राजघाट जैसा बने मुंबई में डा. आंबेडकर का स्मारक

मुंबई. इंदू मिल पर प्रस्तावित डा. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक के लिए नए-नए सुझाव सामने आ रहे हैं। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि स्मारक को दिल्ली के महात्मा गांधी स्मारक की तर्ज पर बनाया जाए, जिसे राजघाट के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आंबेडकर स्मारक शानदार बने और ऐसा हो, जिससे दलितों को भी कुछ लाभ मिले।
कई सालों की मांग के बाद इंदूमिल की 12.5 एकड़ जमीन पर डा. आंबेडकर स्मारक बनने का रास्ता हाल में साफ हुआ है। बड़ी कोशिशों के बाद एनटीसी (राष्ट्रीय वस्त्रोद्योग निगम) की यह जमीन स्मारक के लिए देने को केंद्र सरकार तैयार हुई है। मसला जमीन की कीमत का था जो राज्य सरकार देने को राजी नहीं थी।
अब भी जमीन किस शर्त पर दी गई है, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। दादर में समुद्री तट से लगी इस जमीन की कीमत करीब 25,000 करोड़ रुपए आंकी जाती है।
सख्त सीआरजेड (तटीय नियमावली क्षेत्र) के चलते जमीन पर लंबा-चौड़ा निर्माण मुमकिन नहीं है। इसके मद्देनजर विशेषज्ञों का मानना है कि वहां लैंडस्केपिंग होना चाहिए। एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने कहा कि लैंडस्केपिंग के कारण सीआरजेड नियमों की समस्या खड़ी नहीं होगी। हमें किसी भी नियमों का उल्लंघन या निर्माण के लिए मंजूरियों के लिए समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि डा. आंबेडकर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने महानगर में लाखों अनुयायी आते हैं और राज्य भर से आए इन लोगों को मजबूरन सड़क पर रहना पड़ता है। ऐसे में जमीन का इस्तेमाल खुले शयनागार के तौर पर भी हो सकता है।
विशेषज्ञ की मानें तो राज्य सरकार को स्मारक के साथ सम्मेलन केंद्र (कन्वेंशन सेंटर) बनाने की योजना रद्द कर देनी चाहिए, क्योंकि उससे आम लोगों को कोई फायदा नहीं पहुंचता। सरकार की योजना है कि स्मारक पर सम्मेलन केंद्र के साथ-साथ विशाल सभागार भी बनाया जाएगा।
एक अन्य विशेषज्ञ कहते हैं कि आम लोग इन सम्मेलन केंद्रों का उपयोग कहां करते हैं। वहां तो बस नेताओं का बोलबाला रहता है। उन्होंने कहा कि स्मारक को राजघाट की तरह बनाया जाए और वहां शिक्षा व स्वास्थ्य शिविर जैसे सामाजिक गतिविधि के प्रबंध भी हों। यही डा. आंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।







