अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री बनाया जाना असंवैधानिक : खडसे

नागपुर। शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही शिवसेना,भाजपा और मनसे के विधायकों ने ‘मूक मोर्चा’ निकाल कर अजित पवार को फिर से उप-मुख्यमंत्री बनाये जाने का विरोध किया है। विरोधी दल नेता एकनाथ खडसे ने पवार को उप-मुख्यमंत्री बनाये जाने को असंवैधानिक करार दिया है।
विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होते ही सोमवार को विपक्षी विधायकों ने सिंचाई घोटाला, श्वेतपत्र और पवार की ताजपोशी के मुद्दे पर आक्रामक तेवर अख्तियार किया। खडसे ने पवार का विरोध करते हुए कहा कि उप-मुख्यमंत्री का पद संवैधानिक नहीं है। लिहाजा पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की दिलाई गई शपथ असंवैधानिक है। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार को अपनी भूमिका स्पष्ट करने का निवेदन किया। परंतु पवार की ताजपोशी के विरोध में विपक्ष के हमलावर तेवर को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा। विधान परिषद में भी कुछ इसी तरह का नजारा था। वहां भी सत्तारूढ दल और विपक्ष के बीच जमकर तू-तू मैं-मैं हुई। आखिरकार विधान परिषद सभापति ने विपक्ष को शांत करते हुए सदन में कहा कि मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने पवार को विधान परिषद में सदन का नेता नियुक्त किया है। परंतु विपक्षी विधायकों का इस पर समाधान नहीं हुआ और उन्होंने नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट किया।
अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय शरद पवार का : मुख्यमंत्री
अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री बनाये जाने की वजह से विपक्ष ने राज्य सरकार को घेरने की पूरी तैयारी की हुई है। इसी बीच न्यूज चैनलों से बात करते हुए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अजित पवार को फिर से उप-मुख्यमंत्री बनाकर मंत्रिमंडल में लाने का निर्णय पूरी तरह से केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का है। उन्होंने महाराष्ट्र में चव्हाण बनाम पवार की सियासी लड़ाई होने की अटकलों को इस दौरान निराधार बताया। सिंचाई विभाग में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई विभाग ने जो श्वेतपत्र जारी किया है। वह किसी (पवार) को क्लिन चिट या फिर किसी के खिलाप आरोपपत्र नहीं है।






