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सुरक्षित भविष्य के लिए स्पेशलाइज्ड MBA

dainikbhaskar.com | Nov 15, 2012, 15:23PM IST
सुरक्षित भविष्य के लिए स्पेशलाइज्ड MBA
शलाइजेशन किसी भी सामान्य डिग्री को खास बना सकता है, खासतौर पर एमबीए को। आईआईएम शिलॉन्ग के डीन एकेडमिक्स एचएस छाबड़ा के अनुसार, स्पेशलाइजेशन डिग्री को वÊानदार बनाता है। यही वजह है कि स्पेशलाइज्ड एमबीए अब अत्यधिक मांग में है। ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन काउंसिल (जीमैक) एप्लीकेशन ट्रेंड्स सर्वे भी इस बात की पुष्टि करता है। असल में विशेषज्ञता युक्त पढ़ाई न केवल रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी करती है, बल्कि नियोक्ता भी इसे पसंद करते हैं। हालांकि सामान्य एमबीए प्रोग्राम अभी भी महत्वपूर्ण है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सेक्टर विशेष की विशेषज्ञता पेशेवर दौड़ में आगे बनाए रखती है। स्पेशलाइजेशन सेक्टर विशेष की बारीक समझ से जुड़ा होता है। यही वजह है कि सामान्य एमबीए की तुलना में स्पेशलाइज्ड एमबीए की इंडस्ट्री रेडी नॉलेज नियोक्ताओं को खासतौर पर पसंद आती है। साथ ही अच्छी बात यह भी है कि स्पेशलाइजेशन में अब नए विकल्प भी शामिल हो गए हैं। पारंपरिक क्षेत्र जैसे फाइनेंस और एचआर के अलावा फॉरेस्ट और इन्वाइरॅनमेंट मैनेजमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट, स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट, मटीरिअॅल्स मैनेजमेंट, टेक्सटाइल मैनेजमेंट, फैशन मैनेजमेंट जैसे स्पेशलाइज्ड कोर्स छात्रों के पोर्टफोलियो को दमदार बना रहे हैं।
 
फॉरेस्ट एंड इन्वाइरॅनमेंट मैनेजमेंट
 
फॉरेस्ट मैनेजमेंट फॉरेस्ट्री का एक हिस्सा है, जो वनों के समूचे आर्थिक, प्रशासनिक, कानूनी और सामाजिक पक्षों को देखने के साथ ही वैज्ञानिक व तकनीकी जानकारियों के माध्यम से वनों की वृद्धि व संरक्षण का काम करता है। इसके तहत वनों का विकास, पेड़ों की मापतौल, सुरक्षा, प्राकृतिक व अन्य संसाधनों को व्यवस्थित करने का काम भी आता है। इन्वाइरॅनमेंट मैनेजमेंट, मैनेजमेंट का वह हिस्सा है, जो डिजाइनिंग का अध्ययन करता है और पर्यावरण के अनुकूल नीतियों, नियमों और कार्यक्रमों को लागू करता है। प्रदूषण का अध्ययन करना और उनके नियंत्रण के लिए मैनेजमेंट मैथेडोलॉजी को विकसित करने का काम भी यह शाखा करती है। फॉरेस्ट मैनेजमेंट पेशेवरों के लिए इस क्षेत्र में बहुत से अवसर उपलब्ध हैं। संबंधित पेशेवर वन्यजीव व वन विभाग जैसे सरकारी क्षेत्रों में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं, वनों की उन्नति और मिट्टी के संरक्षण के लिए काम करने वाले एनजीओ से जुड़़ सकते हैं। वृक्षारोपण से जुड़े व्यावसायिक घरानों से जुड़ सकते हैं। इसके अलावा ये पेशेवर नेशनल ज्योग्राफिक, डिस्कवरी आदि चैनलों में काम कर सकते हैं या अपनी खुद की कंसल्टेंसी खोल सकते हैं। इन्वाइरॅनमेंट मैनेजमेंट ग्रेजुएट सरकारी और निजी संगठनों में प्लांट इंचार्ज, इन्वाइरॅनमेंटल प्लानर, कंसल्टेंट, कॉऑर्डिनेटर, ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी डायरेक्टर, इन्वाइरॅनमेंट प्रोग्राम विशेषज्ञ, इन्वाइरॅनमेंट रिसर्च मैनेजर व ग्राउंडवाटर प्रोजेक्ट मैनेजर, इन्वाइरॅनमेंटल सस्टेनेबिलिटी एनालिस्ट आदि पदों पर नियुक्त हो सकते हैं। यहां इन पेशेवरों का काम नए संयंत्रों के लिए पर्यावरण से संबंधित सभी इन्वाइरॅनमेंट फ्रेमवर्क, नियमों और कानूनों को सही तरीके से लागू करना होता है।
 
