चिकित्सा और इंजीनियरिंग का संयोजन बायोमेडिकल इंजीनियरिंग
dainik bhaskar.com
| Aug 14, 2012, 16:41PM IST

प्रवेश पाने के लिए
बायोमेडिकल इंजीनियर बनने के लिए भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र और गणित के साथ 10+2 करने के बाद आपको बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री (बीएमई में बीई/बीटेक) की आवश्यकता होगी। इंजीनियरिंग में डिग्री लेने या एमएससी करने या बायोकेमिस्ट्री, बायोफिजिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, सिरामिक्स, केमिस्ट्री, इलेक्ट्रॉनिक्स, एर्गोनॉमिक्स, मटीरियल साइंस, मैथेमेटिक्स, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, फिजिक्स तथा फिजियोलॉजी में समकक्ष या एमबीबीएस डिग्री या ऑक्यूपेशनल साइकोथैरेपी की डिग्री या बीडीएस के बाद आप में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग को विशेष विषय के तौर पर चुन सकते हैं। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के अध्ययन में जीवविज्ञान, चिकित्सा, व्यवहार और स्वास्थ्य का अध्ययन करने के लिए फिजिकल, केमिकल, मैथेमेटिकल और कम्यूटेशनल साइंसेज और इंजीनियरिंग के सिद्धांतों का समावेश होता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में करिअॅर बनाने के लिए आप में जीव विज्ञान की व्यवस्थाओं और शदावली के कार्य की समझ के साथ साथ अनुसंधान के प्रति भी रुचि होनी चाहिए। अच्छा संवाद कौशल भी जरूरी है, क्योंकि बायोमेडिकल इंजीनियर चिकित्सा, तकनीकी और अन्य पृष्ठभूमि के पेशेवरों को आपस में जोड़ता है।
आप काम कहां करेंगे
बायोमेडिकल इंजीनियर और टेक्नोलॉजिस्ट के लिए वैश्विक उद्योगों के विस्तृत क्षेत्र में रोजगार के कई अवसर उपलब्ध हैं, जिनमें आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं, अस्पताल, चिकित्सकीय उपकरण निर्माता इकाइयां, औद्योगिक फर्मे, शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थान, दवा निर्माता, सरकारी नियामक एजेंसियां आदि शामिल हो सकती हैं। अस्पतालों में इन्हें फिजीशियन, नर्स, थैरेपिस्ट और तकनीकी कर्मियों जैसे स्वास्थ्य सेवा में लगे प्रोफेशनल्स के साथ काम करना होता है। ये कस्टमाइज्ड उपकरणों का विकास करते हैं और चिकित्सकीय यंत्रों का चुनाव करने, चलाने और सार संभाल करने संबंधी सलाह उपलध करवाते हैं। उद्योगों में बायोमेडिकल इंजीनियर नए साधन डिजाइन करने और उन्हें परखने के लिए जीवन व्यवस्था और प्रौद्योगिकी के अपने ज्ञान का उपयोग करते हैं। सरकारी महकमों में इन्हें उत्पाद की टेस्टिंग के साथसाथ उपकरणों के सुरक्षा मापदंड भी तय करने होते हैं। बायोमेडिकल इंजीनियर्स की मांग चिकित्सा संबंधी अनुसंधान करने वाली संस्थाओं में भी होती है। इन्हें चिकित्सकीय उपकरणों का निर्माण करने वाली कंपनियों के मार्केटिंग विभाग में तकनीकी सलाहकार के रूप में भी नियुक्त किया जाता है। कम्प्यूटर की सहायता से की जाने वाली सर्जरी और मॉलिक्यूलर, सेल्यूलर तथा टिश्यू इंजीनियरिंग में होने वाले व्यापक अनुसंधान के अलावा तेजी से पनप रहे पुनर्वास और हड्डी संबंधी रोगों के उपचार के क्षेत्र में भी बायोमेडिकल इंजीनियर्स की सेवाओं की आवश्यकता होती है।
बायोमेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) के क्षेत्र में अवसरों में बढ़ोतरी हो रही है, भारत और विदेशों में मौजूद सरकारी एजेंसियों और अनुसंधान संस्थानों में तथा विश्वविद्यालयों में अनुसंधान के उन्नत कार्यो को करने के लिए इनकी आवश्यकता होती है। ये प्रयोगशालाओं और उपकरणों का निरीक्षण करते हैं और अन्य अनुसंधानकर्ताओं के साथ अनुसंधान के कार्यो में भागीदारी निभाते हैं। सीमेन्स, जीई हेल्थकेयर, बीपीएल, लार्सन एंड टूब्रो, विप्रो और ऐसी कई और कंपनियां अपने आर एंड डी विभाग में या सेल्स और मार्केटिंग विभाग में बायोमेडिकल इंजीनियर्स को उनके कौशल और वरीयता के आधार पर नियुक्त करती हैं।
इस क्षेत्र में शुरुआती वेतन निर्भर करता है कार्यक्षेत्र पर, कंपनी और संस्थान पर और आपकी योग्यता पर। जो निजी अस्पतालों और क्लिनिक में कार्य कर रहे हैं वे 15,000 से 25,000 रुपए प्रतिमाह तक कमा सकते हैं। अनुसंधान तथा शिक्षण संस्थानों में वेतन 20,00040,000 रुपए प्रतिमाह हो सकता है वहीं चिकित्सकीय उपकरण निर्माता कंपनी में आप 20,000 रुपए से ज्यादा वेतन पा सकते हैं जो कि आपकी योग्यता के स्तर पर निर्भर करता है। यह बेहद ही चुनौती भरा करिअर है, क्योंेकि एक बायोमेडिकल इंजीनियर को डॉक्टरों और परामेडिकल स्टाफ के साथ स्वास्थ्य की जिम्मेदारी साझा करनी होती है। आने वाले समय में जैसेजैसे स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधुनिकीकरण होगा विशेषीकृत चिकित्सकीय यंत्रों, कम्प्यूटरीकृत उपकरणों क्लीनिकल टेक्नोलॉजी, ऑर्थोपेडिक हार्डवेयर या संक्षेप में कहें तो मरीजों के जीवन स्तर में सुधार लाने वाले उपकरणों पर निर्भरता में भी इजाफा होगा।
बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के कुछ उभरते हुए क्षेत्र हैं बायोमैस, जीनॉमिक्स, माइक्रो और नैनो टेक्नोलॉजी, प्रोटीओमिक्स, सर्जरी में रोबोटिक्स, टेलीमेडिसिन आदि। अगले 25 वर्षो में इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑप्टिक्स, मटीरियल्स और मिनिएचराइजेशन में आधुनिकीकरण से रोगों की पहचान करने और उपचार करने की विधियों जैसे कि इमेजिंग और वर्चुअल सर्जरी में ज्यादा उन्नत किस्म के उपकरणों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।






