फर्जी शिक्षा संस्थाओं पर नकेल कसने की तैयारी
मुंबई. फर्जी शिक्षा संस्थानों व गैर मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार विधेयक लाएगी। 11 मार्च से शुरू हो रहे विधानमंडल के बजट सत्र में इसे पेश किया जाएगा।
2011 में ही इस विधेयक को प्रस्तावित किया गया था। लेकिन कुछ मंत्रियों के विरोध की वजह से इसे पेश नहीं किया जा सका था।
इस विधेयक के पारित होने के बाद नए कानून के तहत हर विभाग के लिए अलग-अलग प्राधिकरणों का गठन किया जा सकेगा। इससे इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित अन्य कोर्स के फर्जी शिक्षा संस्थानों और गैर मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों पर नजर रखी जा सकेगी। उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार प्राधिकरण फर्जी डिग्री कोर्स में प्रवेश के लिए अखबारों में छपने वाले विज्ञापनों पर भी नजर रखेगा।
दो साल पहले तैयार इस विधेयक में अब तक कई बार फेरबदल हो चुका है। 2011 में इस विधेयक को कैबिनेट बैठक में राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा गया था। उस समय मुख्यमंत्री ने उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री को प्रस्तावित कानून का दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया था।
उन्होंने कहा था कि शिक्षा की अन्य धाराओं को भी इसमें शामिल किया जाए। उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल ही में एआईसीटीई ने गैर मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों को चलाने वाले संस्थानों की सूची जारी की थी।
फिलहाल विभाग इस मामले की जांच कर सकता है। पीडि़त छात्रोंं की शिकायत पर पुलिस के पास मामला दर्ज करा सकता है। जबकि यह कानून आने के बाद सक्षम प्राधिकरण खुद सीधे कार्रवाई कर सकेगा।
संस्थान को बंद करवाने के साथ-साथ उन पर जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। बता दें कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में गैर मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को ही कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि यह बेहद शर्मनाक स्थिति है।
कई हैं फायदे :
विधेयक पारित होने के बाद सक्षम प्राधिकरणों का गठन किया जा सकेगा। छात्र इस प्राधिकरण के पास अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। फर्जी शिक्षा संस्थानों के साथ-साथ वैध शिक्षा संस्थानों में गैर मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थानों के खिलाफ यह प्राधिकरण 1 से लेकर 5 लाख तक का जुर्माना भी कर सकेगा।
इस मामले में 1 साल तक की सजा का भी प्रावधान रहेगा। प्राधिकरण ऐसे कोर्स चलाने वाले संस्थानों पर कार्रवाई कर सकेगा, जिसको संबंधित नियामक प्राधिकरणों जैसे राज्य सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और ऑल इंडिया कौंसिल फार टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) से मान्यता नहीं मिली है।








