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सेहत का तोहफा

dainikbhaskar.com | Nov 10, 2012, 00:09AM IST
सेहत का तोहफा
करीब 7.8 लाख साल से इंसानी सेहत में सूखे मेवों की भूमिका अहम रही है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली में इनके सेवन के सही तरीकों का महत्व बढ़ गया है। त्योहारों के मौके पर तंदुरुस्ती का उपहार बनने वाले चुनिंदा मेवों के बारे में 
सुधीर गोरे की रिपोर्ट
 
 
जबरदस्त ऊर्जा और भरपूर पोषक तत्वों के कारण हमेशा से ही हमारे खानपान में मेवों की खासी अहमियत रही है। मशहूर स्वास्थ्य पत्रिका साइकोलॉजी टुडे की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक मध्य-पूर्वी देशों के पाषाणकालीन अवशेषों में भी सूखे मेवों के इस्तेमाल के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। भारत में सर्दी के मौसम के आगाज से ठीक पहले, त्योहारी मौसम में तोहफे के रूप में सूखे मेवों के लेन-देन का चलन तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि कई लोग अब मिठाई के विकल्प के रूप में सेहतमंद मेवों पर जोर देने लगे हैं। त्योहारों के अलावा भी सेहत के प्रति बढ़ती जागरुकता की वजह से सूखे मेवे रोजमर्रा के खानपान का हिस्सा बन रहे हैं। मैक्स हेल्थकेयर, दिल्ली की कंसल्टेंट डाइटीशियन चीनू पाराशर के मुताबिक, ‘पिछले कुछ वर्षो में हुई हर नई रिसर्च में सेहत के लिए मेवों के फायदे ज्यादा स्पष्ट होने की वजह से इनका उपयोग काफी बढ़ा है। दिमागी तंदुरुस्ती में मददगार होने की वजह से बादाम और अखरोट का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है।
 
ओमेगा3 की मौजूदगी और इसके फायदे मालूम होने के बाद लोग इनका काफी मात्रा में सेवन करने लगे हैं।’ इसके अलावा, मेवों के सेवन के तरीकों पर भी काफी शोध हुए हैं। दिल्ली की न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. अक्षिता अग्रवाल बताती हैं, ‘सूखे मेवों का सही इस्तेमाल ही इन्हें हमारे शरीर के लिए उपयोगी बनाता है। इनकी कई किस्में हैं और तासीर अलग-अलग है, इसलिए अपनी क्षमता और जरूरत का सही आकलन करते हुए इनका उपयोग जरूरी है।’ खुश्क मेवे वह खाद्य श्रेणी है, जिसमें फलों की गिरी (नट्स) और सूखे हुए फल (ड्राई फ्रूट्स) होते हैं। गिरी, फलों का तैलीय बीज होती है, जैसे बादाम या अखरोट। वहीं सूखे हुए फलों, जैसे किशमिश या अंजीर को प्राकृतिक रूप से या मशीनों के जरिए सुखाकर तैयार किया जाता है।
 
मेवे क्यों खाने चाहिए
 
सेहतमंद आहार में मेवे शामिल करने की वजह है, इनमें एनर्जी और न्यूट्रिएंट्स के अलावा ओमेगा-थ्री फैटी एसिड का होना। जटिल इन्सानी दिमाग की रचना और विकास में ऐसे तत्वों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। आहार विशेषज्ञ जूली बोडनमन के मुताबिक, ‘नई रिसर्च में पाया गया है कि मेवों में फैट (वसा) बहुत ज्यादा होने के बावजूद ये हृदय रोग, मोटापा, डायबिटीज, कैंसर और पार्किंसन्स जैसी कई गंभीर बीमारियों का जोखिम कम करने में मददगार हैं। मेवों के आहार से सोचने और समझने की ताकत में कई तरह से इजाफा होता है।’ प्रोटीन से भरपूर मेवों में फाइबर, न्यूट्रियंट्स, एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन आदि की बहुलता होती है। मेवों में वसा या चर्बी भी अधिक होती है, लेकिन इनमें ज्यादातर ओमेगा-3 फैटी एसिड होने की वजह से यह बुरे कोलेस्ट्रॉल एलडीएल को कम करता है। नोएडा स्थित आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अच्युत त्रिपाठी कहते हैं, ‘मेवे मस्तिष्क एवं शरीर के टॉनिक हैं, जो उन्हें स्वस्थ एवं पुष्ट बनाते हैं। ये कई रोगों के उपचार में भी मददगार होते हैं।’ मेवे को रोजाना आहार में शामिल किया जाए, तो हृदय रोग का खतरा कम हो सकता है। ताजे फलों की ही भांति, मेवों में भी विटामिन (ए, बी1, बी2, बी3, बी6 और फॉलिक एसिड), पैंटोथेनिक एसिड और मिनरल (कैल्शियम, लौह, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटैशियम, सोडियम, ताम्र, मैगनीज, सेलेनियम) होते हैं। डॉ. अग्रवाल कहती हैं, ‘मेवे खाने के बाद पूरे दिन आपको अतिरिक्त कैलोरी लेने की जरूरत नहीं पड़ती।’ हानिकारक मिठास नहीं होने की वजह से मेवे मधुमेह के रोगी और डाइटिंग कर रहे लोगों के लिए भी अच्छे हैं। ये धीरे-धीरे ऊर्जा उत्पन्न करते हैं, जिससे खाना पचाने में शरीर पर भार नहीं पड़ता और खून में ग्लूकोज का स्तर भी सामान्य रहता है। 
 