यहां से करें पढ़ाई
 
अन्नामलाई विश्वविद्यालय, चिदंबरम
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून
गीतम विश्वविद्यालय, विशाखापट्टनम
गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, भोपाल
पुणो विश्वविद्यालय, पुणो
संबलपुर विश्वविद्यालय, संबलपुर
 
इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट
 
इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट आधारभूत ढांचे के विकास और प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं की देख-रेख करता है। पानी, दूरसंचार, बिजली और परिवहन सेवाओं (जो अर्थव्यवस्था की वृद्धि और विकास को आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं) की निर्बाध आपूर्ति का काम इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजर की जिम्मेदारी होती है। इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट पेशेवरों के लिए कंस्ट्रक्शन कंपनी, आईटी कंपनी, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर, कंसल्टेंट, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट आदि में अनेकों अवसर मौजूद हैं, जहां ये कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट मैनेजर, एस्टेट मैनेजर, फाइनेंस व अकाउंटिंग मैनेजर, फैसिलिटी मैनेजर, प्रॉपर्टी मैनेजर, इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी मैनेजर (रियल एस्टेट), प्रोजेक्ट कंसल्टेंट, मर्जर व एक्विजिशन मैनेजर के पदों पर नियुक्त हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, इन पेशेवरों के लिए अनेकानेक तकनीकी मौके भी उपलब्ध होते हैं। साथ ही इन्हें कंस्ट्रक्शन टीम का हिस्सा होने का अवसर भी मिलता है।
 
यहां से करें पढ़ाई
 
एकेडमी ऑफ मेरिटाइम एजुकेशन एंड ट्रेनिंग, कनाथूर, तमिलनाडु
सेंटर फॉर इन्वाइरॅनमेंटल प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद
ईमाइंड टेक्नोलॉजीज, बेंगलुरु
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट एंड रिसर्च, हैदराबाद, मुंबई
स्कूल ऑफ मैनेजमेंट फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट स्ट्रैटेजीज, बेंगलुरु
सेलाक्युइ इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, नई दिल्ली
 
स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट
 
स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट क्रॉस फंक्शनल निर्णय के मूल्यांकन, उसे लागू करना और उसके फॉमरुलेशन का क्रम निर्धारित करने से जुड़ा है। स्ट्रैटेजी फॉमरुलेशन में स्ट्रैटेजी सिंथेसिस, इंटेंट और थिंकिंग रोल की प्रक्रिया के ऊपर एक पेशेवर का पूरा ध्यान केंद्रित होता है। अपनी रणनीतियों को सही तरीके से लागू करने के लिए स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट के नवीनतम ट्रेंड जैसे रणनीति तैयार करने और उसे लागू करने के तरीकों में विभिन्नता लाने आदि को प्रमुखता देना एक पेशेवर की जिम्मेदारी होती है। पेशेवरों के लिए यह क्षेत्र अपार संभावनाओं से भरा है। कॉपरेरेट गवर्नेस, ऑर्गनाइजेशन डिजाइन, स्ट्रैटेजिक इम्प्लॉइमेंटेशन, कंपनी स्ट्रैटेजी, मैनेजमेंट व एडमिनिस्ट्रेशन, मैनेजमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी आदि अनेक ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पेशेवर चीफ एग्जीक्यूटिव, स्ट्रैटेजिक मैनेजर, जनरल मैनेजर, स्ट्रैटेजिक आईटी कंसल्टेंट, सीनियर स्ट्रैटेजिक प्लानर, बिजनेस प्रोसेस एनालिस्ट के तौर पर काम कर सकते हैं। 
 
