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नक्सलियों का खौफ बरकरार : 30 वर्षों से जारी संघर्ष को नहीं लगा विराम

Bhaskar News | Dec 12, 2012, 06:06AM IST
 
 


गोंदिया. प्रदेश के सीमावर्ती गोंदिया एवं गड़चिरोली जिले के घने जंगलों में करीब 30 वर्ष पूर्व शुरू हुआ नक्सली आंदोलन सरकार एवं पुलिस प्रशासन की पुरजोर कोशिशों के बावजूद थम नहीं रहा।

 

नक्सलियों का पनाहगाह बने अतिसंवेदनशील इलाकों में आज भी नक्सलियों का खौफ दिखाई पड़ता है।   प्रशासन के अधिकारी एवं सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों में नक्सल आंदोलन  का विरोध करने की हिम्मत दिखाई नहीं देती जबकि  मंत्री एवं विधायक इन क्षेत्रों में जाकर जनता का हालचाल पूछना भी जरूरी नहीं समझते। 

 

निधि देकर कर्तव्यों की इति करने वाली सरकार की उदासीनता के कारण ही  यहां के जनता के दिलों से नक्सली खौफ दूर  नहीं हो पा रहा है।

 

बताया जाता है कि आंध्र प्रदेश की सीमा से सटे गड़चिरोली जिले के सिरोंचा तहसील से नक्सलवाद महाराष्ट्र में पहुंचा। वर्ष १९८० से पैर पसार रहे नक्सलियों के लिए यहां के जंगल पूरक रहे।

 

आज भी गोंदिया जिले के देवरी, सालेकसा एवं सड़क अर्जुनी के अनेक दुर्गम गांव नक्सलियों के पनाहगाह बने हुए हैं। बावजूद नक्सलवाद के खिलाफ विधानसभा में आवाज तेज नहीं  हो पाती है।  उल्लेखनीय है कि सरकार ने नक्सलवाद को मिटाने के लिए अनेक योजनाएं शुरू की है।

 

नक्सल आत्मसमर्पण योजना, नक्सल गांवबंदी करने वाले गांवों के विकास के लिए पुरस्कार के तौर पर निधि दिया जाना, सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने के लिए प्राथमिकता देना आदि योजनाओं को गंभीरता से चलाया जा रहा है।

 

पुलिस की ग्रामभेंट योजना भी एक सराहनीय कदम है। बावजूद सरकारी योजनाओं में दीमक की तरह लगे भ्रष्टाचार के कारण असल आदिवासियों का कागजों में ही विकास दिखाई पड़ता है।

 
 
 

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