्रियां भी मददगार साबित होंगी।
 
 
फंड मैनेजर : फंड मैनेजर फंड की निवेश रणनीति को लागू करने और पोर्टफोलियो टे्रडिंग गतिविधियों को व्यवस्थित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। अब निवेशक किसी फंड में निवेश का चुनाव करते हैं, इस उद्देश्य के साथ कि निवेश की प्रक्रिया की जिम्मेदारी उस पेशेवर पर छोड़ दी जाए जो जानता हो कि कब बेचना है, इसलिए किसी फंड विशेष की निवेश विशिष्टताओं पर गौर करते समय फंड मैनेजर की भूमिका अहम हो जाती है।
 
पोर्टफोलियो मैनेजर : फाइनेंशियल इंडस्ट्री की प्रतिष्ठित नौकरियों में से एक पोर्टफोलियो मैनेजर का काम है। पोर्टफोलियो मैनेजर एनालिस्ट और रिसर्चर की टीम के साथ काम करते हैं और अंतिम निवेश निर्णयों के लिए जिम्मेदार होते हैं। पीजीडीबीए/एमबीए/एमएमएस/एमएफसी (मास्टर ऑफ फाइनेंस एंड कंट्रोल)/ एमआईबी (मास्टर ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस)/ एमबीई (मास्टर ऑफ बिजनेस इकॉनॉमिक्स)/ एमकॉम /एमए (इकॉनॉमिक्स)/ एमएससी (मैथ्स), एमएससी (स्टैट) आदि योग्यताओं वाले उम्मीदवार इसके योग्य हैं।
 
मर्चेन्ट बैंकर : मर्चेन्ट बैंकर अंतरराष्ट्रीय फाइनेंस, कंपनियों के लिए लंबी अवधि के लोन और अंडरराइटिंग का काम करता है। मर्चेन्ट बैंकर आम जनता को नियमित बैंक सेवाएं उपलब्ध नहीं करवाते। वे इनिशियल  ऑफरिंग्स (आईपीओ), मर्जर, स्टॉक पुनर्खरीद और कॉर्पोरेट रिफाइनेंसिंग आदि के लिए सलाह देते हैं। कंपनी मर्चेन्ट बैंकर का चयन सिक्योरिटीज ऑफरिंग के लीड मैनेजर के रूप में करती है। मर्चेन्ट बैंक थर्ड पार्टी स्पेशलिस्ट की टीम तैयार करता है, जिसमें कानूनी सलाहकार, अकाउंटिंग व टैक्स स्पेशलिस्ट, फाइनेंशियल प्रिंटर व अन्य लोग शामिल होते हैं। जब कोई कंपनी सार्वजनिक कारोबार प्रतिभूतियों को पहली बार आईपीओ के जरिए जारी करती है तो मर्चेन्ट बैंक रिसर्च एनालिस्ट को रिसर्च रिपोर्ट तैयार करने और कवरेज के लिए नियुक्त करता है। रिपोर्ट में संपूर्ण आर्थिक विश्लेषण शामिल होता है। बिजनेस, फाइनेंस, अकाउंटिंग या इकॉनॉमिक्स में बैचलर डिग्री, एमबीए फाइनेंस, सीए, सीएस आदि मददगार हैं।
 
फॉरेक्स ट्रेडर : अगर आप मुद्राओं की खरीदबिक्री को समझते हैं तो फॉरेक्स मार्केट आपके लिए उत्साहजनक क्षेत्र हो सकता है। फॉरेक्स नौकरियां तेज गति का काम है, जहां काम के लिए काफी घंटे देने होते हैं। फॉरेक्स बाज़ार 24 घंटे खुला रहता है। फॉरेक्स टे्रडर के पास खातों और लेन-देन के कानून और नियमों की जानकारी होना जरूरी है।
 
