नए साल की शुरुआत हो चुकी है। और सारे धमाल भी खत्म हो चुका है। अब तो बस सामने हैं एक्ज़ाम्स!
अरे, डरने की कोई बात नहीं। अभी तो थोड़ा समय है और अगर आप बाल भास्कर में प्रकाशित हो रहे एक्ज़ाम्स की तैयारी वाले लेखों को गौर से पढ़ रहे होंगे, तब तो डरने की कोई बात रह भी नहीं जाएगी। इस बार हमने टीचर जी के कोने में बात की है खुद का टेस्ट लेने की। यह ऐसा एक्ज़ाम है, जिसमें टीचर भी आप हैं और जांचकर्ता भी। जितने चाहिए नम्बर ले लीजिए। लेकिन आप खुद देखिएगा कि जैसा पेपर किया होगा, नम्बर भी वैसे ही दे पाएंगे आप। तो जनाब, मुद्दा यह है कि पेपर अच्छे दीजिए, नम्बर तो अच्छे आ ही जाएंगे। और अच्छे पेपर मतलब अच्छी तैयारी। लीजिए, बात फिर वहीं आ गई। चलिए, ब्रेक लेते हैं और छत पर चलते हैं पतंग उड़ाने। टेंशन कम हो जाएगा और मज़ा भी आएगा। इस मौसम का तकाज़ा भी तो है।
मौसम के तकाज़े से याद आया, अब बहुत जल्दी फेयरवेल्स शुरू हो जाएंगे। 12वीं के बच्चों को 11वीं वाले विदा कहेंगे। बड़े भावुक क्षण होते हैं ये और ढेर सारी यादें बटोर लेने का मौका भी। अगर आप इन क्लासेज़ में नहीं भी हैं, तो भी इन सीनियर दोस्तों से बात कीजिएगा। बड़ी अच्छी स्लैमबुक्स बनाते हैं कुछ बच्चे। अपने साथियों को बढ़िया-बढ़िया संदेश लिखकर देते हैं और मज़ेदार तस्वीरें भी खिंचवाते हैं।
यादों की बात हुई, तो आपकी तस्वीरें याद आ गईं। कैलेंडर के लिए आपने अपने साथियों यानी ग्रुप के साथ तस्वीर भेज ही दी होगी। अगर अब तक नहीं भेजी है, तो जल्दी से ई-मेल कर दीजिए। हमें फटाक से मिल जाएगी। और आपका ग्रुप छा जाएगा बाल भास्कर के 2012 के कैलेंडर पर। जल्दी कीजिए।