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भगवान का हिस्सा!

dainik bhaskar.com | Sep 01, 2012, 09:41AM IST
 
 

पोपटलाल- हे भगवान! मुझे कहीं से
भी 100 रुपए दिला दे.. उसमें से 50
रुपए मैं मंदिर में दूंगा।
थोड़ी दूर जाकर पोपटलाल को 50
रुपए मिल गए।
पोपटलाल- वाह भगवान! इतना भी
भरोसा नहीं, अपने पैसे पहले ही काट
लिए।


चंटू और बंटू आपस में बात कर रहे थे।
चंटू- पता है! मैं तो कल चिड़ियाघर
गया था।
बंटू- अरे! मुझे नहीं देखा? मैं भी तो
वहीं था।
चंटू- अच्छा! कौन से पिंजरे में?



टीचर मोनू से- क्या तुम खाने से पहले
भगवान की प्रार्थना करते हो?
मोनू- टीचर जी! उसकी ज़रूरत नहीं।
मेरी मम्मी बहुत अच्छा खाना बनाती है।



रोहित- यार छोटू! आज तू मेरी
जन्मदिन की पार्टी में आ रहा है न!
छोटू- नहीं यार! आज मैं रोमियो और
जूलियट देखने जा रहा हूं।
रोहित- अरे भाई! तो उन्हें भी अपने
साथ लेते आना।



गह्रश्वपू- हा! हा! हा!
निक्की- कौनसी बात पर इतनी हंसी
आ रही है?
गह्रश्वपू- मैं सोच रहा था कि..
निक्की- हां! तब तो हंसने वाली ही
बात है।



राहुल- मेरा सिर बहुत ज़ोरों से दर्द कर
रहा है।
सीमा- इसका कारण मैं जानती हूं।
राहुल- क्या?
सीमा- कल मेरा पेट दर्द कर रहा था।
तो मां ने कहा, खाली होने की वजह से
यह दर्द है। यही वजह तुम्हारे सिरदर्द
की भी है।


पापा- अगर मैं तुम्हें चार कुत्ते और तीन
बिल्ली दूं तो तुम्हारे पास कितने जानवर
हुए?
भोलू- 10 जानवर।
पापा- वो कैसे?
भोलू- आप भूल गए हमारे पास पहले
से एक कु त्ता, तोता और खरगोश हैं।


चीनू- बात करने के लिए अब हम
फोन की बजाए कबूतर भेजा करेंगे।
मोनू- ठीक है।
एक दिन मोनू ने कबूतर को बिना किसी
संदेश के भेजा
चीनू- ये क्या था?
मोनू- मिस्ड कॉल।
 
 
 

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