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लोगो चेहरा होता है..!

dainik bhaskar | Jun 24, 2012, 18:39PM IST
 
 

किसी भी कम्पनी का चेहरा होता है उसका लोगो। तमाम कम्पनियों ने अपने लोगो में रचनात्मकता दिखा कर लोगों में अपनी अलग पहचान बनाई हैं। चलिए, कुछ नामी कम्पनियों के लोगो और उनके बनने के इतिहास पर
नज़र डालते है।

आप लोग किसी टी-शर्ट पर सही यानी राइट का निशान देखेंगे, तो समझ जाएंगे न कि यह किस कम्पनी की टी-शर्ट है। नाइकी, ठीक है न। और अगर किसी इमारत या दुकान के सामने बड़ा सा च्रूज् बना देखें तो भूख तो लग ही जाएगी, क्योंकि आप समझ जाते हैं कि ये है आपका फेवरेट मैक-डॉनल्डस्। जिस निशान से आपने यह पहचान की, उसे ‘लोगो’ कहते हैं। हर कम्पनी के लिए यह न सिर्फ उसका चेहरा होता है, बल्कि इसके बनाए जाने के पीछे एक पूरी सोच शामिल होती है। वक्त के साथ यह लोगो बदलते और संवरते रहते हैं। बहुत रुचिकर है जानी-मानी कम्पनियों के लोगो के बारे में जानना।

>> Apple- “Think different”...



ऐप्पल और इसके संस्थापक स्टीव जॉब्स के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे। ऐप्पल की स्थापना १९७६ में हुई थी। यह दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कम्प्यूटर कम्पनियों में से एक है। ऐप्पल कम्प्यूटर के अलावा आई-फोन, आई-पैड, आई-पोड, मैक्इनतोश जैसे उपकरणों में सफलता हासिल कर चुका है। शुरुआती दौर में इस कम्पनी के लोगो में सर आइज़ैक न्यूटन को एक सेब के पेड़ के नीचे बैठा दिखाया गया था। यह प्रतीक था गुरुत्वाकर्षण बल की खोज का यानी विज्ञान के एक अहम सिद्धांत का। उसी साल यानी १९७६ में यह लोगो बदल गया और बाकी रहा केवल एक सेब, वो भी इन्द्रधनुषी रंग का।


न्यूटन दृश्य से गायब हो गए और शायद सेब पर से अपनी बाइट यानी एक निवाला ले गए, तब से ऐप्पल दाहिनी तरफ से खाया हुआ प्रतीत होता है। १९९८ में ऐप्पल आई-मैक को बाज़ार में उतारा गया और साथ ही इसका लोगो दोबारा बदला गया। सेब अब काले रंग में नज़र आया। पिछले कुछ सालों में ऐप्पल ने अपने लोगो यानी इस सेब के रंगों में कई बदलाव किए। वर्तमान में इसका लोगो वही चखा हुआ सेब है, जो अब सिल्वर है। यह रंग इसे स्टाइलिश लुक देता है।


>> B.M.W- “The ultimate driving machine”...



बेवेरियन मोटर वर्क (B.M.W) अपने शुरुआती दौर में एक एअरक्राफ्ट कम्पनी थी। इस कम्पनी द्वारा जो भी एअरक्राफ्ट बनाया जाता था उसे सफेद और नीला रंग दिया जाता था, बिलकुल बेवेरियन झंडे की तरह। इन रंगों के पीछे एक और कारण भी माना जाता है, कहते है कि जब पायलेट एयरक्राफ्ट के अंदर होता है, तब प्लेन का प्रोपेलर चलने के कारण उसे यही दो रंग दिखाई देते हैं (नीला रंग आसमान का), और एअरक्राफ्ट कम्पनी होने के कारण इस कम्पनी ने इन दो रंगों का इस्तेमाल अपने एअरक्राफ्ट्स में किया। बी.एम.डबल्यू जर्मन सेना को पहले विश्व युद्ध के दौरान प्लेन उपलब्ध कराते थे।
 
 
 

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