बड़े काम की भाषाएं!

चूहे के बच्चे खेल रहे थे। तभी बिल्ली आई तो एक चूहे का बच्चा जोर से बोला,‘भौं.भौं.’ यह सुनते ही बिल्ली भाग गई। यह देख छोटा चूहा दूसरे से बोला, ‘देखा दो भाषाएं सीखने का यही फायदा होता है।’
मैनेजर- तुम यहां क्यों सो रहे हो? संटू- यहां सोने पर लोन मिलता है इसलिए।
पापा- गणित में तेरे इतने कम नम्बर क्यों आए? सोनू- पहले दिन मैडम ने कहा कि पांच और तीन आठ होता है। दूसरे दिन कहा छह और दो आठ होते हैं, फिर कहने लगीं कि चार और चार आठ होते हैं। उनको तो खुद ही कुछ नहीं पता। इसलिए तो मेरे कम नम्बर आए।
स्कूल जाते हुए छोटू रो रहा था। पापा- शेर के बच्चे रोते नहीं है। छोटू- शेर के बच्चे तो स्कूल भी नहीं जाते।
पंडित जी ने गोपू एक पेड़ा दिया और कहा.. बेटा, इसे हवन कुंड में डालकर कहो..स्वाहा। गोपू ने पेड़ा मुंह में डाला और बोला..आहा।
एक बार चींटी के ऊपर बैठकर जा रही थी। रास्ते में कच्चा पुल आया। उसे देखकर चींटी हाथी से बोली, ‘पार कर लोगे या मैं उतरूं?’
पप्पू- तुमने आज तक कोई अच्छा काम किया है? गप्पू- हां, आज ही किया है। एक अंकल बस के पीछे भाग रहे थे, जिसे पकड़ नहीं पा रहे थे। इसलिए मैंने अपने डॉगी को छोड़ दिया, तो इतने तेज़ भागे कि बस पकड़ ली उन्होंने।
संटू- गजनी देखने के बाद मुझे अहसास हुआ कि मैं भी आमिर खान हूं। बंटू- यह कैसे? संटू- मैं भी गजनी के आमिर की तरह कुछ भी पढ़ने-लिखने के बाद मैं भी मिनट में भूल जाता हूं।
संजय एक बीमार चीनी दोस्त को देखने अस्पताल गया। उससे मिले तो उनके दोस्त ने तीन शब्द कहे, ‘चिन यू यान’ और खुदा को प्यारा हो गया। संजय बड़े परेशान हुए। वे तुरंत एक चीनी शब्दकोश देखा उस वाक्य का मतलब पता करने के लिए। मतलब पता चला, ‘नामुराद! तू मेरी ऑक्सीजन ट्यूब पर पांव रखे खड़ा है।’






