छुट्टियां
सतीश व्यास ‘आस’
| Apr 14, 2012, 11:32AM IST

शरबत ने ली अंगड़ाई।
हंसता-गाता बर्फ का गोला,
पहनकर रंग-रंगीला चोला।
दुम दबाकर भागी रजाई,
गर्मी ने आवाज लगाई।
खरबूजे खीरे की मांग बढ़ी,
तरबूजे की भी नाक चढ़ी।
भायी मन को कुल्फी-मलाई,
गर्मी ने आवाज लगाई।
आमों ने भी लिया अवतार,
शहतूत-जामुन लाए बहार।
धूम मचाती खूब ठंडाई,
गर्मी ने आवाज लगाई।
गई परीक्षाएं सिर से आज,
शौक-मौज का हुआ आगाज।
नानी की बातों का खजाना,
मूछों को मुड़ाए नाना।
दूध-भात और हलवा-पूरी,
मिलकर चट कर जाएं खाना।
कक्षा के होंगे सरताज,
गई परीक्षा सिर से आज।
फूफा के संग सैर सपाटा,
लुका छिपी से हो सन्नाटा।
दीदी बनी रसोई की रानी,
बिना नमक गूंधे आटा।
छौंके जीरा लहसुन प्याज,
गई परीक्षा सिर से आज।
गिल्ली-डंडा और सितौले,
बीच-बीच में छुटकी बोले।
गया बसन्त शुरू हुई गरमाई,
एसी, कूलर-पंखे बोले।
जाना पिंड ग्रहों के राज,
गई परीक्षा सिर से आज।