फॉरेक्स मार्केट एनालिस्ट : फॉरेक्स मार्केट एनालिस्ट को करेंसी रिसर्चर या करेंसी स्ट्रैटजिस्ट कहा जाता है। ये फॉरेक्स ब्रोकरेज के लिए काम करते हैं। मुद्रा को प्रभावित करने वाले आर्थिक व राजनीतिक कारकों और फॉरेक्स मार्केट के बारे में दैनिक कमेंटरी लिखने के लिए गहन अध्ययन करते हैं। ये पेशेवर निष्कर्ष के लिए टेक्निकल, फंडामेंटल व क्वालिटेटिव एनालिसिस करते हैं। साथ ही साथ फॉरेक्स मार्केट की तेज गति के साथ कदम-ताल करने के लिए उच्च इन्हें का कंटेंट तैयार करना होता है। व्यावसायिक सौदों के लिए इस विश्लेषण का इस्तेमाल किया जाता है।
 
रिस्क मैनेजर : रिस्क मैनेजर अनेक प्रकार के जोखिम जैसे क्रेडिट रिस्क, मार्केट रिस्क, लिक्विडिटी रिस्क के साथ-साथ गैर बाज़ारी जोखिम का विश्लेषण करते हैं। वे इन्वेस्टमेंट बैंक, असेट मैनेजमेंट फब्र्स के साथ-साथ कॉर्पोरेशंस व सरकारी एजेंसियों में रिस्क मैनेजमेंट से जुड़े काम करते हैं।
 
म्यूचुअल फंड मैनेजर
 
ब्रोकर, कंपनी अधिकारियों, बाज़ार विशेषज्ञों, रिसर्च स्पेशलिस्ट आदि से संवाद के जरिए निवेश फैसले लेना इनकी मुय जिम्मेदारी होता है। ये पोर्टफोलियो पर नज़र रखते हैं और फंड्स के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हैं। फंड्स, स्कीम, पोर्टफोलियो, डिविडेंड शेड्यूल से जुड़ी जानकारी को आगे बढ़ाने के लिए इन्हें मार्केटिंग डिपार्टमेंट के साथ काम करना होता है।
 
 
कोटक महिंद्रा एलआईसी म्यूचुअल फंड, बिड़ला सन लाइफ  म्यूचुअल फंड, रिलायंस, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड्स, एचडीएफसी आदि म्यूचुअल फंड मैनेजर को नियुक्त करते हैं।
 
एसोसिएशन ऑफ  म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के सर्टिफिकेट धारक ग्रेजुएट्स के लिए बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर, रिलेशनशिप मैनेजर, मार्केटिंग एडवाइजर जैसे पद विभिन्न कंपनियों में उपलब्ध हैं।
 
रिसर्चर व एनालिस्ट
 
बाज़ार के रुझान को ताडऩे व निवेश फैसले लेने के लिए कंपनियां रिसर्चर व एनालिस्ट पर निर्भर रहती हैं। पूंजी बाज़ार का इक्विटी कैपिटल मार्केट विभाग शेयर ट्रेडिंग से संबंधित होता है, वहीं डेट कैपिटल मार्केट फिक्स्ड इन्कम पर काम करता है। कंपनियां इक्विटी एनालिस्ट को बाज़ार की रिसर्च करने और फायदेमंद निवेश विकल्पों के सुझाव के लिए नियुक्त करती हैं। रिसर्च एनालिस्ट वैल्यूएशन और कंपनियों के आर्थिक प्रदर्शन पर नज़र रखते हैं। संस्थान ऐसे इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट भी नियुक्त करते हैं, जो रिसर्च कर सकें और कंपनी की आर्थिक रिपोर्टों का अध्ययन व विश्लेषण कर सकें। एनालिस्ट बाज़ार व कंपनी स्टेटिस्टिक्स स्टॉक परफॉर्मेंस का अध्ययन करते हैं। वे आर्थिक परिणामों का विश्लेषण करते हैं और लंबी व छोटी अवधि के निवेश विकल्पों का सुझाव देते हैं।
 
