क्या आप इंजीनियरिंग के लिए बने हैं

सभी प्रतिष्ठित अखबारों में प्रकाशित इस खबर ने जाहिर तौर पर इंजीनियरिंग के वर्तमान छात्रों और भविष्य में इंजीनियरिंग से जुड़ने वाले छात्रों में न केवल हलचल पैदा की, बल्कि इस क्षेत्र को अपनाने का भी जबर्दस्त प्रोत्साहन दिया।
अब नीचे दिए गए तीनों उदाहरणों को पढ़िए
1. छात्र के रूप में विज्ञान और गणित में मेरा प्रदर्शन अच्छा था। डिजाइन और इनोवेशन भी मेरा जुनून था, बस सीधे तौर पर इंजीनियरिंग वह क्षेत्र था, जो मेरी खूबियों और जुनून को आपस में जोड़ सकता था ताकि मैं नए विचारों और उत्पादों का निर्माण कर पाऊं। टायको फायर एंड सिक्योरिटी के मैनेजिंग डायरेक्टर शरद बोहरा के में यह वही वजह थी, जिसने शरद को आईटी बीएचयू में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री के लिए प्रेरित किया था।
2. बीएसएएस इंडिया लिमिटेड के डायरेक्टर एच सी यादव के अनुसार, मैंने एयरक्राफ्ट इंजीनियरिंग को चुना था, क्योंकि यह चुनौतीपूर्ण और रोमांचक करिअर है, जिसमें सतर्कता, चुस्ती और सही निर्णय लेने की काबिलियत चाहिए।
3. शिंडलर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर उदय कुलकर्णी का इंजीनियरिंग में रुझान दसवीं कक्षा में ही पैदा हो गया था। जब इंटर स्कूल साइंस एग्जीबिशन में उदय को प्रोजेक्ट लीडर बनाया गया और साइंस स्टॉल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई, तब उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें इंजीनियर बनना है। एग्जीबिशन का विषय था ‘मशीनें मानव के लिए किस प्रकार उपयोगी हैं’। उदय कहते हैं, फिजिक्स और गणित में मेरा जबर्दस्त रुझान था और इसी वजह से ये एग्जीबिशन सफलतापूर्वक पूरी हुई। इस अनुभव ने मेरे भीतर इंजीनियरिंग के बीज डाल दिए।
तीनों उदाहरणों का निचोड़ यही है कि इंजीनियरिंग में एक ऐसा आकर्षण है, जो छात्रों को अपने जीवन के 30-40 साल इस क्षेत्र के साथ गुजारने के लिए उकसाता है और निस्संदेह मोटा वेतन इस आकर्षण की जड़ों को और अधिक कर देता है।
पीयरसन एजुकेशन इंडिया के सीनियर वीपी व बिजनेस हेड अनीष श्रीकृष्ण की राय में, भारत में इंजीनियरिंग शिक्षा ने उत्कृष्टता हासिल की है। दुनिया भर में कुछेक देश ही ऐसे हैं, जहां प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थान 40 में से एक आवेदक को स्वीकार करते हैं। इन संस्थानों के इंजीनियर सॉफ्टवेयर , स्पेस टेक्नोलॉजी में अतुल्य योगदान दे चुके हैं और सफलता की यही कहानियां देश भर में इंजीनियरिंग कॉलेजों और उनमें पढ़ने वाले छात्रों को बढ़ाती जा रही हैं।
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इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग कर चुके दीपक भारद्वाज एक फर्म में रिकॉर्डकीपर की नौकरी कर रहे हैं। वजह बताते हुए दीपक कहते हैं, उनके कैंपस में मुट्ठी भर कंपनियां नियुक्ति के लिए आती थीं, जो चुनिंदा छात्रों का ही चयन करती थीं। दीपक की तरह मोहम्मद सैफ ने भी सॉफ्टवेयर फर्म के लिए कोड राइटिंग का सपना देखते हुए कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की थी। महीनों तक कंपनियों के चक्कर लगाने के बाद सैफ को टेलिफोन कनेक्शन बेचने वाली कंपनी के साथ काम मिला, जो उन्हें अपने अनुकूल नहीं लगा और उन्होंने वह काम छोड़ दिया। दीपक और सैफ जैसे अनगिनत छात्र हैं, जो भेड़चाल में इंजीनियरिंग का अनुसरण तो कर रहे हैं, लेकिन वास्तविकता में असफल हो रहे हैं।
एचआर फर्स का दावा है कि हर साल भारत में 7,50,000 इंजीनियर उत्पन्न होते हैं, जिनमें से 40 प्रतिशत को लगभग एक साल तक नौकरी नहीं मिलती और 22 प्रतिशत दो साल तक नौकरी के लिए जद्दोजहद करते हैं। इंजीनियरिंग जैसे करिअर में दो साल का गैप दौड़ में आपको पछाड़ देता है।
