मैंगलोर (कर्नाटक) से रोहा (महाराष्ट्र) तक की दूरी अगर आप ट्रेन से तय करें तो आपका सामना इस उपमहाद्वीप की उस सबसे हैरतंगेज मानवीय संरचना से होगा जिसे बनाने की कल्पना करने से भी लोग घबराते थे।
जी हां, हम बात कर रहे हैं कोंकण रेलवे के नाम से मशहूर उस रेलवे ट्रैक की जो कर्नाटक के मैंगलोर से महाराष्ट्र के रोहा को जोड़ता है।
समुद्र के किनारे बसे ये दोनों ही क्षेत्र आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण थे लेकिन इनके बीच किसी तरह का संपर्क मार्ग न होने से दोनों ही जगह के व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा था।
अंततः सरकार ने उनकी सुध ली और इस क्षेत्र को रेलमार्ग से जोड़ने का फैसला किया। लेकिन फैसला लेने वालों को इस बात का बखूबी ज्ञान था कि इस फैसले को अमलीजामा पहनाना इस सदी की सबसे बड़ी चुनौती है।
सरकार ने इस काम को पूरा करने का जिम्मा रेलवे के एक अधिकारी ई श्रीधरन को सौंपा। 740 किलोमीटर लम्बे इस बेहद दुर्गम रेलमार्ग को बनाने के लिए 2000 पुल और 91 सुरंगे खोदने पड़ीं। इस मार्ग को बनाने के लिए एशिया में पहली बार एक अनोखी तकनीक अपनाई गई।