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गीतम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस, विशाखापट्टनम
भारतीय प्रबंधन संस्थान, कोझीकोड
 
मटीरिअॅल्स मैनेजमेंट
 
बिजनेस लॉजिस्टिक्स का एक अंग है, जो उत्पाद के स्थापन और व्यापार का निरीक्षण करता है। इसके तीन  भाग हैं, स्पेयर पार्ट्स, क्वालिटी कंट्रोल और इंवेन्ट्री मैनेजमेंट। एक मैनेजर का काम उत्पादों की कैंपस प्लानिंग और उनके डिजाइन तैयार करने से शुरू होता है। एक मैनेजर को कंपनी को सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी प्रकार के उपकरणों, कच्च माल और दूसरी अन्य सामग्रियों की आपूर्ति, उनके रख-रखाव, उन्हें लक्ष्य तक सही तरीके से पहुंचाने आदि सभी काम देखने होते हैं। इन पेशेवरों को पर्सनल, इंवेन्ट्री, स्टोरेज स्पेस और उपभोक्ताओं की मांग का भी ध्यान रखना होता है। इतना ही नहीं, उत्पाद के साथ डॉक्यूमेंटेशन और संबंधित विभाग के लिए बजट भी तैयार करना होता है। आज के इस दौर में मटीरिअॅल्स मैनेजमेंट पेशेवर के लिए मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर मेडिकल सप्लाई तक सभी कंपनियों में असीमित रोजगार के अवसर उपलध हैं। रक्षा, रेलवे, सार्वजनिक परिवहन आदि सरकारी क्षेत्र के परचेजिंग, स्टोरिंग व सप्लाई विभाग आदि में ये नियुक्त हो सकते हैं या व्यावसायिक घरानों, सप्लाई चेन उद्योग, निजी ट्रांसपोर्टरों आदि के साथ जुड़कर काम कर सकते हैं।
 
यहां से करें पढ़ाई
 
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मटीरिअॅल्स मैनेजमेंट, मुंबई
 बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, पुणो
 
टेक्सटाइल मैनेजमेंट
 
टेक्सटाइल मैनेजमेंट, मैनेजमेंट की वह शाखा है, जो क्लॉथिंग और अपारेल के तैयार होने और उसके प्रबंधन का काम संभालने के साथ ही, टेक्सटाइल फैब्रिक के उत्पादन का काम भी देखती है। टेक्सटाइल मैनेजर टेक्सटाइल मैनेजमेंट विशेषज्ञ होता है, जिसकी जिम्मेदारियां संगठन के आकार और प्रकार के ऊपर निर्भर करती हैं। वह आमतौर पर टेक्सटाइल फैब्रिक के उत्पादन, क्लॉथिंग मार्केट का अध्ययन और उत्पादों के विकास के प्रबंधकीय पक्ष से जुड़ा होता है। इसके अतिरिक्त उसका काम रिसर्च परियोजनाओं में शामिल होना और क्लॉथिंग स्टोर्स आदि के बिक्री प्रयासों में सहभागिता निभाना होता है। टेक्सटाइल उद्योग विश्व के सबसे तेजी से विकसित होते उद्योगों में से एक है। जहां तक भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की बात है तो यह कृषि के बाद सबसे बड़ा उद्योग है। यहां मैनेजमेंट पेशेवर के लिए टेक्सटाइल मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर मार्केटिंग तक सभी जगह असीमित संभावनाएं हैं। एक मैनेजमेंट पेशेवर टेक्सटाइल मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट, कंपनी आउटलेट, टेक्सटाइल शोरूम, मार्केट रिसर्च फर्म, रिटेल कंपनी, क्लॉथिंग स्टोर, शॉपिंग कॉपलेक्स आदि में बतौर प्लांट मैनेजर, सेल्स रिप्रेजेंटेटिव, एग्जीक्यूटिव एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, डायरेक्टर ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट, मार्केट ऑपरेशंस डायरेक्टर, असिस्टेंट स्टोर मैनेजर, रिसर्चर आदि पदों पर नियुक्त हो सकता है।
 
