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सेहत और स्वाद का खजाना देसी खाना

सुमन परमार | Dec 08, 2012, 00:06AM IST
सेहत और स्वाद का खजाना  देसी खाना
वैज्ञानिकों ने जिन पांच तरह के फूड ग्रुप को इंसान के शरीर के लिहाज से जरूरी बताया है, वे सब एक भारतीय थाली में समाहित होते हैं। शरीर के लिए सेहतमंद और जुबान को अद्भुत स्वाद देने वाली भारतीय थाली की खूबियों पर रोशनी डाल रही हैं सुमन परमार
 
भारतीय खानपान में अब कई किस्म का विदेशी खाना भी पूरी तरह शामिल हो गया है। पास्ता, नूडल्स, पिज्जा, बर्गर के अलावा कई किस्म के सूप, जूस, डेजर्ट्स पर विदेशी खाने की छाप देखी जा सकती है। लेकिन हर नई रिसर्च को देखने के बाद जब पोषण से भरपूर खाने की बात होती है तो भारत की परंपरागत थाली को ही शरीर के लिए सबसे अच्छा माना जा है। रोटी-चावल, दाल-सब्जी, दही, अचार-चटनी-पापड़ आदि हमारे लिए किस तरह स्वाद के साथ-साथ सेहतमंद आहार का माध्यम हैं। आइयें देखें भारतीय थाली के ये तत्व कैसे बनाते हैं हमारे भोजन को स्वादिष्ट और शरीर को सेहतमंद।
 
रोटी/चावल: एनर्जी का मुख्य आधार
 
रोटी-चावल काबरेहाइड्रेट के प्रमुख स्रोत हैं। डाइटीशियन और फोर्टिस हॉस्पिटल की कंसल्टेंट डॉ. सिमरन सैनी कहती हैं, ‘रोटी हमारे फूड पिरामिड का आधार है। रोटी की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए गेहूं के आटे में सोयाबीन या जौ मिलाना फायदेमंद है। इससे रोटी में काबरेहाइड्रेट के अलावा प्रोटीन भी बढ़ता है।’ लेकिन, इसमें ऐसा क्या है, जो इसे दूसरे विदेशी व्यंजनों से ज्यादा पौष्टिक बनाता है? चोइथराम हॉस्पिटल, इंदौर की सीनियर डाइटीशियन पूर्णिमा भाले कहती हैं, ‘कॉन्टिनेंटल या इटेलियन खाने में ब्रेड का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है, जिसे मैदा से बनाया जाता है, जो पौष्टिक नहीं होता। मोटापे और कब्ज की वजह मैदा भी होता है। इसलिए, रोटी या चावल अन्य व्यंजनों के मुकाबले ज्यादा पौष्टिक है।’ आजकल सेहत का ध्यान देने के क्रम मेंलोग सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस को बेहतर मानते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि सफेद चावल सेहत के लिए अच्छा नहीं होता। दरअसल, यह बहुत हद तक जगह के वातावरण पर निर्भर करता है। जैसे दक्षिण में लोग सफेद चावल मजे से खाते हैं, क्योंकि वहां उसकी जरूरत है। पर,  राजस्थान, जहां गर्मी बहुत ज्यादा पड़ती है, वहां लोग चावल को पचा नहीं पाते। 
 
दाल: सबसे जरूरी न्यूट्रिशन
 
दालों से हमें प्रोटीन मिलता है लेकिन इसमें लगने वाला घी का तड़का हमें सैचुरेटेड फैट भी दे जाता है। लेकिन डॉक्टर सिमरन कहती हैं, ‘हाल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने यह प्रमाणित किया कि खाने में थोड़ा सा घी अच्छे स्वास्थय और अच्छे लिपिड प्रोफाइल के लिए जरूरी है। एम्स ने इस तथ्य की पुष्टि के लिए यह भी जोड़ा कि घी हड्डियों और जोड़ों के लिए ल्यूब्रिकेंट का काम करता है।’
 
सब्जी: फाइबर का खजाना
 
सब्जियां फाइबर का प्रमुख स्रोत होती हैं। इनसे हमें मिनरल्स भी मिलते हैं और इनकी अहमियत हमारे लिए बहुत ज्यादा है क्योंकि हमारे शरीर में हर तरह के मिनरल नहीं बनते। उनकी भरपाई सब्जियों के जरिए ही होती है। टमाटर में लाइकोपिन होता है, तो गाजर में कैरोटिन। मतलब, हर सब्जी में अलग-अलग तरह के मिनरल होते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं। सर्दियों में हमारे यहां सब्जियों की भरमार होती है। भाले कहती है, ‘चाइनीज या इटेलियन खाने में भी सब्जियों की मात्रा अधिक होती है, पर उसमें प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल भी उतना ही ज्यादा होता है। यह खाने से उसकी प्राकृतिक पौष्टिकता छीन लेते हैं। विदेशी खाने में बेकिंग सोडे का भी बहुत इस्तेमाल होता है।’ दिल्ली में फ्रीलांस शेफ और होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में पढ़ाने वाले प्रफुल्ल कुमार का कहना है, ‘चाइनीज फूड ज्यादा तेज आंच पर पकाया जाता है। इसमें कई ऐसे व्यंजन भी होते हैं, जिन्हें अलग-अलग चरणों में पकाया जाता है। मसलन, उबालना, सुखाना और फिर पकाना। इससे फूड की पौष्टिकता कम होती है।’ 
 
