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अलग है दिल और दिमाग पर होने वाला अटैक

dainik bhaskar.com | Aug 04, 2012, 09:25AM IST
 
 


कई स्टडी में दिल की बीमारी और डिप्रेशन को जोड़ा जाता है, लेकिन तनाव से भी दिल के लिए दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। कई स्टडी में साबित हुआ कि दिल की बीमारी से जूझ रहे 25 फीसदी लोगों को तनाव सता रही थी। और कुछ मामलों में इसी ने मामले को गंभीर बना दिया था। मसलन, रिसर्चर का कहना है कि जिन हृदयरोगियों को एंग्जाइटी डिस्ऑर्डर (घबराहट की बीमारी) होता है, उनके मामले में दिल का दौरा पड़ने और दिल की दूसरी बीमारियों की चपेट में आने का खतरा ज्यादा रहता है। पैनिक अटैक अलग भी हो सकते हैं और एंजाइटी डिस्ऑर्डर का हिस्सा भी हो सकते हैं। ऐसे दौरे में जो लक्षण हमें दिखते हैं, वे दिल के दौरे के लक्षणों से मिलते-जुलते होते हैं। ऐसे में कई बार घबराहट के दौरे को हृदयघात मान लिया जाता है।

 

कनाडाई रिसर्चर ने उन लोगों की स्टडी की जांच-पड़ताल की, जिन्हें छाती में दर्द की शिकायत के बाद इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। इसका नतीजा यह निकला कि कार्डियोवस्कुलर टेस्टिंग कराने वाले हर पांच में से एक व्यक्ति को पैनिक अटैक पड़ा था। यानी तेज घबराहट का दौरा। माना जा रहा था कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है, लेकिन यह सच नहीं था। हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि दिल की बीमारी और तनाव को क्यों जोड़ा जाता है और क्या तनाव से दिल के दौरे पड़ते हैं। सामान्य एंग्जाइटी डिस्ऑर्डर को स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल के इजाफे से जोड़कर देखा जाता है। इस बात की आशंका काफी रहती है कि इससे दिल का दौरा पड़ सकता है। किन दूसरे किस्म के स्पष्टीकरण भी दिए जाते हैं। सामान्य एंग्जाइटी डिस्ऑर्डर से जूझने वाले लोगों में ओमेगा-3 फैटी एसिड का स्तर काफी कम होता है। इस एसिड की वजह से हृदयरोग का खतरा कम रहता है। एक थ्योरी यह भी है कि असल दोषी डिप्रेशन है, हालांकि रिसर्चर डिप्रेशन और तनाव, दोनों की अलग- अलग जांच करने की कोशिशों में जुटे हैं।

 

दरअसल, गंभीर डिप्रेशन और सामान्य एंग्जाइटी डिस्ऑर्डर के बीच का अंतर, बॉयोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल, दोनों स्तरों पर काफी अस्पष्ट है। तेज घबराहट हो या फिर दिल का दौरा पड़े, दोनों मामलों में सांस उखड़ती है, पसीना निकलता है या चक्कर आते हैं। नीचे दिए गए चार्ट में कुछ ऐसी चीजें बताई गई हैं, जो पैनिक अटैक या दिल का दौरा पड़ने के बीच अंतर पता लगाने में मदद दे सकती हैं। अब सवाल उठता है कि आपको क्या करना चाहिए? अगर आपको दिल की बीमारी है और आप तनाव महसूस कर रहे हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह-मशविरा कीजिए। एंग्जाइटी डिस्ऑर्डर का इलाज हो सकता है और जरूरी नहीं कि यह केवल दवाओं के जरिए हो। कई लोग तनाव दूर करने के लिए मेडिटेशन या ध्यान करते हैं। इसके अलावा तनाव को काबू करने के लिए और भी तकनीक उपलब्ध हैं। और अगर आपकी समस्या तनाव है, तो फिर हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी दिल की बीमारी का खतरा पैदा करने वाली चीजों पर खास ध्यान देना शुरू दीजिए।

 

फायदा आपको मिल रहा है, इसका पता रनकीपर के जरिए अपनी प्रोगेस देखकर आपको तुरंत चल जाता है। रनकीपर में आप वर्कआउट का शिडच्यूल अपनी क्षमता के हिसाब से सेट कर सकते हैं। समें इंटरवल भी अपने हिसाब से सेट किया जा सकता है। फिटनेस के लिए रनिंग और वॉकिंग के अलावा साइकलिंग, माउंटेन बाइकिंग, स्विमिंग, स्केटिंग, नौकायन और स्कीइंग जैसी अलग-अलग एक्टिविटी हैं। आप अपनी पसंद की एक्टिविटी चुनकर फिटनेस पर मेहनत शुरू कर सकते हैं। यह एह्रश्वस आपको अपना लक्ष्य चुनने की आजादी भी देती है। आप सबसे ज्यादा दूरी तय करने और वजन कम करने जैसे लक्ष्य निर्धारित करके उस पर मेहनत शुरू कर सकते हैं। आपको यह एह्रश्वस बीच-बीच में संकेत भी देती रहेगी कि आपने कितनी दूरी तय कर ली है। अगर एक निश्चित समय जैसे 30 मिनट या 45 मिनट तक ही दौड़ या सैर करना चाहते हैं तो टाइम सेट कर दें, रनकीपर टाइम पूरा होने का संकेत भी अपने आप दे देगी। अपनी फिटनेस की प्रोगेस को आप एह्रश्वस के जरिए ही सीधे फेसबुक और ट्विटर पर भी पोस्ट कर सकते हैं।

 
 
 

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