यहां से करें पढ़ाई 
 
सरदार बल्लभभाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइल मैनेजमेंट, कोयंबटूर
डॉ. बी. आर. अंबेडकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जालंधर
इंडियन मैनेजमेंट स्कूल एंड रिसर्च सेंटर, नवी मुंबई
अपारेल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, गुड़गांव
एथॉस कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट, पुणो
 
फैशन मैनेजमेंट
 
फैशन मैनेजमेंट, मैनेजमेंट की एक नई शाखा है, जिसके तहत उत्पाद की मार्केटिंग, मर्केडाइजिंग, मैन्यूफैक्चरिंग और मैनेजमेंट से संबंधित काम को इस तरह से व्यवस्थित किया जाता है कि शुरुआती कॉन्सेप्ट से लेकर उत्पाद के तैयार होने और खुदरा बिक्री तक का काम निर्बाध रूप से चल सके। इसके तहत काम करते हुए एक फैशन मैनेजर को फैशन कोऑर्डिनेशन, मैनेजमेंट और प्रमोशनल एक्टिविटी सहित कई सारे दायित्व निभाने होते हैं। कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम करते हुए एक पेशेवर को पूरे फैशन डिजाइन डिपार्टमेंट का निरीक्षण करना होता है। किसी खास फैशन लाइन के मार्केटिंग और प्रमोशन को सफल बनाने के लिए एकरूप और संगठित फैशन माहौल को बनाए रखना भी एक फैशन मैनेजर की ही जिमेदारी होती है। इसके अलावा, नए फैशन प्लान और कॉन्सेप्ट तैयार करना, एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग गतिविधियों को उपयुक्त तरीके से कोऑर्डिनेट करना, नए आइडिया के लिए फैशन शो में शामिल होना, मैन्यूफैक्चरिंग और मर्केडाइजिंग मार्केट का दौरा करना आदि कई सारी जिमेदारियां एक फैशन मैनेजमेंट पेशेवर के कार्यक्षेत्र का हिस्सा होती हैं। मैनेजमेंट की नई शाखा होने के बावजूद फैशन मैनेजमेंट पेशेवरों के लिए यहां करने को कई प्रकार के काम हैं। अपारेल मैन्यूफैक्चरर, डिजाइनर, होलसेलर, इंपोर्टर, रिटेलर इन सभी को फैशन मैनेजमेंट पेशेवर की जरूरत होती है, जहां पेशेवर प्रॉडक्ट डेवलपर, फैशन बायर, प्रॉडक्शन मैनेजर, क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर, कॉस्टिंग एनालिस्ट, वर्क मेजरमेंट इंजीनियर, परचेजिंग एजेंट, विजुअल मर्केडाइजर, स्टोर मैनेजर और ट्रांसपोर्टेशन/ डिस्ट्रीयूशन मैनेजर के तौर पर काम कर सकते हैं।
 
यहां से करें पढ़ाई
 
एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन एंड डिजाइन, बेंगलुरु
 नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइन
द नॉदर्न इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, मोहाली
स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, पुणो
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
जे डी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
 