कितना खाएं, कैसे पचाएं
 
आहार विशेषज्ञ यह सलाह देते रहे हैं कि प्रतिदिन मुट्ठी भर या एक-तिहाई कप विभिन्न प्रकार के मेवे लेने चाहिए। लेकिन डॉ. पाराशर कहती हैं, ‘सब की मुठ्ठी का आकार अलग है। इसके अलावा, कम शारीरिक मेहनत वाली आधुनिक जीवन शैली में मेवों में मौजूद फैट्स को पूरी तरह पचा पाना कई लोगों के लिए संभव नहीं है। ऐसे में हम एक दिन में मेवों के ज्यादा से ज्यादा 10 दाने खाने की सलाह देते हैं।’ विशेषज्ञों का कहना है कि सुबह नाश्ते में तले हुए स्नैक्स, बिस्कुट, केक, नमकीन पदार्थ की जगह सादे मेवे खाने चाहिए। 
 
भोजन के वक्त भी सलाद में कुछ मेवे डालकर खा सकते हैं। दाल, सूप या सब्जियों में कटे हुए मेवों का इस्तेमाल कर सकते हैं। डॉ. त्रिपाठी के अनुसार, अपनी उम्र के मुताबिक रात में भिगो कर 1 से 5 बादाम, 2-3 अंजीर और कुछ किशमिश या मुनक्के दूसरे दिन सुबह खाना सेहत के लिए अच्छा है। 2 से 5 अखरोट, 8-10 काजू और इतने ही पिस्ते भुन कर खाने चाहिए, लेकिन इन्हें तलना या इनमें ज्यादा नमक ठीक नहीं है। मेवों को तलने या भूनने से उनके गुण नष्ट हो जाते हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल बिना तले करें। तवे पर फ्राइंग पेन में एक-दो मिनट के लिए गरम कर लेने से भी ये करारे हो जाते हैं। 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
जरा सावधानी बरतें
मेवे खाना अच्छा है, लेकिन बढ़िया सेहत के लिए शरीर की मशक्कत भी जरूरी है। डॉ. अक्षिता का कहना है, ‘ज्यादातर सूखे मेवों की प्रकृति गरम होती है और ठंडे मौसम में ही इनका सेवन फायदेमंद है। ज्यादा मेवा खाने से पाचन क्रिया भी बिगड़ सकती है।’ डॉ. त्रिपाठी कहते हैं, ‘मेवे के सेवन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि गरम-ठंडी प्रकृति का गलत मेल शरीर के लिए अच्छा नहीं होता। इसके अलावा इनमें नमक मिलाकर प्रयोग करने से इनकी कैलोरी की मात्रा बढ़ती है इसलिए इन्हें बिना नमक के ही प्रयोग करें।’ कुछ बच्चों को मेवे खाने से एलर्जी की समस्या होती है और इनमें से अधिकतर की वजह अखरोट या काजू होते हैं। इनके इलाज में अक्सर देर हो जाती है, इसलिए डॉक्टर से परामर्श जरूरी है। इसके अलावा, सेवन से पहले अच्छे और सेहतमंद मेवों की पहचान करना भी जरूरी है। डॉ. पाराशर के मुताबिक, ‘तैलीय रंग चढ़ने पर मेवा सेहतमंद नहीं रह जाता। स्वाद बिगड़ने पर भी मेवे का सेवन नहीं करना चाहिए।’ मेवे अब समृद्घि की निशानी नहीं, सेहत की जरूरत हैं, आप भी आजमाइए।
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