2011 मुंबई ब्लास्ट के बाद क्या थी विशेषज्ञों की राय

मुंबई. ठीक एक साल पहले जुलाई महीने में मुंबई बम धमाकों से दहल गई थी. उन धमाकों के बाद विशेषज्ञों ने जो राय व्यक्त की थी उसे जानने के बाद आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार ने इन धमाकों से क्या सबक सीखा और क्यों एक बार फिर सरकार हुई असफल.
सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर जोगिंदर सिंह ने कहा कि यह पूरी तरह इंटेलिजेंस की असफलता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, राज्यों के मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती और इंटेलिजेंस ब्यूरो अपनी सूचनाएं राज्य सरकार को देतीं हैं। लेकिन न तो इंटेलीजेंस की सूचना स्पष्ट होती हैं और होती भी है तो राज्य सरकार की तरफ से लापरवाही बरती जाती है।
सिंह ने कहा कि आईबी द्वारा राज्य सरकारों को दी गई जानकारियां स्पष्ट नहीं होतीं। वे घटना विशेष कब होगी, कौन करेगा जैसी जानकारियां नहीं देते और इन जानकारियों के आधार पर कोई एक्शन लेना संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि हमारा सूचना तंत्र काफी कमजोर है। उन्होंने कहा कि जब तक हम आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी और कठोर कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक इस तरह की घटनाएं होती रहेंगीं। उन्होंने कहा कि भारत में सरकार इसलिए कार्रवाही नहीं करती कि एक वर्ग विशेष नाराज हो जाएगा। सिंह ने कहा कि पूरे समुदाय में बमुश्किल १ फीसदी भी आतंक के समर्थक नहीं होंगे, फिर भी कार्रवाई नहीं की जाती।
पूर्व सीबीआई डायरेक्टर ने कहा कि कानूनों में फेरबदल की जरुरत है। हम आरोपियों को पकड़ नहीं पाते, पकड़ लेते हैं तो सजा नहीं दे पाते, आखिर किस तरह का कानून इस देश में है। उन्होंने माना कि हम अजमल कसाब की सुरक्षा पर जितना खर्च कर रहे हैं, उतना नागरिकों की सुरक्षा पर करें तो बेहतर होगा।
सुरक्षा विशेषज्ञ सुशांत सरीन ने भी माना कि मुंबई पर फिर हुआ हमला खूफिया तंत्र की असफलता तो है, लेकिन किसी भी हमले के लिए प्रशासन और हमारा सिस्टम भी उतने ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री चिदंबरम के अनुसार भीड़भाड़ वाले इलाके में सभी की जांच संभव नहीं है। लेकिन क्या हम नागरिकों को इसी तरह मरने के लिए छोड़ देंगे।
कोई सिस्टम तो बनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका में एक बार हुए हमले के बाद कोई भी आतंकवादी हमला नहीं हुआ। और कभी कोशिश हुई, तो आरोपी गिरफ्तार किए गए। लेकिन हमारा तंत्र इतना मजबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि सूचना तंत्र को मजबूत बनाने के अलावा पुलिस और सुरक्षा में लगे बलों को भी पूरी सुविधाएं मुहैया करवानी होंगीं।
पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल ने कहा कि हर बार खूफिया तंत्र को नकारा बताने से काम नहीं चलेगा। जमीनी स्तर पर पुलिस तंत्र को मजबूत बनाने की जरुरत है। गिल ने कहा कि खूफिया जानकारी हमेशा पुख्ता जानकारियां नहीं दे सकता।
हमें मालूम है कि पाकिस्तान हमारी सुरक्षा में सेंध लगाएगा, आतंकवादी हमला करेंगे लेकिन फिर भी हम जमीनी स्तर पर पुलिस बल को काफी कम सुविधाएं देते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक ऐसा नहीं होगा, घटनाएं होती रहेंगीं और खूफिया तंत्र को दोषी ठहराने से कुछ नहीं होगा।
क्या पाकिस्तान का हाथ है?
मुंबई पर हुए हमले के बाद एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर चर्चा शुरु हो गई है। अगले सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भारत आ रही हैं।
इसी महीने के अंतिम सप्ताह में भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की भी बैठक नई दिल्ली में होना है। लेकिन अब विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव आएगा।
सुरक्षा विशेषज्ञ सरीन ने कहा कि मुंबई में हुए धमाकों में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल हुआ है और इसका उपयोग आम तौर पर पाकिस्तान या अफगानिस्तान में ही होता है।
हालांकि इससे पाकिस्तान का हाथ साबित नहीं होता, लेकिन यह एक जांच का मुद्दा जरूर है। उन्होंने कहा कि यदि धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन का भी हाथ है, तो इसके तार भी पाकिस्तान से ही जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच कोई बातचीत नहीं होती, भारत में कोई आतंकी घटना नहीं होती। लेकिन जैसे ही बातचीत का समय नजदीक आता है, कोई बड़ी घटना होती है।
इससे क्या संकेत मिलते हैं? उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान की बातचीत दो सप्ताह बाद होना है और यदि बीच में मुंबई धमाकों में पाकिस्तान के शामिल होने के कोई सुबुत सामने आते हैं तो बातचीत पर इसका असर जरूर पड़ेगा।
विदेशी मामलों में विशेषज्ञ रेवा भल्ला ने कहा कि इन धमाकों के बाद 2008 में मुंबई में हुए हमले के बाद जैसी नौबत तो नहीं आएगी, लेकिन फिर भी दोनों देशों के रिश्तों में निश्चित ही तनाव आएगा।
उन्होंने कहा कि यह हमला ठीक उसी समय हुआ है, जब अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध बिगड़ रहे हैं और अमेरिका अफगानिस्तान से सेना वापस करने पर गंभीरता से सोच रहा है। भल्ला ने कहा कि इस हमले के बाद भारत अमेरिका पर दबाव डालकर पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बनाएगा।
आपका मत
क्या मुंबई में हुए धमाके पूरी तरह सूचना तंत्र की असफलता हैं? क्या इस घटना में कहीं न कहीं पाकिस्तान का हाथ है? क्या इस घटना के बाद भारत पाकिस्तान के संबंध खराब होंगे? इन सभी मुद्दों पर आप भी दे सकते हैं अपना मत।