एनर्जी मैनेजमेंट
 
ऊर्जा के इस्तेमाल और उसके व्यय को कम करना, ऊर्जा की उत्पादकता बढ़ाना और काम का एक बेहतर माहौल तैयार करना ही एनर्जी मैनेजमेंट है। ऊर्जा की खपत कहांकहां और कैसे होती है, इसे समझकर इसका सही तरीके से प्रबंधन करना ताकि ऊर्जा का व्यवस्थापन सही तरीके से हो सके, इस मैनेजमेंट का उद्देश्य है और इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक मैनेजमेंट पेशेवर को ऊर्जा खपत की भविष्यवाणी करना, लोड शिड्यूलिंग करना, ऊर्जा उत्पादन करना, बिजली की खरीद और बिक्री की व्यवस्था करना, पीक लोड व एनर्जी बैलेंस पर नियंत्रण करना आदि सभी काम करने होते हैं।
एनर्जी मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद एक पेशेवर के लिए सरकारी के साथ निजी उद्योग जगत में भी रोजगार के बहुत से अवसर खुल जाते हैं। एक पेशेवर यदि चाहे तो वह रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल, हाउसिंग, रियल एस्टेट व कंस्ट्रक्शन, सीमेंट, फॉर्मास्यूटिकल, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्यूफैक्चरिंग, केमिकल, हॉस्पिटैलिटी, ऑटोमोबाइल, माइनिंग, फूड प्रोसेसिंग, आयरन व स्टील आदि क्षेत्रों में प्लांट मैनेजर, असिस्टेंट मैनेजर, प्रॉडक्ट मैनेजर, सर्वेयर आदि पदों पर काम कर सकते हैं।
 
यहां से करें पढ़ाई
 
मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, गुड़गांव
नेशनल पावर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, फरीदाबाद
राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, नोएडा
थापर विश्वविद्यालय, पटियाला
एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा
 
इंश्योरेंस मैनेजमेंट
 
मैनेजमेंट का यह क्षेत्र ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं के जीवन व उनके सामान की रक्षा के लिए उन तक बीमा पॉलिसी पहुंचाने का काम करता है। बीमित व्यक्ति समय पर अपने प्रीमियम का भुगतान करे, जिससे उसके, कंपनी के और कर्मचारियों के हितों की रक्षा हो सके, इंश्योरेंस मैनेजमेंट का प्रमुख दायित्व होता है। इंश्योरेंस कंपनी के लिए काम करते हुए एक इंश्योरेंस मैनेजर बीमा पॉलिसियों को बेचने और लोगों को प्रेरित करने के लिए सर्वश्रेष्ठ लोगों का चुनाव करता है। प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए वह यथासंभव प्रयास करता है, विाीय घाटे के खतरों को कम करता है, बीमा पॉलिसियों और खर्च होने वाली राशियों के ऊपर नियमित निगरानी रखता है। इसके साथ ही संपिा या स्वास्थ्य से जुड़े बीमा दावों की ाोजबीन करता है। जरूरत पड़ने पर उपभोक्ताओं से सीधा संपर्क बनाना आदि बहुत सी जिमेदारियां हैं, जो एक मैनेजर को निभानी पड़ती हैं। 
 
बतौर डेवलपमेंट ऑफिसर, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, एक्चूएरी, अंडरराइटर, असिस्टेंट मैनेजर, कंपोजिट एजेंट, सेल्स रिप्रेजेंटेटिव, कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव ये पेशेवर किसी भी इंश्यारेंस फर्म से जुड़ सकते हैं। 
 
यहां से करें पढ़ाई
 
आशुतोष महाराज कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, मयूरभंज
बॉबे इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई
ब्रrानंद इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, गुड़गांव
फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, नई दिल्ली
इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, नागपुर
कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल सोशल साइंसेज, सुल्तानपुर
 
ऑयल एंड गैस मैनेजमेंट
 
ऑयल व गैस मैनेजमेंट मैनेजमेंट का वह हिस्सा है जो लॉजिस्टिक्स व सप्लाई, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्टेशन और तेल व गैस उद्योग के प्रबंधन को देखता है। इस क्षेत्र में काम करते हुए एक मैनेजमेंट पेशेवर को भविष्य की योजनाएं बनाना व बजट तैयार करना और रिटेल व इंस्टीट्यूशनल सेल्स का प्रबंधन करना होता है। साथ ही वर्तमान व नए प्रॉडक्ट कॉन्सेप्ट के ऊपर मार्केट फीडबैक तैयार करना, सेल्स व मार्केटिंग एक्टिविटी रिपोर्ट व फीडबैक तैयार करना, प्रतिस्पद्र्धी की गतिविधियों की निगरानी करना, संगठन की नीतियों व नियमों के अनुसार भर्तियां करना, कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना आदि अनेक ऐसे दायित्व हैं, जो इस क्षेत्र से जुड़े मैनेजमेंट पेशेवर को निभाने होते हैं। 
 
