नितीन गडकरी से जुड़े पूर्ति के खिलाफ सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार

मुंबई, बॉम्बे हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने भाजपा अध्यक्ष नितीन गडकरी से जुड़े पूर्ति समूह व आईआरबी के बीच कथित आर्थिक लेन देन की जांच की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।
गुरुवार को न्यायमूर्ति पीवी हरदास व न्यायमूर्ति अभय टिप्से की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता केतन तिरोडकर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया।
याचिका में आरोपों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। गडकरी व आईआरबी के संस्थापक डीपी म्हैसकर के संबंधों को उजागर करनेवाली एक खबर के आधार पर दायर याचिका के मुताबिक म्हैसकर ने पूर्ति कंपनी को 164 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था।
इसके बदले गडकरी ने सड़क निर्माण के ठेके से जुड़ी निविदाओं को प्रभावित किया। इसका सीधा फायदा आईआरबी को मिला। 1995 में जब गडकरी सार्वजनिक निर्माणकार्य मंत्री थे तब आईआरबी का कारोबार काफी बढ़ा। सुनवाई के दौरान तिरोडकर ने याचिका के साथ एक और आवेदन दायर करने की अनुमति मांगी।
इस आवेदन के साथ तिरोडकर ने इस मामले को लेकर अलग-अलग विभाग में किए गए पत्राचार को जोड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आईआरबी ने रिश्वत के पैसे सीधे देने की बजाय पूर्ति कंपनी को लोन के रूप में दिए।
पूर्ति में 16 कंपनियों को बड़ी हिस्सेदारी दी गई है। इन कंपनियों के पते जांच में फर्जी पाए गए हंै। कई पते तो मुंबई के झोपड़पट्टी के हैं।
पूर्ति के निदेशक मंडल में गडकरी के ड्राइवर व अन्य फर्जी नाम शामिल हैं। अकेले म्हैसकर ने पूर्ति के चार लाख शेयर लिए हैं।
याचिका में आशंका जताई गई है कि फर्जी कंपनी के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। इसमें कालेधन के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। लिहाजा इस मामले की सीबीआई जांच की जानी चाहिए।