दही: शरीर को दे मजबूती
 
हमारी पाचन क्रिया में सहायक अच्छा बैक्टीरिया दही से मिलता है। यह कैल्शियम का भी अच्छा स्रोत है। दिल्ली में मैक्स हॉस्पिटल की हेड डाइटीशियन चीनू पाराशर कहती हैं, ‘दही हमारे पेट का पीएच लेवल भी सही स्तर पर रखता है। जब हम खाना खाते हैं तो पेट में कुछ एसिड तैयार होते हैं, जो खाना पचाने का काम करते हैं। दही शरीर में एसिड के लेवल को बनाए रखने में मददगार होता है। इससे थोड़ा प्रोटीन भी मिलता है। एक तरह से यह मल्टीलेयर पर काम करता है।’ रायते के रूप में दही फायदेमंद है। मसलन, लौकी का रायता हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए बहुत लाभदायक है तो अनार का रायता बच्चों की सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। विदेशी व्यंजनों में दही का सीधा इस्तेमाल नहीं किया जाता। वहां योगर्ट का इस्तेमाल तो है, लेकिन वह मुख्य भोजन का हिस्सा नहीं।
 
सलाद: शरीर का वैक्यूम क्लीनर
 
सलाद से ंिमलने वाला फाइबर हमारे शरीर के लिए वैक्यूम क्लीनर का काम करता है। यानी पाचन क्रिया के दौरान निकलने वाली खराब चीजों को साफ करने का काम। यह शरीर को ठंडक भी देता है। प्रफुल्ल कहते हैं, ‘अगर इटेलियन और अमेरिकी व्यंजनों से तुलना करें तो वे सलाद से भरपूर नजर आते हैं। पास्ता सलाद या ब्रेड सलाद ताजी सब्जियों से भरपूर होते हैं।’ लेकिन, यह काफी नहीं है। भाले कहती हैं, ‘सभी पोषक तत्व एक दूसरे के पूरक होते हैं। सिर्फ भारतीय थाली में ही यह सभी गुण एक साथ मौजूद होते हैं।’ 
 
अचार: पाचन में मददगार
 
यह पाचन क्रिया में सहायक गैस्ट्रिक जूस के सही कामकाज की देख-रेख करता है और बाइल जूस बनाता है, जो सही तरीके से पाचन में मददगार होता है। हर तरह के फल-सब्जियों जैसे अदरक, आम, लहसुन, नींबू, गाजर, मिर्ची आदि से बना अचार विटामिन और मिनरल का स्रोत होता है। दरअसल, अचार इतना असरदार होता है कि इसकी बहुत थोड़ी-सी मात्रा भी पाचन क्रिया में बहुत मदद करती है। 
 
मसाले: स्वाद की बुनियाद
 
लोग यह भी कहते हैं कि भारतीय खाने में मसाले का बहुत इस्तेमाल किया जाता है। इनका मुख्य काम खाने का स्वाद बढ़ाना होता है। डॉ. सिमरन कहती हैं, ‘मसाले पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर हैं। हल्दी शरीर के रक्षा तंत्र को मजबूत करने के अलावा पेट साफ रखने का काम करती है। गरम मसाले पचाने के लिए जरूरीगैस्ट्रिक जूस को रिलीज करने का काम करते हैं, तो धनिया पेट में एसिड का सही लेवल तय करता है। गरम मसाले का ज्यादा इस्तेमाल होता है, तो धनिया उसके साइड इफेक्ट को बैलेंस करता है। मिर्च शरीर में एंटी ऑक्सिडेंट्स का स्तर बढ़ाती है और संक्रमण से बचाने में भी मददगार साबित होती है।’ 
 
स्वाद के लिए हम कुछ भी खा सकते हैं, लेकिन संतुलित एवं संपूर्ण आहार के लिहाज से भारतीय थाली का कोई विकल्प नहीं है। भारतीय थाली में न केवल शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, बल्कि शरीर के तमाम सहायक कार्यो में मदद करने वाले पदार्थ भी शामिल होते हैं। 
 
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