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मिस्ट्री हंटर्स!

dainikbhaskar.com | Jan 18, 2013, 16:54PM IST
मिस्ट्री हंटर्स!

हाल में शुरू हुआ कार्यक्रम, मिस्ट्री हंटर्स बच्चों में ही नहीं, बड़ों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस शो की जो ख़ासियत सबको भा रही है, वह है इस शो की रोचक संकल्पना। यह अनोखा कॉन्सेप्ट लेकर आया है डिस्कवरी किड्स। यह शो डिस्कवरी के लोकल प्रोडक्शन मिस्ट्री हंटर्स इंडियाज के तहत बनने वाला पहला शो है, जो इसी नाम के कैनेडियन संस्करण से प्रेरित है।


क्या है मिस्ट्री हंटर्स?

इस शो में नन्हे कलाकार खोजी के रूप में देशों का भ्रमण करते हैं। भारतीय संस्करण में यह ज़िम्मा अपूर्वा और हिमांशु को दिया गया है। दोनों नन्हे खोजी, भारत के कोने-कोने में जाकर ऐसे राज़ से पर्दा उठाने की कोशिश करते हैं, जिनके पीछे छुपा कारण आज तक लोग जान ही नहीं पाए हैं। साथ ही रूढ़ियों में उलझे लोगों को असली बात से रू-ब-रू होने में मदद करते हैं।

इस अनोखे सफ़र के तहत, केरल के घने जंगलों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक, इन दोनों ने हर क़िस्से की तह तक जाने की कोशिश की है।

दोनों हंटर्स, मिथकों और सत्य में फ़र्क़ सही से समझ पाएं, इसलिए इनका साथ दिया है देवेन्दर (आर जे मंत्रा) ने, जो एक वैज्ञानिक हैं। साथ ही अपने जादुई ट्रिक्स से ये सबका मनोरंजन करते हैं।
किन धारणाओं से रू-ब-रू हुए ये हंटर्स-

अपूर्वा और हिमांशु के सामने ऐसे कई क़िस्से आए जो सिर्फ़ कहानी में सुने थे। इनके कुछ उदाहरण हैं- पल्लकड, एक ऐसा गांव, जिसे शापित माना जाता है। संजय गांधी नेशनल पार्क के घने जंगलों के पीछे का राज़। पूना के शनिवारवाड़ा के एक क़िले का राज़, माना जाता है कि इस क़िले के राजा के छोटे भाई की आत्मा यहां रहती है। इसके अलावा सालों से चलते आ रहे रिवाज़ों की सत्यता से भी रू-ब-रू हुए ये हंटर्स। जैसे- हमारे यहां कई सपेरे, सांप को बीन की धुन से अपने क़ाबू में करते हैं। लेकिन कैसे? इसकी भी तरकीबें सीखीं इन हटंर्स ने।

मुलाक़ात बहादुर हंटर्स से..

चंचल और प्यारी अपूर्वा- मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली 16 वर्षीय अपूर्वा अरोड़ा, इस वक्त बारहवीं कक्षा में पढ़ रही हैं। अपूर्वा ने अब तक 25 विज्ञापनों में काम किया है। साथ ही चार फीचर फिल्म में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया है। हाल ही में अक्षय कुमार की बहुचर्चित फिल्म, ओह माय गॉड!ञ्ज में भी अपूर्वा ने बड़े पर्दे पर अपनी अभिनय क्षमता को प्रदर्शित किया।

घर से इस क्षेत्र में कौन जुड़ा है? पूछने पर, अपूर्वा बताती हैं- मैंने दिल्ली के Rनेशनल स्कूल ऑफ ड्रामाञ्ज में थियेटर किया है और तब से ही मुझे अभिनय का शौक़ है। मेरे पूरे परिवार में दूर-दूर तक भी फिल्म से नाता रखने वाला कोई नहीं है, लेकिन मेरे परिवार वालों ने इस क्षेत्र में आने से लेकर आज तक मेरा बहुत साथ दिया है।

फिल्म और थियेटर करने में क्या फ़र्क़ महसूस हुआ? इस सवाल पर अपूर्वा कहती हैं- थियेटर करते वक्त स्टेज पर होना एक अलग ही ख़ुशी का एहसास कराता है। आपके सामने मौजूद पहली क़तार से लेकर सबसे पीछे की क़तार तक आपको अपने भाव पहुंचाने होते हैं। यह बेहद कठिन काम लगता है, लेकिन इसमें मज़ा बहुत आता है। ऐसा नहीं है कि मुझे फिल्म पसंद नहीं। फिल्मी जगत से मैंने बहुत कम समय में, बहुत कुछ सीखा है। हां, फिल्म से ज्यादा मुझे विज्ञापन करना अच्छा लगता है। कई सारे विज्ञापन करने से मुझे अलग-अलग किरदार निभाने को मिले, जो मेरे लिए काफ़ी अच्छा अनुभव रहा। अपूर्वा को घूमना-फिरना बहुत पसंद है, इसलिए उन्हें मिस्ट्री हंटर्स का कॉन्सेप्ट पसंद आया।

बहादुर हिमांशु

मुम्बई में रहने वाले हिमांशु शर्मा, सातवीं कक्षा में पढ़ते हैं। हिमांशु इसके पहले भी कुछ विज्ञापन कर चुके हैं। उन्हें क्या अच्छा लगता है? पूछने पर बताते हैं- मुझे टीवी देखना बहुत पसंद है। घर पर हर वक्त टीवी देखा करता था और कई बार मम्मी से कहता भी था कि मम्मी मुझे भी टीवी पर आना है। और अब जब मेरा यह सपना पूरा हुआ है, तो लगता है यही तो था, जो मैं करना चाहता था। हिमांशु ने अपना सपना पूरा करने यानी अभिनय की इस विशाल दुनिया, मुम्बई में आने के लिए उन्होंने अपना घर, यानी पूना छोड़ा।

हिमांशु अब तक 18 विज्ञापन और 2 धारावाहिकों में काम कर चुके हैं। मिस्ट्री हंटर्स तक कैसे पहुंचे? यह पूछने पर हिमांशु बताते हैं- मुझे पता चला कि बी.बी.सी में इस शो के लिए ऑडिशन हो रहे हैं। मैं वहां गया, उन लोगों ने शो के बारे में और क्या करना है, इस बारे में काफ़ी कुछ समझाया। मुझे हमेशा से रॉक क्लाइम्बिंग और रोमांच से भरे खेल पसंद हैं। और मिस्ट्री हंटर्स में तो रोमांच ही रोमांच है। इसलिए मैं एक ही बार में इस के लिए राजी हो गया।

मैं बाल भास्कर पढ़ने वाले सभी साथियों को कहना चाहूंगा कि अगर आपकी भी किसी चीज़ में रुचि है, तो उसे ज़रूर पूरा कीजिए। सब से हटकर, कुछ अलग करने की कोशिश कीजिए। कुछ नया अनुभव लेने का मौक़ा मिले, तो ज़रूर लें। हो सकता है कि भविष्य की राह वहीं से निकले।

 

 

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