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विद्यार्थियों को मिले फीस की जानकारी
Bhaskar News
| Feb 18, 2013, 02:09AM IST
मुंबई. शिक्षण संस्थान किस मद में कितनी फीस वसूलते हैं। इसकी जानकारी विद्यार्थियों को मिलनी चाहिए। इस तरह का निर्देश राज्य के मुख्य सूचना अधिकारी रत्नाकर गायकवाड़ ने दी है।
विद्यार्थियों द्वारा दी जानेवाली फीस का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, यह जानने का अधिकार विद्यार्थियों को होना चाहिए। गायकवाड़ ने आदेश दिया है कि शिक्षण शुल्क समिति अपनी वेबसाइट पर फीस संबंधी सारी जानकारी उपलब्ध कराए।
आरटीआई कार्यकर्ता विवेक वेलणकर की अपील पर सुनवाई करते हुए मुख्य सूचना आयुक्त ने यह बात कही। वेलणकर ने शिक्षण शुल्क समिति से मांग की थी कि फीस संबंधी जानकारी शिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों को मिलनी चाहिए। राज्य में इंजीनियरिंग, मेडिकल व एमबीए के 2 हजार से अधिक संस्थान हैं।
इन संस्थानों में विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराये बगैर मोटी फीस वसूली जाती है। इन शिक्षण संस्थाओं के प्रस्ताव के अनुसार शिक्षण शुल्क समिति फीस तय करती है। परंतु यह फीस किस तरह वसूली जा रही है, फीस के हिसाब से सुविधाएं दी जा रही हैं अथवा नहीं, इसकी जांच के समिति के पास कोई साधन नहीं हैं।
शिक्षण समिति ने बनाया बहाना
इसको लेकर आरटीआई कार्यकर्ता वेलकरण ने वर्ष-2008 में शिक्षण समिति से शिकायत की थी। उनकी मांग थी कि वेबसाइट पर कॉलेजों की फीस संबंधी विस्तार पूर्वक जानकारी दी जाए। इस पर कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत आवेदन किया। जिसके जवाब में शिक्षण समिति ने कहा कि वेबसाइट पर जगह उपलब्ध न होने की वजह से फीस की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। वेलकर के सवाल के महत्व को समझते हुए मुख्य सूचना आयुक्त गायकवाड़ ने खुद मामले की सुनवाई की और इस तरह का निर्देश दिया।
फीस लेते हैं पर सुविधाएं नहीं देते
इस दौरान वेलकर ने कहा कि बहुत से शिक्षण संस्थान खेल के मैदान, कंप्यूटर शिक्षा, व्यायामशाला, प्रयोगशाला व बस सेवा के नाम पर शुल्क वसूलते हैं जबकि वे विद्यार्थियों का यह सुविधाए नहीं देते। उन्होंने कहा कि शिक्षण समिति हर कॉलेज की जांच नहीं कर सकती। इसलिए यदि वेबसाइट पर फीस की संबंधी जानकारी उपलब्ध रहेगी तो विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार शिक्षण संस्थानों में प्रवेश ले पाएंगे।






