पुलिस ऑफिसर,जवान और कॉन्टेक्ट लैंस
Source: बलदेव चौधरी | Last Updated 11:05(07/02/12)
एक पुलिस ऑफिसर तीन ‘जवानों’ से बातें कर रहा था। तीनों जासूसी का प्रशिक्षण ले रहे थे। व्यक्ति विशेष को पहचानने के उनके कौशल की परीक्षा लेने के लिए उसने पहले जवान को एक तस्वीर पांच सेकेंड तक दिखाई, फिर उसे हटा लिया। ‘ये संदेहास्पद व्यक्ति है। आप इसे कैसे पहचानेंगे।’ पहले ने जवाब दिया ‘ये तो आसान है। हम उसे पकड़ लेंगे, क्योंकि उसकी केवल एक आंख है।’ पुलिस
ऑफिसर ने कहा अरे वो तो ऐसा इसलिए दिख रहा है, क्योंकि तस्वीर इस ढंग से ली गई है।’ पहले से असंतुष्ट ऑफिसर ने वही तस्वीर पांच सेकेंड तक दूसरे जवान को दिखाई और फिर पूछा ‘ये आपका संदेहास्पद व्यक्ति है। आप इसे कैसे पहचानोगे?’
दूसरे जवान ने हंसते हुए कहा ‘इसे पकड़ना तो बहुत ही आसान है, क्योंकि इसके केवल एक ही कान है।’ पुलिस ऑफिसर ने गुस्से में आकर कहा, ‘तुम दोनों के साथ दिक्कत क्या है। ठीक है इस तस्वीर में केवल एक कान और एक आंख दिख रही है, लेकिन ऐसा इसलिए है, क्योंकि ये तस्वीर बगल से खींची गई है। क्या यही तुम्हारी सोच है?’ बेहद हताश से पुलिस ऑफिसर ने तीसरे जवान को तस्वीर दिखाई और अपने को शांत बनाए रखते हुए पूछा, ‘यह तुम्हारा अपराधी है तुम इसे कैसे पहचानोगे?’ और उसने तुरंत जोड़ा ‘बेवकूफाना जवाब देने से पहले अच्छी तरह से सोच लेना, तीसरे जवान ने एक क्षण के लिए तस्वीर को देखा और कहा ‘हूं..अपराधी कॉन्टेक्ट लैंस पहनता है।’ पुलिस ऑफिसर विस्मित रह गया, क्योंकि उसे खुद पता नहीं था कि वो कॉन्टेक्ट लैंस पहने है या नहीं। ‘ये एक अच्छा जवाब है।’ कुछ देर यहीं रुकना तब तक मैं इसकी फाइल की जांच करके मालूम करता हूं। वह अपने ऑफिस के अंदर गया और कंप्यूटर पर उस व्यक्ति की फाइल देखी और एक बड़ी सी मुस्कान के साथ वापस आ गया। उसने कहा, तुमने एकदम सही बताया अपराधी वास्तव में कॉन्टेक्ट लैंस पहनता है। इतने अच्छे निष्कर्ष का तुमने अनुमान कैसे लगाया? ‘ये तो बहुत आसान है।’ जवान ने जवाब दिया। ‘वो सामान्य लोगों की तरह चश्मा तो नहीं पहन सकता, क्योंकि उसकी केवल एक आंख है और एक कान।’
बलदेव चौधरी, जयपुर
अहा! ज़िंदगी के जनवरी अंक से साभार