ऑयल व गैस उद्योग वैश्विक स्तर पर रोजगार देने वाला क्षेत्र है। जहां तक संभावनाओं का सवाल है तो इस क्षेत्र में अनेकों संभावनाएं व करिअॅर विकल्प मौजूद हैं, जिन्हें अपनाया जा सकता है। तेल और गैस ऊर्जा का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसके प्रबंधन की जिमेदारी भी बहुत महत्वपूर्ण होती है और जिस तरह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की मांग बढ़ रही है, उसके उचित प्रबंधन के लिए इस क्षेत्र को कुशल मैनेजमेंट पेशेवरों की बहुत ज्यादा जरूरत है। एक मैनेजमेंट पेशेवर संबंधित कंपनी में काम करते हुए लैब सुपरवाइजर, बिजनेस एनालिस्ट, असिस्टेंट मैनेजर, मेंटेनेंस मैनेजर, एनर्जी कंसल्टेंट, फील्ड मटीरिअॅल्स कोऑर्डिनेटर आदि पदों पर नियुक्त हो सकता है।
 
यहां से करें पढ़ाई
 
स्कूल ऑफ पेट्रोलियम मैनेजमेंट, गांधीनगर
स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज, वाराणसी
यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज, दिल्ली
यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एनर्जी स्टडीज, देहरादून
 
मीडिया मैनेजमेंट
 
मैनेजमेंट का यह क्षेत्र कयुनिकेशन मैनेजमेंट के नाम से भी जाना जाता है। मीडिया मैनेजमेंट का काम अकाउंट प्लानिंग व मैनेजमेंट/ ब्रांड मैनेजमेंट, मीडिया प्लानिंग व मैनेजमेंट और मार्केट रिसर्च करना है। एक मीडिया मैनेजर की जिमेदारी प्रभावकारी मीडिया डील करना, अनूठे मीडिया बाइंग अवसरों की पहचान करना, समारोह के अवसर पर वेंडर से सीधी बातचीत करना, नवीन व रणनीतिक विचारों से लैस मीडिया प्रोग्राम बनाना, मीडिया के लिए बजट तैयार करना, अपनी आधिकारिक योजनाओं का सही तरीके से निर्वाह करना, ऑर्डर खरीदना और मीडिया का भुगतान करना और मीडिया मार्केट प्लेस की निगरानी करना होता है। इतना ही नहीं, उसकी जिमेदारियों के तहत मीडिया से जुड़ी नीतियों को तैयार करते समय मार्केटिंग मैनेजमेंट को सलाह देना भी आता है ताकि अधिकतम प्रभाव को सुनिश्चित किया जा सके। एक मैनेजर को मार्केट रिसर्च, एजेंसियों, ब्रांड टीम के साथ मिलकर काम करना होता है, ताकि संबंधित संगठन बाÊार की प्रतिस्पर्धा में आगे निकल सके। मीडिया मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद एक पेशेवर के लिए रेडियो, प्रिंट जर्नलिज्म, पिलशिंग, पिलक रिलेशन, रिसर्च, एडवरटाइजिंग व टेलीविजन जगत में काम के असीमित अवसर मौजूद हैं। इस क्षेत्र में काम करते हुए एक पेशेवर डिजिटल प्रॉडक्शन मैनेजर, ऑनलाइन कंटेंट मैनेजर सहित बहुत से तकनीकी पदों से जुड़कर काम कर सकता है।
 
यहां से करें पढ़ाई
 
 
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर
 
मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मनिपाल
 
हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, चेन्नई
 
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, गांधीनगर
 
ग्लोबल स्कूल ऑफ बिजनेस, दिल्ली
 
इंस्टीट्यूट ऑफ मास कयुनिकेशन फिल्म एंड टेलीविजन स्टडीज, कोलकाता
 
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