स्टॉक ब्रोकर
 
 
स्टॉक ब्रोकर के लिए न्यूनतम योग्यता ग्रेजुएशन के साथ किसी स्टॉक ब्रोकिंग फर्म में दो साल का अनुभव है। ब्रोकर से पहले सब ब्रोकर को 12वीं होना जरूरी है। हालांकि यह मूलभूत योग्यता है, लेकिन स्टॉक ब्रोकिंग फर्म या इन्वेस्टमेंट कंपनी के साथ जुडऩे के लिए फाइनेंस में पोस्टग्रेजुएशन जरूरी है। कॉमर्स के ग्रेजुएट इस पेशे को अपना सकते हैं। स्टॉक एक्सचेंज की सदस्यता प्राप्त करने के लिए कम से कम छह माह का प्रशिक्षण किसी ब्रोकिंग फर्म से लेना होगा।
 
 
ब्रोकर, कंपनी अधिकारियों, बाज़ार विशेषज्ञों, रिसर्च स्पेशलिस्ट आदि से संवाद के जरिए निवेश फैसले लेना इनकी जिम्मेदारी होता है। ये पोर्टफोलियो पर नज़र रखते हैं और फंड्स के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हैं। फंड्स, स्कीम, पोर्टफोलियो, डिविडेंड शेड्यूल से जुड़ी जानकारी को आगे बढ़ाने के लिए इन्हें मार्केटिंग डिपार्टमेंट के साथ काम करना होता है।
 
 
कोटक महिंद्रा एलआईसी  म्यूचुअल फंड, बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, रिलायंस, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल  म्यूचुअल फंड्स, एचडीएफसी आदि  म्यूचुअल फंड मैनेजर को नियुक्त करते हैं।
एसोसिएशन ऑफ  म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के सर्टिफिकेट धारक ग्रेजुएट्स के लिए बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर, रिलेशनशिप मैनेजर, मार्केटिंग एडवाइजर जैसे पद विभिन्न कंपनियों में उपलब्ध हैं।
 
रिसर्चर व एनालिस्ट
 
बाज़ार के रुझान को ताडऩे व निवेश फैसले लेने के लिए कंपनियां रिसर्चर व एनालिस्ट पर निर्भर रहती हैं। पूंजी बाज़ार का इक्विटी कैपिटल मार्केट विभाग शेयर ट्रेडिंग से संबंधित होता है, वहीं कैपिटल मार्केट फिक्स्ड इन्कम पर काम करता है। कंपनियां इक्विटी एनालिस्ट को बाज़ार की रिसर्च करने और फायदेमंद निवेश विकल्पों के सुझाव के लिए नियुक्त करती हैं। रिसर्च एनालिस्ट वैल्यूएशन और कंपनियों के आर्थिक प्रदर्शन पर नज़र रखते हैं। संस्थान ऐसे इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट भी नियुक्त करते हैं, जो रिसर्च कर सकें और कंपनी की आर्थिक रिपोर्टों का अध्ययन व विश्लेषण कर सकें। एनालिस्ट बाज़ार व कंपनी स्टेटिस्टिक्स स्टॉक परफॉर्मेंस का अध्ययन करते हैं। वे आर्थिक परिणामों का विश्लेषण करते हैं और लंबी व छोटी अवधि के निवेश विकल्पों का सुझाव देते हैं।
 
स्टॉक ब्रोकर
 
 
स्टॉक ब्रोकर के लिए न्यूनतम योग्यता ग्रेजुएशन के साथ किसी स्टॉक ब्रोकिंग फर्म में दो साल का अनुभव है। ब्रोकर से पहले सब ब्रोकर को 12वीं होना जरूरी है। हालांकि यह मूलभूत योग्यता है, लेकिन स्टॉक ब्रोकिंग फर्म या इन्वेस्टमेंट कंपनी के साथ जुडऩे के लिए फाइनेंस में पोस्टग्रेजुएशन जरूरी है। कॉमर्स के ग्रेजुएट इस पेशे को अपना सकते हैं। स्टॉक एक्सचेंज की सदस्यता प्राप्त करने के लिए कम से कम छह माह का प्रशिक्षण किसी ब्रोकिंग फर्म से लेना होगा।
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