घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने की जरूरत नहीं
मुंबई. राज्य के सिंचाई विभाग की अनियमितताओं की जांच के लिए जांच आयोग की कोई जरूरत नहीं है। महज कुछ आरोपों के आधार पर मामले की जांच सीबीआई को नहीं सौपी जा सकती है।
इसके लिए सरकार की कमेटी काफी है। सिंचाई विभाग में अनियमतिताओं को लेकर दायर याचिका आधारहीन है क्योंकि याचिका कैग की रिपोर्ट पर आधारित है और कैग रिपोर्ट ही अंतिम नहीं है। यह बात राज्य सरकार की ओर से बांबे हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में सामने आई है।
जलसंसधान विभाग के संयुक्त सचिव हरिभाऊ ढांगरे ने हलफनामे में साफ किया है कि यदि इस मामले की जांच सीबीआई व आयोग को सौपी जाती है तो इससे सिंचाई विभाग के अधिकारियों का मनोबल गिरेगा।
हलफनामे के मुताबिक राज्य सरकार ने सिंचाई घोटाले की जांच के लिए श्वेत पत्र जारी किया है जिसमें सारा लेखा जोखा दिया गया है।
इसके अलावा मामले की जांच के लिए डा. माधवराव चितले की अध्यक्षता में एक कमेटी भी गठित की है। इस कमेटी के सदस्यों में जल व वित्त विभाग के विशेषज्ञों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
यह कमेटी न सिर्फ कथित अनियमितताओं की जांच करेगी बल्कि अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करेगी।
हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि सीबीआई गंभीर मामलों की जांच के लिए है। सिंचाई विभाग की अनियमितताओं के खिलाफ दायर याचिका में किसी व्यक्ति विशेष पर कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं और न ही कि सी अपराध के घटित होने का जिक्र किया गया है।
इस स्थिति में सीबीआई जांच का कोई तुक नजर नहीं आता है। सरकार इस मामले को लेकर काफी गंभीर है। कमेटी का गठन उसकी सक्रियता का प्रमाण है।
हलफनामे में साफ किया गया है कि वर्तमान में जांच आयोग के गठन की कोई जरूरत नहीं है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही चीजें स्पष्ट होगी।
गौरतलब है कि समाजिक कार्यकर्ता उत्तमराव घतुले ने सिंचाई विभाग के घोटाले की जांच न्यायिक आयोग अथवा सीबीआई को सौपने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
याचिका में सिचाई परियोजनाओं की लागत पर कई सवाल उठाए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश मोहित साह व न्यायमूर्ति अनूप मोहता की खंडपीठ ने याचिका में उल्लेखित तथ्यों पर गौर करने के बाद सरकार को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।