अनीष श्रीकृष्ण के अनुसार, देश भर में 4,000 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जहां भारी मात्रा में इंजीनियरों का उत्पादन हो रहा है। जाहिर तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और पेशेवेर कुशलताओं के बीच खाली जगह है। सीधे रूप से यह असर रोजगार के अवसरों पर पड़ता है। नैसकॉम की परस्पेक्टिव 2020 रिपोर्ट के आंकड़े तो और भी अधिक चौंकाने वाले हैं, जो बताती है कि टेक्नोलॉजी सर्विस में मात्र 26 प्रतिशत इंजीनियर रोजगार के योग्य हैं। प्रतिष्ठित करिअर, शानदार पे पैकेज और कुछ कर गुजरने का जुनून इंजीनियरिंग को पसंदीदा करिअॅर की सूची में ऊपर पहुंचाता है। निस्संदेह यहां करने के अवसर असीमित हैं। प्लेन, भवन, सड़क, पुल, जेट, हार्ट वाल्व की डिजाइनिंग से लेकर नैनो रोबोट, देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पृथ्वी, सूर्य और अणुओं की शक्ति का दोहन जैसे अद्भुत काम इंजीनियर्स ही करते हैं। यही वजह है कि यहां अद्भुत योग्यता की मांग है। आप बेशक एक सफल इंजीनियर बन सकते हैं, लेकिन उससे पहले आपको यह जान लेना चाहिए कि क्या वाकई आपको इस क्षेत्र में प्रवेश करना चाहिए। औसतन 2.5 से 12 लाख रुपए का खर्च और अपनी पूरी इस काम में लगा देने के फैसले से पहले यह पड़ताल जरूरी है कि क्या आप इंजीनियरिंग के लिए बने हैं? इस सवाल का सही जवाब ही आपके करिअॅर को सही दिशा दे सकता है।
पढ़िए अपना भविष्य
ईजीई ग्लोबल एजुकेशन में मेंटर आशीष डुडानी कहते हैं, मुझे बताया गया था कि एक बार आईआईटी परीक्षा में सफल होने के बाद मेरी सही रास्ते पर होगी। मैंने आईआईटी को क्रैक किया, लेकिन दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में चार मुश्किल साल बिताने के बाद भी मैंने महसूस किया कि मेरी जिंदगी सही रास्ते पर नहीं थी।
मेरे पास ग्रेजुएशन के बाद चुनने के लिए तीन विकल्प थे।
-पहला किसी प्रतिष्ठित तकनीकी फर्म के साथ जुड़ जाना, लेकिन मेरी इस क्षेत्र में कम रुचि के अलावा एक और कारण मुझे ऐसा करने से रोक रहा था, वह था सीमित अवसरों के साथ कम वेतन।
-मेरा दूसरा विकल्प था, बिना ब्रांड वाली किसी कमर्शियल फर्म के साथ काम करना, लेकिन फिर कम वेतन और सीमित स्थिरता की वजह से इसकी ओर मेरा रुझान कम ही था। वैसे भी ब्रांड की कमी मुझे हमेशा खटकती रहती। यहां काम करने की वजह से ज्यादातर प्रतिष्ठित मेरे रेज्यूमे की ओर झांकती भी नहीं।
-तीसरा विकल्प था कि मैं यूरोप या अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थान से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ले सकता था, जो मुझे ग्लोबल ब्रांड दे सकती थी। हालांकि यह विकल्प कुछ महंगा था, लेकिन यह मेरी जिंदगी के लिए सही रास्ता बन सकता था। मैंने इसी विकल्प को चुना।
चार साल की कड़ी मेहनत और पैसा खर्च करने के बाद आशीष को पता लगा कि इंजीनियरिंग की बजाय उन्हें किसी और चीज की तलाश थी। अगर आप चाहते हैं कि ऐसी नौबत आपके साथ न आए तो इस क्षेत्र में कदम रखने से पहले यह सवाल अपने आपसे पूछिए।
आप इंजीनियरिंग क्यों करना चाहते हैं?
- यह मेरी रुचि का क्षेत्र है।
- यह मेरा जुनून है।
- 12वीं में विज्ञान गणित विषयों में मेरा प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है।
- मुझे वैज्ञानिक, इंजीनियर, तकनीकी, गैजेट्स, गाड़ियां, भवन, मशीनें आदि आकर्षित करते हैं।
- मुझे विज्ञान की किताबें या वैज्ञानिकों की जीवनियां पढ़ना पसंद है।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई को चुनने की वजह यदि उपरोक्त में हैं तो भी आपको इस बारे में विचार करने की जरूरत है।
कैडेंस डिजाइन सिस्टम्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के एचआर डायरेक्टर सुनील पाठक के अनुसार, पिछले सालों में इंजीनियरिंग काफी बदली है। अब यहां फस्र्ट क्लास एकेडमिक रिकॉर्ड और तकनीकी कुशलताओं के साथ बेहतर आईक्यू, सोल्विंग स्किल्स, डोमेन नॉलेज, बेहतरीन संवाद कुशलताएं, सामान्य जागरूकता और इमोशनल कोशंट की जरूरत होती है। इन्हीं योग्यताओं के बल पर इंजीनियर के रूप आप अपने प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा कर सकते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार के दबाव या सामान्य रुचि के दम पर इस करिअर का चुनाव महंगा पड़ सकता है, क्योंकि नौकरी के मैदान में असल योग्यता की जरूरत होती है।
यहां पांच अहम सवाल हैं, जिनके बारे में हरेक इंजीनियरिंग छात्र को सोचना चाहिए ताकि चार साल बिताने के बाद ये पछतावा न हो कि आपका चुनाव गलत था।
इस क्षेत्र के विशेषज्ञों की सलाह है कि इस सवाल का जवाब रुचि पर निर्भर करता है। असल में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रवेश के लिए सबसे पहली शर्त है, अपनी रुचि की पहचान। जरा सोचिए क्यों आप इंजीनियरिंग से जुड़ना चाहते हैं।
कैसे खोजेंगे रुचि?
इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कंट्री हेड शेखर सान्याल बताते हैं, रुचि ढूंढ़ने के लिए उम्मीदवार को अपने हरेक काम का बारीकी से विश्लेषण करना चाहिए। यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि आपका ज्यादा वक्त कौनसी गतिविधियों में बीतता है। कौनसे काम आपके लिए सरल हैं और कौनसे कठिन। इसके अलावा दोस्तों और परिवार की सलाह रुचि खोजने में मददगार हो सकती है।
रुझान को पहचानने में माता पिता और शिक्षक दोनों ही मदद कर सकते हैं। छात्र के अंक, कक्षा में उसके रवैये को ध्यान में रखते हुए शिक्षक उसे सलाह दे सकते हैं।
करिअॅर काउंसलर के पास कुछ निश्चित प्रश्नावली होती है, जिसके माध्यम से वे बिल्कुल ठीक तो नहीं, लेकिन आंशिक रूप से छात्रों की रुचि बता सकते हैं।
जानिए अपनी योग्यता
एक बार फिर अहम प्रश्न यह है कि क्या रुचि को जान लेने मात्र से इंजीनियरिंग को करिअर के रूप में अपनाने की तलाश खत्म हो जाती है तो ऐसा नहीं है। असल में किसी भी करिअर में रुचि लेना आपको उस क्षेत्र में पारंगत नहीं करता। एप्टीट्यूड जरूरी है, जो कि उस क्षेत्र की आवश्यक कुशलताएं आपके भीतर विकसित करता है। अंतिम निर्णय लेने से पहले एप्टीट्यूड चेक करना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों की सलाह है कि केवल रुचि के बल पर आप इंजीनियरिंग में मैदान नहीं मार सकते। योग्यता इसके लिए बेहद जरूरी है। आपका पोटेंशियल आपको बता सकता है कि आप कहां पहुंच सकते हैं। गणित यह तय करने में मदद करती है कि आप इंजीनियरिंग के लायक हैं या नहीं। इंजीनियरिंग के छात्रों की फिजिक्स और गणित औसत से ऊपर होने चाहिए। एक औसत छात्र कई बार दसवीं में अप्रत्याशित प्रदर्शन कर देता है। अस्सी प्रतिशत तक अंक पहुंच जाते हैं। अब जब विषय का चुनाव करना होता है तो ज्यादातर प्रतिशत का आंकड़ा ऊपर पहुंचते ही विज्ञान और गणित पसंदीदा विषय बन जाते हैं। जबकि यह चयन बेहद सोचसमझकर करना चाहिए। सबसे पहले यह देखिए कि गणित में आपका रुझान किस तरह का है। मूलभूत सिद्धांतों की स्पष्टता बेहद जरूरी है। दो चीजें जरूरी होती हैं विषय पर कमांड और बेसिक्स की स्पष्टता। यह सब इसलिए आवश्यक है, क्योंकि दसवीं और बारहवीं के गणित में महत्वपूर्ण अंतर होता है। दसवीं के सरल पाठ्यक्रम में अच्छे अंक लाना ज्यादा मुश्किल काम नहीं होता, लेकिन 12वीं और आगे की पढ़ाई के लिए खासी मेहनत करनी होती है। असल में एक पूर्वाभास होता है, जो बताता है कि आपकी रुचि किस विषय में है। यह विश्लेषण आपको खुद करना चाहिए। अपना पोटेंशियल आप खुद ही निर्धारित कर सकते हैं, वह भी बिना किसी दबाव के। गणित और फिजिक्स यहां जरूरी शर्त है। इसके अलावा कयूनिकेशन स्किल्स की अहम भूमिका है। आपकी लॉजिकल व रीजनिंग क्षमताएं बेहतरीन होनी चाहिए।
सरल रूप में यूं समझें
गणित और फिजिक्स में निपुणता।
मैकेनिकल और लॉजिकल
संवाद कुशलताएं, आत्मविश्वास, जिज्ञासा और नए आइडियाज को चुनने का हौसला।
असाइनमेंट्स, प्रेजेंटेशन, परीक्षाओं और इंटर्नशिप्स समेत आठों सेमेस्टर में व्यवस्थित ढंग से काम करने का प्रोत्साहन और काबिलियत।
तकनीकी को सीखने की प्राकृतिक इच्छा।
उपरोक्त विशिष्टताएं इंजीनियरिंग के दरवाजे आपके लिए खोलती हैं।






