साउंड इंजीनियरिंग में कॅरियर
dainikbhaskar.com
| Sep 12, 2012, 16:16PM IST

साउंड इंजीनियरिंग क्या है?
साउंड इंजीनियर सपाट आवाज को खूबसूरत बनाता है और गीत के ठहराव और गति को नियंत्रित करता है,‘संदेशे आते हैं’ और ‘कहो ना प्यार है’ जैसे गीतों को अपनी साउंड इंजीनियरिंग कला से निखारने वाले साउंड इंजीनियर सतीश गुप्ता कहते हैं। साउंड इंजीनियरिंग में इलेक्ट्रॉनिक और मैकेनिकल उपकरणों का उपयोग होता है जिनके माध्यम से आप रिकॉर्डिंग, कॉपीइंग, मिक्सिंग और किसी भी आवाज की फिर से रिकार्डिग कर सकते हैं। दरअसल एक साउंड इंजीनियर साउंड को रिकॉर्ड करने के लिए कई तरह के उपकरणों का उपयोग करता है। इलेक्ट्रॉनिक मिक्सिंग बोर्ड (कॉनसोल बोर्ड), जिसमें कई तरह के बटन, डायल्स, लाइट्स और मीटर्स शामिल होते हैं, ऑडियो इंजीनियरिंग के महत्वपूर्ण भाग हैं। गुप्ता के मुताबिक यह कला एक प्रकार से अभियांत्रिकी है, जिसके लिए वे नवीनतम ऑडियो उपकरणों और कप्यूटर सॉटवेयर्स का उपयोग करते हैं, लेकिन इस क्षेत्र के विशेषज्ञ कहते हैं कि सफलता के लिए आपके अंदर जुनून और कुछ कर गुजरने का जज्बा होना आवश्यक है।
तो ऐसा क्या हो आपमें?
एक अच्छा साउंड इंजीनियर बनने के लिए आपमें संगीत के प्रति रुझान और उसकी समझ होना आवश्यक है। सबसे खास बात है कि आपको आवाज यानी विभिन्न तरह की ध्वनियों को पहचानने और उनका विभिन्न संदर्भो में उपयोग करने का हुनर बहुत ही जरूरी है, क्योंकि एक अच्छा साउंड इंजीनियर बनने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण और आधारभूत आवश्यकता है। इसके अलावा घंटों काम करने की क्षमता, धैर्य, एकाग्रता और टीम में काम करने की योग्यता भी होनी चाहिए। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता ऑडियो इंजीनियर सुभाष साहू के मुताबिक इस क्षेत्र में कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी है। यहां जितनी आप मेहनत करेंगे उतनी सफलता मिलती जाएगी।
क्या करना पड़ता है?
साउंड इंजीनियर अपना कार्य दो स्तरों पर करता है। प्रॉडक्शन स्तर पर और दूसरा पोस्ट प्रॉडक्शन स्तर पर। प्रॉडक्शन लेवल पर साउंड इंजीनियर का कार्य मैकेनिकल व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के द्वारा तरहतरह की आवाजें बनाना तथा उन्हें रिकॉर्ड करना होता है। पोस्ट प्रॉडक्शन लेवल पर उन्हें एडिट व मिक्स करके साउंड को तराशा जाता है और ऐसा साउंड तैयार किया जाता है जो वास्तविक और कर्णप्रिय लगे।
एक तरह से देखा जाए तो साउंड इंजीनियरिंग में साउंड रिकॉर्डिग, एडिटिंग एवं मिक्सिंग के तकनीकी एवं रचनात्मक पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया जाता है। इसमें अधिकतर कोर्स की शुरुआत ही साउंड एवं रिकार्डिग, पोस्ट प्रोडक्शन एवं ब्रॉडकास्टिंग की आधारभूत थ्योरी से की जाती है। कोर्स के बाद छात्र रिकॉर्डिग टूल्स, माइक्रोफोन के प्रयोग के बारे में अच्छी तरह से वाकिफ हो जाते हैं। इसके अलावा ऑडियो राइटिंग, इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक, साउंड रिकॉर्डिग, म्यूजिक बिजनेस, मल्टीट्रैक प्रॉडक्शन आदि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें साउंड इंजीनियरिंग के तहत शामिल किया जाता है। इस क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए आपको ऑडियो टेक्नोलॉजी और उपकरणों के बारे में लगातार अपडेट होते रहना आवश्यक है।
आप क्या बन सकते हैं?
साउंड इंजीनियरिंग में पाठ्यक्रम करने के बाद आप शुरुआती स्तर पर यूजिक प्रोग्राम या डीजे प्रोजेक्ट, एफएम या कयुनिटी रेडियो, होम स्टूडियो में मिक्सिंग और रिकॉर्डिग जैसे कार्यो से जुड़ सकते हैं। इसके अलावा आप निम्नलिखित बन सकते हैं।
स्टूडियो इंजीनियर : एक स्टूडियो इंजीनियर साउंड रिकॉर्ड करने से लेकर आवाज को निखारना, दृश्यों के साथ मिलान करना जैसे कार्य करता है।
ब्रॉडकास्ट इंजीनियर: ब्रॉडकास्ट से जुड़े उपकरणों की देखभाल करता है।
साउंड एडिटर: साउंड एडिटर डायलॉग एडिटर, म्यूजिक एडिटर एवं साउंड इफेक्ट एडिटर तीनों का काम देखता है।
म्यूजिक एडिटर: म्यूजिक ट्रैक को एडिट और रिफाइन करता है।
साउंड इफेक्ट एडिटर: यह साउंड इफेक्ट को अंतिम रूप देने के प्रति।
मििसंग इंजीनियर: मिक्सिंग इंजीनियर किसी भी संगीत को अंतिम रूप देते हैं। साथ ही यह विभिन्न रिकॉर्डिग ट्रैक को एक रूप में मिलाते हैं, जिससे वह अपना प्रभाव छोड़ सकें।
रिकॉर्डिग इंजीनियर: इनका कार्य मुयत: प्रमुख उपकरणों जैसे माइक्रोफोन, मिक्सर, हेडफोन आदि को सेट करना होता है।
साउंड डिजाइनर: फिल्म, एलबम, विज्ञापन की प्रस्तुति के साउंड को डिजाइन करने और दृश्यों के साथ उनका मिलान करने का काम करता है।
साउंड डिजाइनर: साउंड डिजाइनर का काम साउंड ट्रैक को डिजाइन करना और फिल्म, यूजिक और परफॉर्मेस आदि के सभी नॉन कम्पोजिशनल एलीमेंट को कवर करना है। प्रस्तुति- हरिकृष्ण उपाध्याय






